Friday, April 19, 2019

सज्जा कोठी या सदर महल – यहां शिवाजी करते थे गुप्त बैठकें


पन्हाला गढ़ का खास आकर्षण है सज्जा कोठी। वास्तव में इसका निर्माण एक वाच टावर की तरह कराया गया है। पन्हाला गढ़ की यह इमारत वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। इसका लंबाई चौड़ाई 36-36 फीट और ऊंचाई 72 फीट है। ऊपर जाने के लिए बाहर से सीढ़ियां बनी हैं। इसके ऊपरी तल से पन्हाला का सुंदर विस्तार नजर आता है। शिवाजी इसका इस्तेमाल अपनी गुप्त बैठकों के लिए करते थे। 1660 में शिवाजी इसी इमारत से विशालगढ के लिए रवाना हुए थे। यहीं पर शिवाजी ने संभाजी को पन्हाला दुर्ग की जिम्मेवारी सौंपी थी। इसकी ऊंचाई से जोतिबा मंदिर और कोल्हापुर शहर भी नजर आता है। इस इमारत को देखने के लिए हमेशा सैलानियों की भीड़ लगी रहती है।

प्राचीन शिव मंदिर – राजवाड़ा के सामने स्थित शिवमंदिर का निर्माण छत्रपति शाहूजी महाराज ने करवाया था। इस मंदिर के अंदर महारानी ताररानी की चरण पादुका रखी हुई है।

शत्रु संहारक बाघ दरवाजा – पन्हालागढ़ के उत्तरी प्रवेश द्वार का नाम बाघ दरवाजा है। इसकी बनावट ऐसी है कि शत्रु को यहां आसानी से कब्जे में लिया जा सकता है। दरवाजे पर गणेजी की मूर्ति बनी हुई है। यहां तोप रखने की और सैनिकों के विश्राम करने जगह भी बनी हुई है।

दौलती बुर्ज से दूर तक नजर – पन्हाला कोर्ट इमारत के पास दौलती बुर्ज है। इस बुर्ज से 25 मील दूर तक की आवाजाही पर नजर रखी जा सकती है। इसका नाम दौलती बुर्ज यूं पड़ा कि यहां जितने शत्रुओं के टुकड़े किए जाते राज्य की दौलत में उतना ही इजाफा होता था।


तीन दरवाजा या कोंकणी दरवाजा – पन्हाला के पश्चिम की तरह का प्रवेश द्वार तीन दरवाजा है। इसे कोंकणी दरवाजा भी कहते हैं। इसमें पांच मेहराबें और तीन दरवाजे हैं। दरवाजे के मेहराब पर तीन शेरों की आकृति खुदी हुई है। सैनिकों के पानी पीने के लिए यहां एक कुआं बना है जिसका नाम विष्णु तीर्थ है। पन्हाला में आप चार दरवाजा और हरिहरेश्वर विट्ठल मंदिर भी देख सकते हैं।

अंधार बाव मतलब अंधेरी बावड़ी तीन दरवाजा के पास ही दो बावड़ियां हैं जिनके नाम अंधार बाव और श्रंगार बाव है। अंधार बाव मतलब अंधेरी बावड़ी। इसमें तीन मंजिलें पर सामने से एक ही मंजिल नजर आती है। इसके सबसे नीचली मंजिल में कुआं है। बीच की मंजिल से बाहर निकले का एक गुप्त मार्ग है। इस बावड़ी के आसपास नगर परिषद ने सुंदर बागीचा विकसित किया है। इसके आसपास मनोरंजन का पूरा साजो सामान है। कोल्हापुर से काफी लोग पन्हाला पिकनिक मनाने पहुंचते हैं।  



इस बागीचे का पास खाने-पीने की दुकानें हैं। यहां आप ज्वार की रोटी, झुणका भाखरी आदि खा सकते हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए कई तरह खेल तमाशे हैं।
तो चलिए वापस लौट चलते हैं। पन्हाला गढ़ से अगर आप सार्वजनिक वाहन से कोल्हापुर जाना चाहते हैं तो शाम 6.30 बजे के बाद कोई बस या जीप नहीं मिलती है।


कैसे पहुंचे – पन्हालागढ़ की दूरी कोल्हापुर से 24 किलोमीटर है। आप टाउन हाल से जीप से या फिर बस स्टैंड से चलने वाली बसों से यहां पहुंच सकते हैं। या फिर कोल्हापुर आसपास घूमने के लिए दिन भर के लिए टैक्सी आरक्षित कर सकते हैं। अगर आपके पास समय है तो पन्हाला गढ़ में रात्रि विश्राम भी कर सकते हैं। यह एक यादगार अनुभव हो सकता है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com  ( SHIVAJI, PANHALA FORT, KOLHAPUR ) 








No comments:

Post a Comment