Monday, April 15, 2019

जोतिबा मंदिर – हर दिन यहां गुलाल खेला जाता है...


कोल्हापुर के टाउन हॉल से जोतिबा मंदिर जाने के लिए शेयरिंग टैक्सी और बसें मिलती हैं। बसें बस स्टैंड से भी मिल जाती हैं। कोल्हापुर शहर पंचगंगा नदी के तट पर बसा है। रास्ते में नदी पर बना सुंदर घाट नजर आता है। नदी के पुराने पुल को पार कर गाड़ी हरे भरे रास्ते से आगे बढ़ रही है। कोल्हापुर शहर से जोतिबा मंदिर की दूरी 25 किलोमीटर के करीब है। जोतिबा का मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। बस स्टैंड से आपको आधे किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचना पड़ता है। 

जोतिबा कोल्‍हापुर के उत्‍तर में पहाड़ों से घिरा एक खूबसूरत मंदिर है। इस मंदिर की मान्यता स्थानीय लोगों में ज्योतिर्लिंग के समान है। लोग इसे केदारलिंगम कहते हैं। इसके दर्शन से केदारनाथ के दर्शन का पुण्य मिलता है। मंदिर परिसर में शिव के तीन मंदिर हैं। श्रद्धालु तीनो के दर्शन करते हैं। ये तीनों शिव के रूप सत,रज और तम के प्रतीक हैं। इन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का रूप भी माना जाता है। मंदिर में विवाह के बाद दुल्हादुल्हन आशीर्वाद लेने आते हैं। आसपास के श्रद्धालु लोग ढोल बाजा के साथ समूह में मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर में जोतिबा को गुलाल चढ़ाने की पंरपरा है। इसलिए पूरा मंदिर सालों भर गुलाबी रंग के गुलाल से रंगा नजर आता है। मंदिर के आसपास सुंदर सा बाजार और बड़ी संख्या में प्रसाद की दुकाने हैं। बाजार से होकर सीढ़ियां उतरने के बाद आप मंदिर के प्रांगण में पहुंच जाते हैं।

जोतिबा मंदिर का निर्माण 1730 में नवाजीसवा ने करवाया था। पूरा मंदिर काले रंग के पत्थरों से बना हुआ है। मंदिर के दीवारों पर सुंदर नक्काशी देखी जा सकती है। प्रवेश द्वारा पर विशाल नंदी की प्रतिमा है। जोतिबा मंदिर का वास्‍तु प्राचीन शैली का है। यहां स्‍थापित जोतिबा की प्रतिमा चारभुजा धारी है। स्थानीय लोगों में माना जाता है कि जोतिबा भैरव का पुनर्जन्‍म था। उन्‍होंने रत्‍नासुर से लड़ाई में महालक्ष्‍मी का साथ दिया था। रत्‍नासुन के नाम पर ही इस गांव का नाम रत्‍नागिरी पड़ा। बाद में गांव वालों ने इसका नाम जोतिबा रख दिया।

आसपास के लोग जोतिबा मंदिर में पुत्र या पुत्री की कामना लेकर आते हैं। कहा जाता है उनकी कामना पूरी भी होती है। आसपास के काफी लोग तो हर साल जोतिबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन के लिए रोज काफी भीड़ उमड़ती है। दर्शन में कम से कम दो घंटे का समय लग जाता है।
जोतिबा के मंदिर में चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर यहां भव्‍य मेले का आयोजन किया जाता है। उस समय गुलाब उड़ाकर भक्‍त अपनी श्रद्धा का परिचय देते हैं। उस समय तो पूरा पहाड़ भी मानो गुलाबी रंग में रंग जाते हैं।

जोतिबा मंदिर के निर्माण में ग्वालियर के सिंधिया राजघराने का भी योगदान है। मंदिर परिसर में उनके द्वारा बनवाई गई एक बावड़ी है। यहां पर ग्वालियर स्टेट का बोर्ड भी लगा हुआ है। 

मंदिर खुलने का समय -  जोतिबा का मंदिर सुबह 5.30 बजे खुल जाता है। इसके बाद यह रात्रि 10 बजे तक खुला रहता है। मंदिर की व्यवस्था देवस्थान व्यस्थापन समिति वाडी रत्नागिरी देखता है। मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं के रहने के लिए होटल और धर्मशालाएं उपलब्ध हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य Email- vidyutp@gmail.com
( JOTIBA MANDIR, KEDAR LING, SHIVA TEMPLE, KOLHAPUR ) 


4 comments:

  1. यह मेरे लिए नई जानकारी....इस मंदिर के बारे में नही पता था वैसे25 km बाहर है शहर से..बढ़िया जानकारों सर....

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 15/04/2019 की बुलेटिन, " १०० वीं जयंती पर भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह जी को ब्लॉग बुलेटिन का सलाम “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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