Thursday, April 11, 2019

कोल्हापुरी स्वाद के क्या कहने...पालक रोटी, चाय और मटन


महाराष्ट्र का कोल्हापुर शहर अपने स्वाद के लिए जाना जाता है। यहां लोग व्यवहार में मीठे हैं तो खानेपीने में कोल्हापुरी स्वाद की अपनी पहचाना है। चाहे शाकाहारी व्यंजन की बात हो या फिर मांसाहारी कोल्हापुर स्टाइल अलग होता है। इसलिए जब भी महाराष्ट्रियन फूड की बात चलती है कोल्हापुर का नाम सबसे पहले आता है।

सुबह के नास्ते में पालक रोटी – सुबह सुबह कोल्हापुर की सड़क पर महालक्ष्मी मंदिर से ठीक पहले फुटपाथ पर कई औरतें नास्ते स्टाल लगाए ग्राहकों का इंतजार कर रही थीं। पूछने पर बताया कि वे पालक रोटी बना रही हैं। तीस रुपये में एक प्लेट। आटे में पालक के साथ नमक और कुछ मसाले मिलाए गए हैं जो रोटी के स्वाद को काफी जायकेदार बना देते हैं। इसके साथ तीन तरह की चटनी और सलाद। सुबह का इससे बढ़िया नास्ता और क्या हो सकता है। तो सुबह सुबह हमने पालक रोटी खाई। 


कोल्हापुरी मटन और नारियल की चटनी  – तो बात करें कोल्हापुर मटन की। जो लोग मांसाहार करते हैं उनके बीच कोल्हापुर मटन काफी लोकप्रिय है। खास तौर लोग यहां पर मटन की थाली आर्डर करते हैं। इसमें मटन के के साथ नारियल का बना तांबड़ा पांढरा रस्सा पेश किया जाता है।यह कोल्हापुर की खासियत है। नारियल का यह रस्सा खाने की प्लेट को खास बनाता है। इसके अलावा कोल्हापुर की मटन गोली बिरयानी भी काफी प्रसिद्ध है। कोल्हापुर के रेस्टोरेंट के आगे बोर्ड लगा मिलता है- जेवण तैयार आहे.. मतलब खाना तैयार है। और लिखा मिलता है – घरगुती जेवण... मतलब घर जैसा भोजन। 

मुझे रास्ते में एक टैक्सी ड्राईवर बताते हैं कि कोल्हापुर के रेस्टोरेंट वाले खाने को इतना पवित्रता और सफाई से तैयार करते हैं कि यहां खाकर आपका पेट नहीं खराब होगा। हां कोल्हापुर के खाने को खास बनाते हैं यहां के कोल्हापुरी मसाले। कोल्हापुर का गरम मसाला हो या दूसरे मसाले इनका बनाने का अपना अलग तरीका है। तो लब्बोलुआब यह है कि आप अगर चिकेन मटन खाने के शौकीन हैं तो कोल्हापुर आपको खूब पसंद आएगा। बड़े रेस्टोरेंट से लेकर स्ट्रीट फूड तक हर तरह के खाने के स्वाद ले सकते हैं। आपकी जेब अनुकूल काफी कुछ है यहां।

महाराष्ट्र के दूसरे शहरों में कोल्हापुरी स्वाद के नाम पर रेस्टोरेंट का संचालन होता है। अगर आप शाकाहारी हैं तो भी कोल्हापुर में तमाम रेस्टोरेंट आपका स्वागत करने को तैयार हैं। यहां भोजनालय के लिए खानवाल शब्द चलता है मराठी में। महालक्ष्मी मंदिर के पास निर्मल साई खानवाल में 55 रुपये की थाली है। इस थाली में भाकरी, ताक (छाछ) , चपाती, भाजी, खर्डा, भात, वरण, आमटी आदि मिलता है। कई होटलों पर बोर्ड लगा है – अस्सल कोल्हापुरी स्वाद। रसोई घर के लिए बोर्ड लगा है – जेवण विभाग।

कोल्हापुर की चाय – बिंदू चौक से महालक्ष्मी मंदिर जाने के रास्ते में एक पढे लिखे नौजवान चाय की दुकान लगाए खड़े हैं। वे 10 रुपये में एक कप चाय दे रहे हैं। पर उनकी चाय खास है। इसमें वे 10 तरह की जड़ी बूटियां मिलाते हैं। सारी जड़ी बूटियां उन्होने सजा रखी हैं। उन्हें खल में कूटकर चाय में मिला रहे हैं। हालांकि मैं चाय कम पीता हूं, पर ऐसी चाय पीने के लिए तो एक बार रुक ही गया।

येवले अमृततुल्य चहा... कोल्हापुर में बिंदू चौक पर येवले चहा की ब्रांडेड दुकान दिखी। चाय 10 रुपये की है। पर इंपोरियम की तरह साफ सुथरी विशाल दुकान है। इनकी ब्रांच कई और शहरों में खुल चुकी है। सभी जगहों पर एक जैसी चाय के स्वाद का दावा करते हैं। उनका दावा है कि वे फिल्टर पानी का इस्तेमाल करते हैं। सर्वोत्तम क्वालिटी की चाय पत्ती की चाय लोगों को पिलाते हैं।

दाबेली का स्वाद - कोल्हापुर के रंकाला लेक के पास रात को स्ट्रीट फूड की लंबी चौड़ी दुकाने सजती है। पावभाजी, चाउमीन से लेकर काफी कुछ। पर मुझे यहां पसंद आई दाबेली। दाबेली पाव है पर इसमें भाजी या बड़ा की जगह चटनी सेव और मसाले भरे जाते हैं।

देर रात गए कोल्हापुर के बाजार में मैं एक आईसक्रीम और जूस की दुकान में पहुंच गया हूं। इंपिरियल कोल्ड ड्रिंक हाउस। यह 1910 में स्थापित जूस की दुकान है। यहां पर आप आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और अलग अलग तरह के जूस का स्वाद ले सकते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
(KOLHAPUR FOOD, TEA, NON VEG FOOD, PALAK ROTI ) 

8 comments:


  1. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 11/04/2019 की बुलेटिन, " लाइफ सेट करने वाला मंत्र - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. बढ़िया घुमक्कड़ी कराई सर आपने खाने की जिसमे कोल्हापुरी मसाले दाभेली येवले चाय और जड़ी बूटी वाली चाय...बढ़िया सफर जारी रहे जी...

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    1. धन्यवाद, आप हौसला बढ़ाते रहें

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  3. सार्थक जानकारी
    बहुत बढ़िया
    सादर

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  4. रोचक सफर रहा आपका। चाय, कोल्हापुरी थाली और दाबेली। जब मैं मुंबई में था तो दाबेली ही मुझे पसंद आया था। वड़ा पाव वगैरह कभी पसंद नहीं आया। अच्छी घुमक्क्ड़ी।

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