Friday, April 5, 2019

छत्रपति शाहूजी महाराज जिन्होंने 1902 में आरक्षण लागू किया

छत्रपति शाहू जी महाराज संग्रहालय – कोल्हापुर
महाराष्ट्र का कोल्हापुर शहर अपनी कलात्मकता के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक विरासत को समेटे इस शहर का महाराष्ट्र के कला के क्षेत्र में बड़ा योगदान है। आजकल ये शहर कोल्हापुर चप्पल, कोल्हापुरी खानपान और कोल्हापुरी फेटा के लिए जाना जाता है।

ब्रिटिश काल में कोल्हापुर 19 तोपों की सलामी वाला प्रिंसले स्टेट हुआ करता था। यहां मराठा राजाओं छत्रपति भोंसले का शासन था। वे छत्रपति शिवाजी के वंशज थे।



कोल्हापुर राजघराने की संस्थापक ताराबाई भोंसले थीं। वह छत्रपति राजाराम भोसले की रानी थीं। 1707 के बाद इस राजघराने का शासन ब्रिटिशकाल तक रहा। इस राजघराने में सबसे चमकदार इतिहास छत्रपति (राजर्षि) शाहूजी महाराज ( 26 जून 1874 - 6 मई 1922) का रहा है। उनकी ख्याति लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षक और समाजसुधारक के तौर पर है। वे महात्मा ज्योतिबा फूले के विचारों से प्रभावित थे। उनका राज्याभिषेक 1894 में 20 वर्ष की आयु में हुआ था। सन 1902 में शाहूजी महाराज ने अपने राज्य में आरक्षण लागू कर दिया। राज्य की नौकरी में 50 फीसदी सीटें पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षित कर दिया। इतना ही नहीं शाहूजी महाराज ने अपने राज्य में कानून बनाकर सार्वजनिक स्थलों पर छूआछूत पर रोक लगा दी थी। वे खुद भी दलितों के हाथ बनी हुई चाय पीने में गर्व महसूस करते थे।

छत्रपति शाहू महाराज की 1917 से 1921 के बीच डॉक्टर भीमराव आंबेडकर से कई बार मुलाकातें भी हुई। उन्होंने डॉक्टर आंबेडकर की सलाह पर भी कई सुधारवादी कदम अपने राज्य में लागू किए।


कोल्हापुर का पैलेस और संग्रहालय - 1884 में बने इस महल का महाराजा का नया महल भी कहा जाता है। इसमें अब संग्रहालय स्थित है। इस महल का डिजाइन मेजन मंट ने तैयार किया था। महल के वास्‍तुशिल्‍प पर गुजरात और राजस्‍थान के जैन और हिंदू कला तथा स्‍थानीय रजवाड़ा शैली का मिला जुला नमूना है। महल की पहली मंजिल पर वर्तमान राजा का परिवार रहता है। वहीं भूतल पर महल के अंदर ही छत्रपति शाहूजी संग्रहालय भी है। इस संग्रहालय में वस्‍त्रों, हथियारों, खेलों, आभूषणों आदि का संग्रह प्रदर्शित किया गया है।

महल के मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर लॉन में छत्रपति शाहूजी महाराज की एक प्रतिमा नजर आती है। प्रवेश का टिकट 35 रुपये का है। संग्रहालय में जूते उतार कर अंदर जाना पड़ता है। अंदर फोटोग्राफी निषेध है। संग्रहालय के अंदर लकड़ी के राजसी फर्नीचर, सोफा सेट, पालकी आदि देखी जा सकती है। राजा के शिकार की तस्वीरे हैं। कुछ बाघ और जीते भूसा भरकर रखे गए हैं। हाथी दांत की कारीगरी के नमूने वाली कुछ वस्तुएं भी देखी जा सकती हैं।

इस राज घराने का लोगो था जय भवानी... यहां आप राज परिवार द्वारा इस्तेमाल किए गए बर्तन भी देख सकते हैं। पीतल के बर्तन और टोंटी वाले आकर्षक बर्तनों का संग्रह है। यहां आनंदी बाई महारानी साहिबा की सुंदर संगमरर की एक प्रतिमा है। महल में चौपड़ के खेल और उनकी गोटियां भी देखी जा सकती हैं।

संग्रहालय में घूमते हुए आप दरबार हाल में पहुंच जाते हैं। इसकी छत काफी ऊंची है। इस संग्रहालय में ब्रिटिश वायसराय और गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से लिखे गए कई पत्र भी यहां देखे जा सकते हैं। यहां पर महाराज छत्रपति शाहूजी की इस्तेमाल की हुई बहुत सी वस्‍तुएं प्रदर्शित की गई हैं। इनमें खास तौर पर आप बंदूकें, राज परिवार को समय समय पर मिली ट्रॉफियां और और राजशाही के  कपड़े आदि देख सकते हैं। महल के बाहर लॉन में कुछ छोटी और बड़ी तोपें भी देखी जा सकती हैं।

संग्रहालय देखने के लिए आप कम से कम दो घंटे का समय अपने लिए निकाल कर रखें। संग्रहालय के बाहर एक कैफेटेरिया और पास में विशाल तालाब भी है।
कैसे पहुंचे – रेलवे स्टेशन से संग्रहालय की दूरी 4 किलोमीटर के आसपास होगी। मुख्य शहर के टाउन हॉल से शेयरिंग आटो से यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। संग्रहालय खुलने का समय सुबह 9.30 से शाम 5.30 तक का है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( KOLHAPUR, CHATRAPATI SHAHUJI MHARAJ MUSEUM, NEW PALACE )


4 comments:

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति 540वीं जयंती - गुरु अमरदास और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान जरूर बढ़ाएँ। सादर ... अभिनन्दन।।

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