Thursday, March 28, 2019

सिद्धि विनायक मंदिर - गणपति के शरण में

यूं तो मुंबई कई बार आ चुके हैं हम। मुंबई के ज्यादातर स्थलों को देख भी चुके हैं पर सिद्धिविनायक मंदिर जाना नहीं हो सका है। तो इस बार इच्छा है मंदिर जाने की। सिद्धिविनायक मंदिर दादर रेलवे स्टेशन से करीब है। गुजरात एक्सप्रेस से उतरने के बाद सिद्धिविनायक जाने के लिए हमलोग फ्लाईओवर से रेलवे लाइन पार करके दूसरी तरफ आ गए हैं। एक टैक्सीवाले से सिद्धिविनायक जाने की बात की। वह बोला जाम मिलता है मीटर से नहीं 50 रुपये फिक्स किराया लूंगा। हमारे पास चार लगेज भी हैं तो हम तैयार हो गए। दादर से सिद्धिविनायक मंदिर तकरीबन दो किलोमीटर है। थोड़ी देर में हमलोग मंदिर पहुंच गए हैं।

मंदिर के प्रवेश द्वार से पहले प्रसाद की दर्जनों दुकाने हैं। एक दुकान में सारा लगेज रख दिया। इसके एवज में दुकान महोदय से 100 रुपये का प्रसाद लिया और मंदिर में दर्शन के लिए लाइन में लग गए। दिसंबर 26 साल 2018 बुधवार का दिन है। गणेश जी का दिन।
भक्तों की जल्दी सुनते हैं सिद्धि विनायक
सिद्धि विनायक मतलब प्रथम पूज्य श्रीगणेश का खास रूप। गणपति का यह रूप काफी अलग है। मुंबई का सबसे लोकप्रिय मंदिर है प्रभा देवी स्थित सिद्धि विनायक मंदिर। यहां बड़े बड़े उद्योगपति राजनेता और फिल्म स्टार भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मुंबई के सारे मंदिरों की तुलना में यहां सबसे ज्यादा भीड़ होती है। मुंबई ही क्या यह देश के सबसे व्यस्त गणपति के मंदिरों में शामिल है। बुधवार को श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ जाती है। गणेश चतुर्थी जैसे समय में दर्शन में 14 से 20 घंटे भी लग सकते हैं।

ऐसे होते हैं सिद्धिविनायक -  कहा जाता है कि गणेश जी जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्धि विनायक मंदिर कहलाते हैं। कहते हैं कि सिद्धि विनायक की महिमा अपरंपार है, वे भक्तों की अति शीघ्र सुनते और मनोकामना पूरी करते हैं।

मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण 1801 में विट्ठु और देउबाई पाटिल ने किया था। पहले यह छोटा सा मंदिर था। पहले यह ईंटों की बनी हुई कुछ फीट चौड़ी संरचना थी। बाद में इसे भव्य रूप प्रदान किया गया। इस मंदिर के अंदर एक छोटे मंडपम में भगवान गणेश के सिद्धि विनायक रूप की प्रतिमा स्थापित की गई है।


सिद्धि विनायक का यह विग्रह ढाई फीट ऊंचा है। उनके ऊपरी दाएं हाथ में कमल और बाएं हाथ में अंकुश है। नीचे के दाहिने हाथ में मोतियों की माला और बाएं हाथ में मोदक से भरा कटोरा है। गणपति के दोनों ओर उनकी दोनों पत्नियां रिद्धि और सिद्धि मौजूद हैं जो धन, ऐश्वर्य, सफलता और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने का प्रतीक है। मस्तक पर अपने पिता शिव के समान एक तीसरा नेत्र और गले में एक सर्प हार के स्थान पर लिपटा है। मंदिर में सूक्ष्म शिल्पाकारी से परिपूर्ण गर्भगृह के लकड़ी के दरवाजों पर अष्ट विनायक को प्रतिबिंबित किया गया है। अंदर की छतें सोने की परत से सुसज्जित हैं।

मुंबई का सबसे अमीर मंदिर - अब मंदिर का प्रबंधन सिद्धि विनायक ट्रस्ट देखता है। आज यह मुंबई का सबसे धनी मंदिर है। अरबों रुपये मंदिर के खाते में फिक्स्ड डिपोजिट में जमा है। यह मंदिर मुंबई के लोगों के दिल के बहुत करीब है। 

मंदिर परिसर में फूलमाला और प्रसाद की सौ से ज्यादा दुकाने हैं। जहां से आप प्रसाद लेकर मंदिर में दर्शन के लिए जा सकते हैं। वैसे आप मंदिर के काउंटर से भी प्रसाद खरीद सकते हैं।

सात किलो का मोदक - मंदिर का मुख्य प्रसाद मोदक है। यहां पर कुछ दुकानों में सवा किलो का मोदक मिलता है तो यहां सात किलो का एक मोदक भी खरीदा जा सकता है।

मुख दर्शन और गर्भ गृह दर्शन- मंदिर में दो तरह के दर्शन हैं। मुख दर्शन और गर्भ गृह दर्शन। जिन लोगों को कम समय में दर्शन करना हो वे मुख दर्शन कर सकते हैं। इसमें गणपति के दर्शन दूर से होते हैं। जबकि गर्भ गृह में जाकर दर्शन करने में लंबी लाइन में लगना पड़ता है। समान्य दिनों में भी कम से कम दो घंटे का समय लग सकता है। मंगलवार और बुधवार को दर्शन में और भी ज्यादा समय लग सकता है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य Email- vidyutp@gmail.com
( MUMBAI, SIDDHI VINYAK TEMPLE, PRABHA DEVI, DADAR ) 

2 comments:

  1. बढ़िया जानकारी सर सिद्धिविनायक मंदिर की....

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