Monday, March 25, 2019

हीरों की नगरी सूरत में

दिसंबर के आखिरी हफ्ते की खिली खिली सुबह के बीच सूरत रेलवे स्टेशन पहुंच चुके हैं हमलोग । सूरत गुजरात का कारोबारी शहर। हीरों की नगरी। साड़ियों की नगरी। अभी मुंबई जाने वाली रेलगाड़ी में समय है। तो कुछ समय इस नगर में। अब हमलोगों को सुबह के नास्ते के लिए एक शाकाहारी रेस्टोरेंट की तलाश है।
रेलवे स्टेशन के पास ही हमलोग पूछते हुए महालक्ष्मी गुजराती भोजनालय पहुंचते हैं। नाम गुजराती है पर सुबह सुबह यहां दक्षिण भारतीय नास्ता मिल रहा है।
यहां मसाला डोसा, पेपर डोसा और उत्पम मिल रहा है। हमें ऐसा ही कुछ तो चाहिए था। यहां खाने पीने की दरें भी वाजिब हैं। तो नास्ता इस तरह कर लिया गया कि दोपहर तक खाने की कोई खास जरूरत न रहे। पेट पूजा के बाद हमलोग सूरत रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ चले। ट्रेन आने में अभी वक्त है तो हमें स्टेशन पर थोड़ा इंतजार करना होगा। 

हीरों की नगरी सूरत – गुजरात का ये शहर सूरत हीरों की नगरी है। भले ही यहां हीरे की खान नहीं है। पर हीरों को तराशने का काम यहां बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इसे डायमंड सिटी के नाम से जाना जाता है। देश के जाने माने हीरा तराशने वाले फर्म सूरत से ही हैं। सूरत के हीरा कारोबार में हजारों लोग काम करते हैं। हीरों के कई मशहूर ब्रांड का रिश्ता सूरत शहर से है। साल 2011 में शहर की जनसंख्या 45 लाख से अधिक थी।



सूरत वह शहर है जहां मुगल काल में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना कारखाना लगाकर तिजारत शुरू किया था। तो यह उद्योग व्यापार की पुरानी नगरी है। आज सूरत की प्रसिद्धि साड़ियों के निर्माण और हीरों के कारण है। देश के कई प्रसिद्ध हीरों के ब्रांड सूरत में अपना प्रोसेसिंग प्लांट संचालित करते है। सूरत रेलवे स्टेशन पर लगे कुछ म्यूरल्स हीरों के निर्माण प्रक्रिया की दर्शाते हैं।

आबादी में सूरत गुजरात का सबसे बड़ा शहर है। यह अमीर व्यापारियों के साथ ही गरीब मजदूरों का भी शहर है। लाखों की संख्या में दूसरे राज्यों से आए हुए मजदूर यहां पर फैक्टरियों में श्रमिक के तौर पर काम करते हैं। खास तौर पर कपड़ों का उद्योग यहां बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देता है।



हरिपुरा कांग्रेस हुआ था यहां : आपको पता है कांग्रेस का 51 वां अधिवेशन 1938 में सुभाषचंद्र बोस की अध्यक्षता में हरिपुरा में हुआ था। ये हरिपुरा कहां है। उत्तर है सूरत शहर के पास ही हरिपुरा एक गांव हुआ करता था। अब यह सूरत शहर का बाहरी हिस्सा हो गया है। कांग्रेस अधिवेशन के लिए हरिपुरा को बड़े ही कलात्मक ढंग से सजाया गया था। 

जब शिवाजी ने सूरत को लूटा : गुजरात में सूरत और अहमदाबाद की गिनती अमीर शहरों में होती थी। छत्रपति शिवाजी ने 3 अक्तूबर 1670 को सूरत पर चढ़ाई कर तीन दिन तक लूटा था। नगर से ढेर सारा सोना लूटने के बाद शहर के लोगों को एक पत्र लिखा कि अगर इस लूट से बचना चाहते हो तो मुझे 12 लाख रुपये सालाना देना स्वीकार करो।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  vidyutp@gmail.com
-        (SURAT, GUJRAT, DIMOND CITY, HARIPURA CONGRESS )


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