Sunday, March 24, 2019

दिल्ली से डायमंड सिटी सूरत की उड़ान

दिल्ली से गुजरात के शहर सूरत की उड़ान है हमारी। भला सूरत क्यों। दरअसल जाना तो मुंबई या पुणे था लेकिन सूरत की फ्लाइट सस्ती मिल रही थी इसलिए सूरत का ही टिकट ले लिया। सोचा वहां से मुंबई रेल से चले जाएंगे। इंडिगो की उड़ान है सुबह सुबह टी-2 से। नए बने टर्मिनल टी-2 से उतरना-चढ़ना कई बार हो चुका है। 

बाहर से टी-2 भव्य नहीं लगता पर अंदर सब ठीक-ठाक है। एयरपोर्ट के बुक स्टाल पर देख रहा हूं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जीवन पर भी किताब आ गई है। बिक भी रही है। क्रिसमस का मौका है तो एयरपोर्ट के लांउज में सुंदर क्रिसमस ट्री सजा है। लोग उसके साथ सेल्फी ले रहे हैं। 

नियत समय पर बोर्डिंग पास लेकर हमलोग इंतजार कर रहे हैं। यहां एयर ब्रिज से प्रवेश नहीं है। हालांकि टी-2 पर एयरब्रिज की सुविधा है। पर तमाम सुबह की फ्लाइट के लोगों को बस से ले जाते हैं। हालांकि एयरब्रिज बोर्डिंग का समय बचाता है।
 जो इंडिगो का विमान सूरत तक उड़ान भर रहा है यह आगे बेंगलुरू जाने वाला है। विमान तकरीबन डेढ़ घंटे बाद अपने सही समय पर सूरत में उतर गया। इसे कैप्टन रोहित वर्मा उड़ा रहे थे। को-पायलट हैं अरविंद पाटिल। क्रू मेंबर हैं रोहिणी, आसमां, पूजा और प्राची। सबका धन्यवाद। सुबह-सुबह सूरत एयरपोर्ट से हमलोग बाहर निकल आए हैं। बाहर खिली-खिली धूप पसर रही है।


अब हमें शहर जाना है। सूरत एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन 18 किलोमीटर है। हालांकि शहर जाने के लिए एयरपोर्ट से शटल बस सेवा है, पर मैने पता किया है वह देर से आएगी। यहां प्रीपेड टैक्सियां थोड़ी महंगी हैं। रेलवे स्टेशन के लिए ओला उबर की दरें भी 300 से ज्यादा आ रही हैं।
हमलोगों ने एक आटो वाले से बात की। वह 200 रुपये पर तैयार हुआ रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए। आटो में बैठने के बाद पता चला कि सूरत एयरपोर्ट से आधा किलोमीटर चलने पर हाईवे आ जाता है जहां से आपको सिटी बसें भी मिल सकती हैं।

हम जिस आटो में सवार हैं वह आटोवाला थोड़ा चालाक है। रेलवे स्टेशन के पास छोड़ने के बाद मुझसे 200 की जगह 250 मांगने लगा। काफी हुज्जत के बाद माना।

हीरों की नगरी सूरत में

सूरत रेलवे स्टेशन पहुंच चुके हैं हमलोग । सूरत गुजरात का कारोबारी शहर। हीरों की नगरी। साड़ियों की नगरी। अभी मुंबई जाने वाली रेलगाड़ी में समय है। तो कुछ समय इस नगर में। अब हमलोगों को सुबह के नास्ते के लिए एक शाकाहारी रेस्टोरेंट की तलाश है।


स्टेशन के पास हमलोग पूछते हुए महालक्ष्मी गुजराती भोजनालय पहुंचते हैं। नाम गुजराती है पर सुबह सुबह यहां दक्षिण भारतीय नास्ता मिल रहा है।
यहां मसाला डोसा, पेपर डोसा और उत्पम मिल रहा है। हमें तो यही चाहिए था। खाने पीने की दरें भी वाजिब हैं। तो नास्ता इस तरह कर लिया गया कि दोपहर तक खाने की कोई खास जरूरत न रहे। पेट पूजा के बाद हमलोग सूरत रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ चले। ट्रेन आने में अभी वक्त है तो हमें स्टेशन पर थोड़ा इंतजार करना होगा। 



हीरों की नगरी सूरत सूरत हीरों की नगरी है। भले ही यहां हीरे की खान नहीं है। पर हीरों को तराशने का काम यहां बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इसे डायमंड सिटी के नाम से जाना जाता है। देश के जाने माने हीरा तराशने वाले फर्म सूरत से ही हैं। सूरत के हीरा कारोबार में हजारों लोग काम करते हैं। साल 2011 में शहर की जनसंख्या 45 लाख से अधिक थी।



सूरत वह शहर है जहां मुगल काल में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना कारखाना लगाकर तिजारत शुरू किया था। तो यह उद्योग व्यापार की पुरानी नगरी है। आज सूरत की प्रसिद्धि साड़ियों के निर्माण और हीरों के कारण है। देश के कई प्रसिद्ध हीरों के ब्रांड सूरत में अपना प्रोसेसिंग प्लांट संचालित करते है। सूरत रेलवे स्टेशन पर लगे कुछ म्यूरल्स हीरों के निर्माण प्रक्रिया की दर्शाते हैं।


आबादी में सूरत गुजरात का सबसे बड़ा शहर है। बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आए हुए मजदूर यहां पर फैक्टरियों में श्रमिक के तौर पर काम करते हैं। 

हरिपुरा कांग्रेस : आपको पता है कांग्रेस का 51 वां अधिवेशन 1938 में सुभाषचंद्र बोस की अध्यक्षता में हरिपुरा में हुआ था। ये हरिपुरा कहां है। उत्तर है सूरत शहर के पास ही हरिपुरा एक गांव हुआ करता था। अब यह सूरत शहर का बाहरी हिस्सा हो गया है। कांग्रेस अधिवेशन के लिए हरिपुरा को बड़े ही कलात्मक ढंग से सजाया गया था। 

जब शिवाजी ने सूरत को लूटा: गुजरात में सूरत और अहमदाबाद की गिनती अमीर शहरों में होती थी . छत्रपति शिवाजी ने 3 अक्तूबर 1670 को सूरत पर चढ़ाई कर तीन दिन तक लूटा था। नगर से ढेर सारा सोना लूटने के बाद एक पत्र लिखा कि अगर इस लूट से बचना चाहते हो तो 12 लाख रुपये सालाना देना स्वीकार करो।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  vidyutp@gmail.com
-        (SURAT, GUJRAT, DIMOND CITY, HARIPURA CONGRESS )


6 comments:

  1. सुभाषचंद्र बोस की अध्यक्षता में जो अधिवेशन हुआ वो सुनकर अच्छा लगा...ऑटो वाले को 200 की जगह 250 नही मांगने चाहिए.....मुंबई जाने के बदले सूरत की फ्लाइट ली फिर वहां से ट्रैन....ग़ज़ब है घुमक़्क़डी....

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  2. Surat ki pista ghaadi mithai khai ya nahin? Gujarat mein naukri ke darmyan ye meri pasandida mithai ban gai thi.

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    1. नहीं खाई, कहां मिलती है, बताएं अगली बार खाउंगा

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    2. Ye Surat ki special mithai hai aur wahan ki kisi bhi achchhi mithai dukan mein uplabdh hai. Surat mein hi mujhe kai baar isey khane Ka mauqa mila. Gujarat ke kisi anya shehar mein bhi ye shayad hi miley. Ab jyada bataane ki sthiti mein nahin hoon, munh mein paani aa raha hai.

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