Tuesday, March 19, 2019

तीसरी सदी का बुलंद इतिहास - हनुमान गढ़ का भटनेर दुर्ग

दोपहर के बाद पीलीबंगा से मैंने हनुमानगढ़ की बस ले ली है। बस में बैठने से पहले गाजर का जूस पी लेना ठीक रहेगा। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिला और जिला मुख्यालय शहर है। हनुमानगढ़ शहर में बस प्रवेश करने के बाद  रेलवे स्टेशन के पास उतार देती है। मैं टहलता हुआ रेलवे स्टेशन पहुंच जाता हूं। स्टेशन का बाहरी हिस्सा बड़े करीने से सजाया गया है।

स्थानीय लोगों से मैं भाटनेर किला जाने का रास्ता पूछता हूं। लोगों ने कहा शेयरिंग आटो में बैठ जाइए जो सिटी बस स्टैंड की तरफ जा रहा हो। सिटी बस स्टैंड के पास ही किला है।


राजस्थान का सबसे संपन्न जिला - क्या आपको पता है कि उत्तरी राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला राजस्थान का सबसे संपन्न जिला है। संपन्न इसलिए की सबसे अच्छी खेतीबाड़ी हनुमानगढ़ जिले में ही है। जमीन की सबसे अधिक कीमतें यहां हैं। जिले में कुल सात तहसीलें हैं। हनुमानगढ़, संगरिया, रावतसर, नोहर, भादरा, टिब्बी और पीलीबंगा। इनमें हनुमानगढ़ तहसील सबसे बड़ी और टिब्बी तहसील सबसे छोटी है।

नए बस स्टैंड से पहले बायीं तरफ सड़क से अंदर जाने पर भटनेर दुर्ग दिखाई देता है। थोड़ा पैदल चलने पर दुर्ग का प्रवेश द्वार नजर आता है। किले में प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है।

 राजस्थान के हनुमानगढ़ में स्थित 1700 साल पुराना भटनेर का किला भारत के सबसे पुराने किलों में से एक है। इस किले का निर्माण जैसलमेर के भाटी राजपूत राजा भूपत सिंह ने 295 ई में किया था। वास्तव में हनुमानगढ़ का पुराना नाम भटनेर था, जिसका मतलब है भाटी का किला। भाटी राजपूत यदुवंशी हैं और खुद का भगवान कृष्ण का वंशज मानते हैं। प्राचीन दिल्ली मुल्तान व्यापारिक मार्ग पर बने होने के कारण भटनेर का अपना अलग ही सामरिक महत्त्व था।
मरुस्थल से घिरे इस किले का घेरा लगभग 52 बीघा भूमि पर फैला है। इस दुर्ग में अथाह जलराशि वाले कुएं हैं। तैमूर ने अपनी आत्‍मकथा 'तुजुक-ए-तैमूरी' में लिखा है -'मैंने इस किले के समान हिन्दुस्तान के किसी अन्‍य किले को सुरक्षित और शाक्तिशाली नहीं पाया है।'


किले का निर्माण पक्की ईंटों और चूने द्वारा किया गया है। यह इसके स्थापत्य की प्रमुख विशेषता है। उत्तरी सीमा का प्रहरी होने के कारण भटनेर दुर्ग को काफी बाहरी आक्रमण झेलने पड़े। इतने हमले देश के किसी और दुर्ग ने नहीं झेले। सन 1001 ईस्वी में भटनेर दुर्ग को महमूद गजनवी का आक्रमण हुआ। 1398 में भटनेर दुर्ग पर तैमूरलंग ने आक्रमण किया। तैमूर ने चार दिन तक भटनेर दुर्ग को लूटा। हजारों स्त्रियों और पुरुषों का बेरहमी से कत्ल किया।

मंगलवार को जीता तो नाम हुआ हनुमानगढ़ -  सन 1805 में बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने यह किला भाटियों से जीत लिया था। तब किले पर जाब्ता खां भाटी का कब्जा था। इसी विजय को आधार मान कर, जो कि मंगलवार के दिन हुई थी, इस शहर का नाम हनुमानगढ़ रखा गया। मंगलवार को हनुमान जी का दिन माना जाता है। इस जीत के उपलक्ष में किले में हनुमानजी के एक मंदिर का निर्माण करवाया गया। 

महाराजा सूरतसिंह जी के पुत्र महाराजा दलपतसिंह जी के निधन के बाद उनकी छह रानियां इसी दुर्ग में सती हो गई थी, जिनकी किले के प्रवेश द्वार पर एक राजा के साथ छह स्त्रियों की आकृति बनी हुई है।

आज भटनेर के दुर्ग में अंदर जाने पर कुछ खास दिखाई नहीं देता। किले की मोटी और मजबूत दीवारों के बाद अंदर देखने योग्य कुछ खास नहीं बचा है। किले के प्राचीर से हनुमानगढ़ शहर का नजारा दिखाई देता है। किले में स्थित हनुमान जी के मंदिर के दर्शन के लिए लोग आते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
(HANUMANGARH, BHATNER FORT, BAHTI KINGS, HANUMAN TEMPLE ) 

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