Wednesday, March 13, 2019

श्रीगंगानगर फूड बास्केट ऑफ राजस्थान


श्रीगंगा नगर उत्तरी राजस्थान का प्रमुख शहर है। आपको पता यह मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह की जन्म स्थली है। जगजीत सिंह से मेरी कई मुलाकाते हुईं जिसमें वे श्रीगंगा नगर को याद करते थे। मुझे लगता है इस शहर के लोग भी उनको याद करते होंगे।

श्रीगंगानगर एक योजनाबद्ध शहर है। इसका नाम बीकानेर के राजा महाराज गंगा सिंह बहादुर के नाम पर पड़ा। इस शहर की योजना में आवासीय ब्लॉक और बाजार को अलग अलग रखा गया था। ये इलाका सतलुज दरिया के पानी से सींचित है। 1925 से 1927 के बीच फिरोजपुर से नहर बनाकर इस इलाके में पानी लाया गया था। 26 अक्तूबर 1927 को गवर्नर जनरल लार्ड इरविन ने 143 किलोमीटर लंबी गंग नहर का उदघाटन किया था। पानी के कारण खेतीबाड़ी अच्छी होती है। इसलिए इसे फूड बास्केट ऑफ राजस्थान कहा जाता है। 

आजादी के बाद इंदिरा कैनाल परियोजना से इलाके और पानी मिलने लगा है। गेहूं, सरसों और कपास इलाके की प्रमुख फसल है। यहां गाजर की खेती भी खूब होती है। मैंने यहां गाजर को साफ करने वाली मशीनें देखीं। लाल रंग का जो गाजर आपके हाथ मेंपहुंचता है उसे उखाड़ने के बाद उसमें लगी मिट्टी और जडों के रेशे को मशीनों से साफ किया जाता है।  

श्रीगंगानगर बस स्टैंड के आसपास सस्ते होटलों की अच्छी संख्या है। वैसे श्रीगंगा नगर का मुख्य बाजार गोल बाजार है। आसपास में दूर दूर से लोग खरीददारी करने यहां आते हैं।
श्रीगंगा नगर जिले में अनूपगढ़ शहर में किला है। इसके पास ही लैला मजनूं की मजार है, जहां जून में मेला भी लगता है। हिंदूमल कोट में भारत पाकिस्तान की सीमा है।

श्रीगंगानगर कालीबंगा वाया पीलीबंगा
श्रीगंगानगर से हमारी अगली मंजिल है कालीबंगा। राजस्थान का हड़प्पाकालीन शहर। वहां पहुंचने के लिए श्री गंगा नगर के बस स्टैंड से हमने पीली बंगा की बस ली है। पीलीबंगा से कालीबंगा की दूरी 6 किलोमीटर है। इससे पहले श्रीगंगा नगर शहर में थोड़ी से पेट पूजा कर चुका हूं। कुछ हल्के पराठे सब्जी के साथ उदरस्थ कर लिए हैं।

श्रीगंगा नगर से पीलीबंगा की अच्छी खासी दूरी है।  कुल 65 किलोमीटर। बस शहर में सुखाड़िया सर्किल से बाहर निकलकर हाईवे पर एनएच 62 पर आ गई है। यह अबोहर सूरतगढ़ हाईवे है। शहर के बाहर हाईवे पर हमें दैनिक भास्कर का प्रिंटिंग प्रेस नजर आता है। रास्ते में कैचिंगा जैसे छोटे ठहराव आते हैं। खेतों में खूब हरियाली दिखाई दे रही है। कैचिंगा में बस ने हाईवे छोड़ दिया और ग्रामीण सड़क पर चल पड़ी। रास्ते में एक चेकिंग स्टाफ ने बस रुकवाई। बस की चेकिंग में दो लोग बिना टिकट निकले। कंडक्टर पर बन आई। उसने भला टिकट क्यों नहीं बनाया था। राजस्थान रोडवेज की बसें बड़े अनुशासन में चलती हैं। आगे गोलूवाला नामक छोटा सा बाजार आया। थोड़ी देर में हम पीलीबंगा बस स्टैंड में पहुंच गए हैं।

पीलीबंगा राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले का एक शहर है। यहां नगरपालिका है। रेलवे स्टेशन बस स्टैंड के आसपास मुख्य बाजार है। तो अगर आपको कालीबंगा जाना हो तो पीलीबंगा तक ट्रेन से भी आ सकते हैं। दिल्ली से अवध आसाम एक्सप्रेस बठिंडा, मंडी डबवाली, हनुमानगढ़, पीलीबंगा होते हुए सूरतगढ़ फिर लालगढ़ (बीकानेर ) तक जाती है।

पीलीबंगा बस स्टैंड में मैंने अपने बस कंडक्टर को बताया कि हमें कालीबंगा जाना है तो उसने कहा फिर आप इसी बस में बैठे रहिए। दरअसल ये बस श्रीगंगानगर से रावतसर तक जा रही है। बस स्टैंड से बस निकलने के बाद रेलवे क्रासिंग पार करके आगे बढ़ी छह किलोमीटर चलने के बाद उन्होंने हमें एक चौराहे पर उतर जाने को कहा। तो हम कालीबंगा पहुंच गए हैं।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
(SRIGANGA NAGAR, RAJSTHAN, PILIBANGA, RAWATSAR, KALIBANGA ) 

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