Friday, March 1, 2019

गुरु नानक देवजी ने यहां दिया एक ओंकार का संदेश

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जालंधर शहर के कपूरथला चौक से कपूरथला जाने वाली बस में बैठ गया हूं। वैसे इस चौराहे से कपूरथला की दूरी 25 किलोमीटर है। हर 15 मिनट पर बस मिलती है। मतलब जालंधर, फगवाड़ा, कपूरथला एक ही शहर के हिस्से लगते हैं। वैसे तो कपूरथला अलग जिला है। कपूरथला चौक से तीन किलोमीटर आगे बस्ती बावा खेल से आगे सर्जिकल एंड स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में हमारे समाचार पत्र अमर उजाला का दफ्तर हुआ करता था। 

यहां मैंने 1999-2001 के बीच काम किया था। अब कपूरथला रोड के औद्योगिक क्षेत्र के आगे वरियाणा गांव में बड़े बड़े फ्लैट बन गए हैं। इसी रोड पर आगे पुष्पा गुजराल साइंस सिटी और पंजाब टेक्निकल यूनीवर्सिटी का कैंपस बन गया है। अब जालंधर और कपूरथला का अंतर पता नहीं चलता। मैं बस कंडक्टर को बताता हूं कि मुझे सुल्तानपुर लोधी जाना है तो वह मुझे बस स्टैंड से पहले की रेल कोच फैक्ट्री वाले मोड पर उतर जाने को कहता है। यहां मुझे सुल्तानपुर लोधी जाने वाली दूसरी बस मिल जाती है। यह बस हसनपुर स्थित रेल कोच फैक्ट्री के बगल से गुजरती है। कपूरथला का रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ ) देश भर में अपनी पहचान रखता है। 


आरसीएफ कैंपस में जालंधर- कपूरथला, लोहियां खास, फिरोजपुर लाइन का हसनपुर नामक रेलवे स्टेशन भी है। तकरीबन एक घंटे के सफर के बाद मैं सुल्तानपुर लोधी पहुंच गया हूं। सिख इतिहास में सुल्तानपुर लोधी अत्यंत महत्वपूर्ण शहर है पर इसका बस स्टैंड वीरान सा है। वहां यात्री सुविधाएं न के बराबर हैं। मैं लोगों से रास्ता पूछकर बेर साहिब गुरुद्वारा पहुंच गया हूं। सुल्तानपुर लोधी वह पवित्र धरती है जहां सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 14 साल गुजारे थे।

कभी बौद्ध धर्म का बड़ा केंद्र था: सुल्तानपुर लोधी शहर का नाम सुल्तान खान लोधी के नाम पर रखा गया है। वे 1103 में मुहम्मद गजनी के महमूद का जनरल था। उसका उल्लेख आईन-ए-अकबरी में भी मिलता है। पर पहली से छठी शताब्दी तक सुल्तानपुर लोधी बौद्ध धर्म का बड़ा केंद्र था। यहां बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु ध्यान किया करते थे। गजनी के आक्रमण से पहले इस शहर का नाम सरवमानपुर हुआ करता था।

पहले गुरु ने यहां गुजारे थे जीवन के 15 साल 
गुरुनानक देव जी की जन्म ननकाना साहिब में हुआ था। पर उन्होंने सुल्तानपुर लोधी में 14 साल, 9 महीने, 13 दिन गुजारे। उन्होंने यहां नवाब के मोदीखाना में प्रबंधक के तौर पर नौकरी भी की।

बेर साहिब सुल्तानपुर का मुख्य गुरुद्वारा है जो काली बेईं नदी के तट पर स्थित है। यह वही जगह है जहां पर गुरु नानक देव जी सूर्योदय के बाद एक बेर के पेड़ के नीचे ध्यान लगाते थे। यह बेरी का पेड़ गुरुद्वारा में आज भी पीछे की ओर मौजूद है। पेड़ हरा-भरा है। इसमें बेर लगते हैं। यहां आने वाले भक्त बेरी के पेड़ के नीचे बैठकर कीर्तन सुनते हैं। 




ऐसा कहा जाता है कि इस जगह पर गुरु नानक ने दैवीय शक्ति के साथ प्रत्यक्ष संपर्क किया था। एक बार उन्होंने काली बेई नदी में डुबकी लगाई। वे तीन दिन बाद पानी से बाहर निकले। वह 1507 का साल था। तब उन्होंने यहां पर संगतों को संदेश दिया – एक ओंकार, सतनाम करता पुरुख, निरभव निरवैर, अकाल मूरत, अजुनी सैभ, भंग, गुरु प्रसाद। यह संदेश सिख धर्म का मूल मंत्र बन गया।

हर साल बेर साहिब गुरुद्वारा के आसपास गुरुनानकदेव जी के प्रकाश पर्व (जन्मोत्सव) के समय बड़ा मेला लगता है। बेर साहिब में मुख्य गुरुद्वारा का निर्माण महाराजा कपूरथला द्वारा करवाया गया है। यहां सालों भर गुरु का लंगर चलता रहता है।

सुल्तानपुर लोधी में आप गुरुद्वार बेर साहिब के अलावा गुरुद्वारा हट्ट साहिब, गुरुद्वारा बेबे नानकी भी देख सकते हैं। गुरुद्वारा हट्ट साहिब में गुरुनानक देव जी द्वारा मोदीखाने में इस्तेमाल किए जाने वाले बाट आदि देखे जा सकते हैं। बेबे नानकी गुरुनानक देव जी की बड़ी बहन थीं। ये गुरुद्वारा उनकी याद में 1970 के आसपास बनवाया गया था।

 विद्युत प्रकाश मौर्य Email – vidyutp@gmail.com
(SULTANPUR LODHI, KALI BAI RIVER, GURUNANK DEV JI, BER SAHIB GURUDWARA ) 

1 comment:

  1. आज ही एक पंजाबी दोस्त के यहां गया तो इस जगह और गुरु नानकदेव को जल समाधि की बात पता चली और अब यह पढ़ने मिल गया...बढ़िया जानकारी...

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