Friday, March 15, 2019

काली बंगा मतलब काली चूड़ियां – ईसा पूर्व 4000 का संपन्न नगर

हम राजस्थान के कालीबंगा में पहुंच गए हैं। पीलीबंगा से कालीबंगा की कुल दूरी 7 किलोमीटर है। रावतसर मार्ग पर कालीबंगा गांव के लिए मोड़ आता है। वहां पर बसें उतार देती हैं। अगर आपके पास निजी वाहन नहीं है तो कालीबंगा के ऐतिहासिक अवशेष देखने के लिए आपको पैदल चलना पड़ेगा। चौराहे पर कालीबंगा का संकेतक लगा है। मैं पैदल चल पडा हूं। तभी एक आटो रिक्शा आता दिखा। मैंने हाथ दिखाया, उन्होंने रोक कर बिठा लिया। पर कालीबंगा संग्रहालय के सामने उतरने पर जब मैं उन्हें पैसे देने लगा तो बिना लिए चलते बने। दरअसल इस आटो को एक परिवार रिजर्व करके ले जा रहा था, और उन्होंने हमे लिफ्ट दे दी थी। 


कालीबंगा आजकल जहां मिट्टी के टीले दिखाई देते हैं, उन्हें देखकर अचरज होता है कि यहां ईसा पूर्व 4000 साल पहले विशाल और संपन्न नगर हुआ करता था। हां आज का यह छोटा सा गांव पर कभी समृद्ध शहर हुआ करता था। पर आसपास लोग इस समृद्ध विरासत को लेकर ज्यादा जागरुक नहीं है। सन 1947 में देश विभाजन के बाद सिंधु घाटी सभ्यता के दो अवशेष स्थल हड़प्पा और मोहनजोदड़ो पाकिस्तान में चले गए। पर आजादी के बाद हमें कालीबंगा के बारे में पता चला। आखिर इस कालीबंगा का मतलब क्या है। पंजाबी में 'वंगा' का अर्थ चूड़ी होता है, इसलिए काली वंगा अर्थात काली चूडियां।

सन 1952 से पहले कालीबंगा के इतिहास पर ज्यादा कुछ मालूम नहीं था। पर 1952 में यहां हुई खुदाई के बाद यहां 2600 ई. पूर्व से लेकर 1900 ई. पूर्व के मध्य विशाल और समृद्ध नगर होने के अवशेष मिले। कालीबंगा में हड़प्पा सभ्यता के बहुत दिलचस्प और महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं। काली बंगा एक छोटा नगर था। यहां एक दुर्ग मिला है।

प्राचीन सरस्वती नदी घाटी जिसे वर्तमान में घग्घर नदी माना जाता है उसके क्षेत्र में सिंधु घाटी सभ्यता से भी प्राचीन कालीबंगा की सभ्यता पल्लवित और पुष्पित हुई। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित कालीबंगा को 4000 ईसा पूर्व से भी अधिक प्राचीन नगर माना जाता है। पर इसकी खोज का श्रेय 1952 ई में अमलानंद घोष को जाता है।

1922 में आरडी बनर्जी के नेतृत्व में हुई खुदाई में मोहनजोदाड़ो औ हड़प्पा का पता चला था जो अब पाकिस्तान में हैं। बाद में इस सभ्यता के समकालीन 100 नगरों के होने का अनुमान लगाया गया था। उनमें से दो समृद्ध नगर भारत में मिले हैं। एक गुजरात में लोथल और दूसरा राजस्थान में कालीबंगा। 
कालीबंगा मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा के बाद तीसरा सबसे समृद्ध नगर माना जाता है। कालीबंगा में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने एक संग्रहालय का निर्माण कराया है। इसी संग्रहालय के पीछे कालीबंगा का उत्खनन स्थल है। तकरीबन दो वर्ग किलोमीटर में फैले इस उत्खनन स्थल में आजकल सिर्फ मिट्टी के टीले नजर आते हैं। पर यहीं पर कभी समृद्ध नगर हुआ करता था।

विशाल दुर्ग और उन्नत शहर - सिंधु घाटी सभ्यता के अन्य केन्द्रो से काफी अलग कालीबंगा में एक विशाल दुर्ग के अवशेष मिले हैं। इससे पता चलता है कि यहां के रहने वाले नागरिकों ने अपने लिए सुरक्षात्मक उपाय किए थे। कालीबंगा में तीन टीलों के अवशेष मिले हैं। एक बड़ा टीला है जबकि दो छोटे टीले हैं। यहां किले मिट्टी की कच्ची ईंटो से बनाए गए थे।

काली बंगा के लोगों में खेती करने का ज्ञान होना, दुर्ग बना कर सुरक्षा करना, यज्ञ करना आदि उस समय की उन्नति के भाव को दर्शाता है। लोगों के रहने वाले घर 4 से 5 कमरों वाले थे। उनमें कुछ छोटे कमरे भी थे। घर के बाहर चबूतरा भी हुआ करता था। नगर के चारों ओर चौड़ी दीवारें और खाई बनी थी।  जाहिर है कि यहां रहने वाले लोग प्रागैतिहासिक काल में हड़प्पा सभ्यता से कई दृष्टि से उन्नत थे।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com 
(KALIBANGA, HANUMANGARH, RAJSTHAN, HARAPPA ) 

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