Saturday, February 9, 2019

आबू पर्वत की अधिष्ठात्री देवी - आर्बुदा देवी का मंदिर


राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू की पहाड़ियों की ऊंची चोटी पर अर्बुदा देवी का प्राचीन मंदिर स्थित है। ऊंची पहाड़ी के बीच अर्बुदा माता का मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के रुप में निर्मित है। सफेद संगमरमर से बना यह छोटा सा मन्दिर एक ऊंची और विशाल पहाड़ी के बीचों-बीच में स्थित है और बहुत भव्य और आकर्षक लगता है।

इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के प्रभास खंड में आता है। इस  मंदिर को 5500 साल पुराना माना जाता है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर हनुमान जी और गणेश जी विद्यमान हैं। प्राचीन शिलालेखों और साहित्यिक ग्रंथों में आबू पर्वत को अर्बुदगिरी याअर्बुदांचल भी कहा गया है। अर्बुदा देवी आबू की अधिष्ठात्री देवी हैं। आबू पर्वत शाक्त धर्म का प्रमुख केन्द्र और अर्बुदेश्वरी का निवास माना जाता था।

अधर देवी और मां कात्यायनी - यह मंदिर माता के प्रमुख शक्ति स्थलों में गिना जाता है। श्री अर्बुदा देवी माताजी का मंदिर को नव दुर्गा की षष्ठम रूप मां कात्यायनी शक्तिपीठ भी कहा जाता है। मां अर्बुदा देवी को यहां अम्बिका देवी के नाम से पुकारा जाता है। देवी को यहां लोग अधर देवी भी कहते हैं। लोग इसे देश के 52 शक्तिपीठों में भी गिनते हैं। कहा जाता है यहां माता के अधर गिरे थे। पर इसकी पुष्टि नहीं होती।
सफेद संगमरमर से बने इस मन्दिर की विशेषता यह है कि इस मन्दिर में देवी की प्रतिमा हवा में (अधर में) लटकी प्रतीत होती है। इसी कारण इसे अधर माता भी कहा जाता है। आबू पर्वत और नगर की प्रतिरक्षक मानी जाने वाली अधर देवी की उक्त प्रतिमा कृष्ण वर्ण की है जिसका ललाट चांदी से चमकीला है। वे मस्तक पर स्वर्ण मुकुट धारण किए हुए हैं।
कहा जाता है कि अर्बुद नामक सांप के नाम पर इसका नाम अर्बुदा पडा़। ऋषि वशिष्ठ ने अर्बुदा को वरदान दिया था कि तुम सभी देवी देवताओं के साथ यहां निवास करोगे। मान्यता है कि माता दुर्गा यहां अर्बुदा देवी के रूप में प्रकट हुईइसलिए इसका नाम अर्बुदा पड गया।

अबुर्दा देवी का यह मंदिर भारत के प्रमुख शक्ति मंदिरों में से एक है जहां आकर सभी श्रद्धालु अपनी समस्त चिंताओं से मुक्त हो मां की शरण प्राप्त करता है।कहा जाता है कि जो मां आर्बुदा के आशीर्वाद को ग्रहण करता है उसके सभी दुख और चिंताएं दूर हो जाती हैं। मां के दरबार में माता की ज्योत अनवरत जलती रहती है।

परमार वंश की कुल देवी – अर्बुदा देवी राजस्थान की लोक देवी हैं। इन्हें परमार वंश के लोग कुल देवी के तौर पर पूजते हैं। माउंट आबू स्थित अर्बुदा माता के दर्शन के लिए राजस्थान के अलग अलग हिस्से से लोग जत्था बनाकर पदयात्रा करते हुए आते हैं। यहां हर साल चैत्र और आश्विन की नवरात्र के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है।

कैसे पहुंचे - आबू रोड में नरवी तालाब से अचलेश्वर की तरफ जाते हुए अर्बुदा देवी का मन्दिर आता हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का रास्ता है। लगभग 450 सीढ़ियां चढ़ने पर मन्दिर में पहुंचा जा सकता है। आपको दर्शन में दो घंटे या अधिक समय लग सकता है। अर्बुदा देवी के गर्भ गृह में प्रवेश के लिए श्रद्धालुओं को गुफा के संकरे मार्ग में होकर बैठकर जाना पड़ता है। मंदिर के पास ही मन्दाकिनी नदी बहती है।


सोमनाथ महादेव मंदिर – हमारे चालक महोदय हमें दिलवाड़ा से लौटने के बाद सोमनाथ महादेव के मंदिर में ले गए हैं। यह जंगलों के बीच एक सुंदर शांत मंदिर है। इस मंदिर में भगवान शिव के अलावा दूसरे देवताओं की भी मूर्तियां है। मंदिर से लगा हुआ एक छोटा सा सरोवर है। इस सरोवर में लोग रंग बिरंगी मछलियों को दाना दिया करते हैं। हमने भी थोड़ी देर तक मछलियों को चारा देने का सौभाग्य प्राप्त किया। इसी दौरान हमें तालाब में एक विशाल सांप भी नजर आया।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य Email- vidyutp@gmail.com
(ARBUDA DEVI, KATYAYANI, MOUNT ABU, SOMNATH MAHADEV TEMPLE ) 

No comments:

Post a Comment