Tuesday, February 5, 2019

दिलवाड़ा में दाल बाटी चूरमा और नक्की लेक का यादगार डिनर

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हमलोग टैक्सी में बैठकर माउंट आबू घूमने के लिए निकल पड़े हैं। हमारे टैक्सी वाले अमृत भाई ( 99504 58282 ) ने बताया कि लंच आप दिलवाड़ा में चलकर करें तो अच्छा होगा। माउंट आबू से दिलवाड़ा की दूरी 6 किलोमीटर है। तो टैक्सी वाले भाई ने हमें दिलवाड़ा जैन मंदिर के पास ले जाकर एक रेस्टोरेंट का सामने रोक दिया। यह खूब चलता हुआ रेस्टोरेंट है। नाम है श्रीनाथ जी रेस्टोरेंट। 

भीड़ के कारण सर्विस में थोड़ी देर हुई। हमलोग सीधे खाने पर टूट पड़े। अनादि ने मीनू कार्ड देखते ही दाल बाटी का आर्डर कर दिया। और वाकई इस रेस्टोरेंट की दाल बाटी सबसे उम्दा थी। हमारे अब तक के सफर के दाल बाटी की तुलना में। यहां 120 रुपये की दाल बाटी की थाली है। खास तौर पर उनकी दाल का स्वाद लाजवाब था।

हमने एक और राजस्थानी चपाती चावल वाली थाली मंगवाई। सफर के बाद हमने यहां छककर खाया। वैसे माउंट आबू के होटलों में आपको गुजराती थाली भी हर जगह मिल जाएगी। क्योंकि यहां गुजरात से सालों भर सैलानी आते हैं। माउंट आबू में गुजरात भवन, गुजरात सर्किट हाउस भी स्थित है।
टैक्सी वाले भाई का घर यहीं था। उन्होंने कहा था कि खाने और दिलवाड़ा मंदिर के दर्शन के बाद हमें फोन कर देना फिर हम आगे चलेंगे। वैसे माउंट आबू में खाने पीने के सबसे ज्यादा रेस्टोरेंट नक्की झील के पास मार्केट में हैं। क्योंकि शाम को सबसे ज्यादा बहार नक्की झील के पास रहती है। देश भर से आए सैलानी यहीं चहलकदमी करते हैं और फिर पेट पूजा के बाद अपने होटल की ओर जाते हैं। तो यहां पर बड़ी संख्या में आइसक्रीम पार्लर भी हैं। मतलब आबू की  गुनगुनी ठंड के बीच आप आइसक्रीम का स्वाद लें। तो अनादि भी बिना आइसक्रीम के कहां मानने वाले थे। हनीमून प्वाइंट के पास चनाजोर गरम का भी स्वाद लिया गया सामूहिक रूप से।

नक्की झील के पास चाचा कैफे यहां की लोकप्रिय कैफे है जहां लोग शाम गुजारते हैं। वैसे खाने पीने के लिए लोकप्रिय स्थलों में आर्बुदा का नाम भी है। हमें जयंत पारीख भाई साहब ने वहां जाकर खाने की सलाह दी थी। यह शाकाहारी फेमिली रेस्टोरेंट अंबेडकर सर्किल पर स्थित है। पर हम तो किसी और होटल में चले गए। दरअसल नक्की झील के पास के होटल वाले आपको आवाज लगाकर खाने के लिए बुलाते रहते हैं। खाना सभी होटलों का अच्छा है। आप अपनी पसंद से चयन कर सकते हैं। रात में एक बार फिर अनादि की थाली में दाल बाटी थी तो हमारी पसंद राजस्थानी थाली। वैसे नक्की लेक पर काठियावाड़ी रेस्टोरेंट भी हैं। आप नक्की लेक से आगे पार्क के पास स्ट्रीट फूड का भी मजा ले सकते हैं।

आप यहां चॉकलेट फैक्ट्री में अलग अलग किस्म के चॉकलेट का भी आनंद ले सकते हैं। हां नक्की झील के ठीक सामने चा ... में चाय का स्वाद लेना न भूलें। वहां चाय के साथ कॉफी, समोसा, कचौरी और पोहा भी मिलता है। सब कुछ वाजिब दरों पर। इसलिए भीड़ भी खूब होती है।

पहाड़ी लाल मूली – माउंट आबू में हमने लाल मूली बिकते हुए देखी। सड़कों केकिनारे इसके स्टाल लगे थे। पूछने पर बताया गया कि यह पहाड़ी लाल मूली है। ऐसी मूली सिर्फ माउंट आबू के आसपास ही होती है। हालांकि हमने इसे चखकर नहीं देखा।

अगली सुबह सड़क पर मुझे राजस्थान सरकार की अन्नपूर्णा योजना की गाड़ी दिखाई दी। मैं सुबह का नास्ता पोहा लेकर खाने लगा। जब पैसे देने की बारी आई तो पता चला कि यह दिवाली तक बिल्कुल फ्री हो गया। राजस्थान में चुनाव का ऐलान हो चुका है और इसके साथ ही अन्नपूर्णा योजना पर नास्ता और भोजन फ्री मिलने लगा है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( DELWARA, MOUNT ABU, LUNCH, DAL BATI ) 

5 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन कवि प्रदीप और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. राजस्थानी भोजन के क्या कहने !

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  3. Itna swadisht bhojan dekh kar munh men pani aa gaya. Thanks.
    Kripya inhe bhi dekhen- Objectives of organic farming in india , Dry farming crops in india

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