Sunday, February 3, 2019

माउंट आबू - आरावली की गोद में राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन


होटल विनायक माउंट आबू और जयंत पारीख - माउंट आबू में हमारी बुकिंग होटल विनायक में है। एक दिन पहले ही होटल वाले जयंत पारीक साहब का फोन आ गया था। उन्होंने होटल पहुंचने का रास्ता बता दिया था। आप बस स्टैंड से पहले ही गैस गोदाम के पास उतर जाइएगा। वहां से बाईं तरफ हमारा होटल बिल्कुल पास में है। हमने बस के कंडक्टर को बता दिया था कि पुरानी चुंगी के पास ही उतार दिजिएगा। 


इसका फायदा हुआ कि हमारा समय और टैक्सी से होटल तक पहुंचने का खर्च बचा। वैसे तो हम देश के तमाम शहरों में होटल बुक करके ठहरे हैं। पर जयंत पारीख की तरह मददगार और दोस्ताना व्यवहार वाले होटल प्रबंधक बहुत कम मिले हैं। होटल में पहुंचते ही कमरे में सामान रखवाने के बाद हम उनकी मदद लेने लगे।हमें दोपहर का खाना खाने के बाद आधे दिन में माउंट आबू के प्रमुख स्थानों को घूमना था। 


माउंट आबू में बाइक रेंटल खूब चलने लगा है। पर मेरे बेटे अनादि अब बड़े हो गए हैं। पास एक ट्रैफिक पुलिस वले पूछा गया। उन्होने बताया कि अब पति-पत्नी के साथ इस बच्चे को बिठाया तो ट्रिपल लोडिंग मानी जाएगी। तो अब हमें एक टैक्सी बुक करनी थी। वह भी रियायती दरों पर आनन-फानन में बुक  कराने में उन्होने हमारी तेजी से मदद की।अपने स्टाफ को भेजकर टैक्सी स्टैंड से एक टैक्सी मंगाई। 

टैक्सी क्या हमें विशाल स्टेशन वैगन मिल गई। पारिख साहब के होटल विनायक में रेस्टोरेंट है, पर वहां खाना पहले आर्डर करने पर बनता है। उन्होंने सलाह दी कि आप घूमने निकल जाओ रास्ते में कहीं भोजन कर लेना। उन्होंने हमें माउंट आबू के दर्शनीय स्थलों का एक पर्चा दिया। घूमने का रुट बनाया। साथ ही यह बताया कि किस स्थल को किस तरीके से घूमें और इनमें से क्या जरूर देखें। तो हमारी मुश्किल आसान हो गई और हम आसानी से घूमने निकल गए। 

वैसे होटल विनायक बस स्टैंड से डेढ़ किलोमीटर पहले है। पर माउंट आबू में कुछ दिन आराम से गुजराने का इरादा हो तो यह बेहतरीन होटल है। सुबह के नास्ते में उनके यहां बेहतरीन आलू पराठा मिल जाता है। उन्होंने हमें माउंट आबू में शॉपिंग और आगे की यात्रा की प्लानिंग को लेकर भी काम की सलाह दी।

तो अब कुछ बातें आबू के बारे में। आबू शह का का पुराना नाम आर्बुदा है। वैसे इसका पुराना नाम नंदिवर्धन भी मिलता है। जैन ग्रन्थ विविध तीर्थ कल्प के अनुसार आबू पर्वत की तलहटी में अर्बुद नामक नाग का निवास था। अर्बूद ही अपभ्रंश होकर आबू हो गया। आबू से दूर होने के कारण रेलवे स्टेशन का नाम आबू रोड है। आबू में आर्बुदा माता का मंदिर भी है। आर्बुदा माता परमार वंश के शासकों की कुल देवी भी हैं। राजस्थान के आसपास के शहरों से श्रद्धालु पदयात्रा करते हुए माता के मंदिर तक आते हैं।

तो माउंट आबू में क्या क्या देखें -
दिलवाड़ा जैन मंदिर- ( 6 किलोमीटर ) 
नक्की झील – बोटिंग और झील के किनारे शॉपिंग
सनसेट प्वाइंट और हनीमून प्वाइंट-
भारत माता की मूर्ति-
गुरु शिखर ( सबसे ऊंची चोटी, बस स्टैंड से 15 किलोमीटर )
आर्बुदा देवी मंदिर - ( माउंट आबू की देवी ) 
माउंट आबू वाइल्ड लाइफ सेंचुरी-
गौमुख मंदिर  और अचलगढ़ फोर्ट –

आप माउंट आबू में कम से कम दो दिन गुजारें तो अच्छा रहेगा। अगर आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं तो आपके लिए माउंट आबू में कुछ अच्छे विकल्प भी हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य Email - vidyutp@gmail.com
( MOUNT ABU, ARBUDA, RAJSTHAN ) 

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