Saturday, February 23, 2019

जोधपुर की मावा कचौरी और नई सड़क , त्रिपोलिया में शॉपिंग

मेहरानगढ़ किला देखकर  लौटने के बाद भूख लग गई है तो हमलोग पहुंच गए हैं नई सडक पर होटल प्रिया में खाने के लिए। उनका मीनू खाने के लिए काफी अच्छा है। थाली में आई हर सामग्री का स्वाद भी बेहतर है। वैसे सामने जनता स्वीट होम में भी ऊपर भोजनालय है। नई सड़क पर दोनो ही खाने के लिए अच्छी जगह है। पर आटो वाले जवाहर ने प्रिया होटल में खाने की सलाह दी। पर अपनी पिछली बार की जोधपुर यात्रा में मैं मावा कचौरी का स्वाद नहीं चख सका था। तो इस बार जाने से पहले जनता स्वीट होम से मावा कचौरी पैक करा लिया। जैसा की नाम से ही जाहिर है मावा कचौरी मीठी होती है। तो प्याज कचौरी का स्वाद तो इस बार कई दफे लिया। दोनों ही जोधपुर की पहचान है। 

जोधपुर में शॉपिंग और नेशनल हैंडलूम – जोधपुर शहर के पुराने इलाके में शॉपिंग के लिए त्रिपोलिया गेट, नई सड़क जैसे इलाके प्रमुख हैं। यहां पर खासतौर पर बंधेज ( टाई एंड डाई ) खरीदा जा सकता है। मतलब सलवार सूट, साड़ियां और दुपट्टे। रंग बिरंगे लहंगे भी यहां देख सकते हैं। जोधपुरी सूट की अपनी अलग पहचान है। राजस्थान की बेडशीट जोधपुर के बाजारों से आप खरीद सकते हैं।

त्रिपोलिया बाजार के दुकानदारों से आप हल्का मोलभाव कर सकते हैं। पर जोधपुर शॉपिंग के लिए अच्छी जगह है। दुकानदार ग्राहको से ठगी नहीं करते। चीजें वाजिब दाम पर और अच्छी मिलती हैं। सिर्फ कपड़े ही नहीं घर सजाने के लिए हैंडीक्राफ्ट आइटम भी यहां से खरीदे जा सकते हैं।

अगर आप ज्यादा दौड़भाग और मोलभाव नहीं करना चाहते तो नई सड़क पर नेशनल हैंडलूम के शो रुम में पहुंच जाएं। चार मंजिला शोरुम में एक ही छत के नीचे हर तरह की सामग्री मिल जाएगी। यहां कोई मोल भाव नहीं है। एक दाम का शोरुम है। नेशनल हैंडलूम के शोरुम जयपुर अहमदाबाद, सूरत जैसे शहरों में भी हैं। यह निजी क्षेत्र के बड़े नेटवर्क वाला शोरुम है।

और अब दिल्ली वापसी – शॉपिंग के लिए जोधपुर की सड़कों पर घूमते हुए हमलोग काफी थक चुके हैं। शाम गहराने लगी है। इसके साथ ही हमारी ट्रेन का समय भी नजदीक आता जा रहा है। तो इस बार के लिए राजस्थान इतना ही। पर जोधपुर का बाजार तो माधवी को इतना पसंद आया कि वे कह रही हैं कि सिर्फ शॉपिंग के लिए यहां दुबारा आया जा सकता है।

दिल्ली के लिए हमारा टिकट जोधपुर सराय रोहिल्ला सुपर फास्ट एक्सप्रेस में है। यह ट्रेन मंडोर एक्सप्रेस से पहले शाम सात बजे जोधपुर से चलती है। स्टेशन पर पहुंचने के बाद रेलवे स्टेशन के सामने के एक रेस्टोरेंट से खाना पैक करा लिया। ट्रेन के कोच में बैठकर आराम से खाएंगे ऐसा सोचकर। खाना पैक कराने के बाद सरस के मिल्क पार्लर से दही लेने गया तो पता चला कि सरस की दही तो मदर डेयरी और अमूल से सस्ती है। 12 रुपये में 200 ग्राम का कप।

ये क्या है... प्याज कचौरी...
वापसी में हमारी ट्रेन राय का बाग, जोधपुर कैंट को छोड़ती हुई आगे बढ़ रही है। साथिन रोड के बाद गोटान से नागौर जिला आरंभ हो जाता है। पर ये ट्रेन जोधपुर के बाद सीधे मेड़ता रोड ( जिला नागौर ) में ही रुकती है। इस बीच हमलोगों ने खाने पीने का कार्यक्रम शुरू कर दिया है। 

हमारी रेल रेन, डिगाना जंक्शन जैसे स्टेशनों से गुजरती हुई दिल्ली की ओर बढ़ रही है। डिगाना जंक्शन भी नागौर जिले का प्रमुख स्टेशन है। इसके बाद खाटू, छोटी खाटू, डीडवाना जैसे स्टेशनों को पार करती हुई ट्रेन लाडनू होते हुए चुरू जिले में प्रवेश कर जाती है। सुजानगढ़ चुरु जिले का रेलवे स्टेशन है जहां ट्रेन का ठहराव है। इसके बाद रतनगढ और फिर चुरु शहर। महेंद्रगढ़, रेवाड़ी जैसे स्टेशन हमारी नींद के दौरान ही निकल गए। सुबह के 5 बजे हैं,हमारी नींद खुल चुकी और हमारी ट्रेन धीरे धीरे दिल्ली के सराय रोहिला रेलवे स्टेशन में प्रवेश कर रही है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( RAJSTHAN, JODHPUR, NAI SARAK , TRIPOLIA ) 

1 comment:

  1. सुन्दर विवरण। इस साल के आखिरी एक दिन और साल के शुरुआत के एक दिन हमने जोधपुर ही गुजारे थे। मावा कचोरी मैंने चखी थी लेकिन मुझे अत्यधिक मीठी लगी। पसंद नहीं आयी। नमकीन कचोरी जोधपुर में रेलवे स्टेशन के बाहर चखी थी जो कि पसंद आई थी।

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