Saturday, February 2, 2019

झीलों की नगरी से आबू पर्वत की ओर

हल्दी घाटी में कुछ घंटे गुजारने के बाद हम उदयपुर वापस चलने को तैयार हैं। पर हमारी टैक्सी ने धोखा दे दिया है। टैक्सी से लगातार तेल लीक कर रहा है। इससे आगे का सफर संभव नहीं है। इस बीच हमारे ड्राईवर ने उदयपुर से दूसरी टैक्सी मंगाई है। तो हमें थोड़ी देर और यहां इंतजार करना पड़ा। इस बीच चाय समोसा और राजस्थान के ऊंटों से थोड़ी बातचीत में वक्त गुजरा। यहां दिल्ली के रोहिणी का कौशिक परिवार आया हुआ है। उनसे थोड़ी गपशप हुई। दूसरी टैक्सी आने पर रात 8 बजे हमलोग अपने होटल पहुंच सके। पेट पूजा करने के बाद एक बार फिर जगदीश मंदिर जा पहुंचे और एक बार फिर थोड़ी देर डांडिया का आनंद लिया।


अगले दिन सुबह... अब उदयपुर से चला चली की वेला है। हमने उदयपुर से माउंट आबू जाने वाली बस में ऑनलाइन टिकट बुक कर लिया है। सुबह बस स्टैंड के लिए आटो लिया। पर आटो वाले ने हमें चेतक सर्किल पर लाकर रोक दिया। कहा, यहीं से आबू की बस मिल जाएगी। पर हमने कहा नहीं हमें तो तुम मुख्य बस स्टैंड पर छोड दो। यह दिल्ली गेट के पास है। ये अच्छा भी रहा। मुख्य बस स्टैंड में हमारी बस लगी थी। हम माउंट आबू जाने वाली बस में अपनी आरक्षित सीट पर जा बैठे। बस चलकर चेतक सर्किल स्टाप पर रूकी। तब तक सारी सीटें भर चुकी थीं, पर यहां एक परिवार आया जिसके पास 9 टिकटें रिजर्वेशन वाली थी। अब कंडक्टर महोदय को उनके लिए नौ सीटें खाली करने के लिए बाद में चढ़े नौ लोगों को उतारना पड़ा जो सीटों पर कब्जा कर चुके थे। थोड़ी हुज्जत हुई फिर बस आगे बढ़ सकी। बस उदयपुर शहर को छोड़कर आगे बढ़ चली है। फोर लेन सड़क शानदार बनी हुई है। 

रास्ते में बस पहाड़ों को काटकर बनाई गई एक सुरंग जिसका नाम खोखर टनेल उसे को पार करती है। हमारे साथ बस में एक परिवार है जो बंगाल से राजस्थान घूमने आया है। हमारा परिचय मनोज मौर्य से होता है वे इपीएफओ में कार्यरत हैं। आरा के रहने वाले हैं पर दुर्गापुर बंगाल में रहते हैं इन दिनों।
उदयपुर से आबू रोड जाने के लिए सड़क मार्ग ही बेहतर है। रेल का रास्ता काफी लंबा पड़ता है। अक्सर उदयपुर आने वाले सैलानी माउंट आबू भी जाते हैं। उदयपुर से आबू रोड की दूरी 150 किलोमीटर है। हमारी बस गोगुंदा पार करने के बाद पिंडवाड़ा में थोड़ी देर रुकी। यहां पर हमने केले खरीदकर खाए। 

पिंडवाड़ा सिरोही जिले की तहसील है। यहां से आबू रोड की दूरी 50 किलोमीटर है। आबू रोड बस स्टैंड जाकर बस 20 मिनट रूकी रही। इसके बाद माउंट आबू की चढाई शुरू हो गई। माउंट आबू मतलब राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन। आबू रोड रेलवे स्टेशन से होकर कई बार गुजरना हुआ है पर हमलोग माउंट आबू पहली बार जा रहे हैं। राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू आरावली पर्वत माला में 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सर्दियों में कई बार यहां तापमान शून्य भी हो जाता है। हालांकि बर्फ नहीं गिरती। पर गर्मियों में भी यहां मौसम सुहाना रहता है। अच्छे मौसम के कारण इस इलाके में कई पब्लिक स्कूल खुले हुए हैं।

माउंट आबू में राजस्थान के अलावा सालों भर गुजराती सैलानियों की आवाजाही रहती है। क्योंकि गुजरात सीमा से यह 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां कई प्रसिद्ध जैन मंदिर हैं इसलिए यह धार्मिक पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है।  इस इलाके की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर 1722 मीटर ऊंची है।
तो लिजिए हमारी बस पहाड़ों पर चक्कर काटती हुई माउंट आबू की सीमा में पहुंच चुकी है। दोपहर में भी हमें सुहाने मौसम का एहसास हो रहा है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य Email - vidyutp@gmail.com
(UDAIPUR, MOUNT ABU, SIROHI, RAJSTHAN ROADWAYS ) 

No comments:

Post a Comment