Thursday, February 14, 2019

अंबाजी मंदिर, गुजरात – बोल मेरी अंबे जय जय अंबे

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गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित मां अंबा भवानी का मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से प्रमुख पीठ माना जाता है। अंबा माता के दर्शन के लिए सालों भर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर का परिसर काफी विशाल और भव्य है। इसका गुंबद स्वर्ण जड़ित है।नवरात्र के मौके पर यहां का पूरा वातावरण शक्तिमय रहता है। 


मां अंबा का यह मंदिर बेहद प्राचीन है। पर यहां मंदिर के गर्भगृह में कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। यहां मूर्ति की जगह मां का एक श्री यंत्र स्थापित है। इस श्री यंत्र को कुछ इस प्रकार सजाया जाता है कि देखने वाले को लगता है कि मां अम्बे यहां विराजमान हैं। पवित्र श्रीयंत्र की पूजा मुख्य आराध्य रूप में की जाती है। इस यंत्र को कोई भी सीधे आंखों से देख नहीं सकता। साथ ही इसकी फोटोग्राफी का भी निषेध है।

जहां देवी अम्बाजी का मंदिर हैकहा जाता है कि वहां देवी सती के हृदय का एक हिस्सा गिरा था। कुछ लोग कहते हैं कि उदर गिरा था। इसके समीप ही पवित्र अखण्ड ज्योति जलती हैजिसके बारे में कहते हैं कि यह ज्योति कभी नहीं बुझी। वर्तमान यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना बताया जाता है। पर इसका जीर्णोद्धार 1975 में हुआ था।  श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर बेहद भव्य है। मंदिर का शिखर एक सौ तीन फीट ऊंचा है। शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित किए गए हैं।
समान्य दिनों में मंदिर में दर्शन में तीन घंटे का वक्त लग जाता है। यह गुजरात का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। न सिर्फ गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान बल्कि देश के कोने कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद का काउंटर है। परिसर में विशाल यज्ञशाला भी बनी है।

पदयात्रा करते हुए आते हैं लोग
मंदिर में काफी श्रद्धालु विशाल झंडा लिए हुए तो कई बार पदयात्रा करते हुए दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कुछ लोग सिर के बल चलते हुए भी माता के दरबार में पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में पूजन सामग्री की दर्जनों दुकाने हैं। श्रद्धालु की सुविधा के लिए मोबाइल और बैग जमा करने के काउंटर बने हुए हैं।
बोल मेरी अंबे..जय जय अंबे
नवरात्र और दीवाली के बाद तो मंदिर में श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ उमड़ती है कि कई बार यहां मंदिर के बाहर दो किलोमीटर लंबी लाइन लग जाती है। श्रद्धालु बोल मेरी अंबे..जय जय अंबे का जयकारा लगाते हुए घंटों पंक्ति में दर्शन के लिए इंतजार करते हैं। मंदिर की व्यवस्था अरासुरी अंबाजी माता देवस्थानाम ट्रस्ट देखता है। अंबाजी के दर्शन के लिए बड़े बड़े उद्योगपति और राजनेता भी अक्सर पहुंचते हैं। हर माह के पूर्णिमा के दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

कैसे पहुंचे - अंबाजी मंदिर गुजरात में राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। यह गुजरात के बनासकांठा जिले में पड़ता है। आप यहां राजस्थान या गुजरात जिस भी रास्ते से चाहें पहुंच सकते हैं। यहां से सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन राजस्थान का  आबू रोड पड़ता है। अंबाजी आबू रोड से 22 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। आबू रोड रेलवे स्टेशन से अंबाजी के लिए हमेशा शेयरिंग जीप की सेवा उपलब्ध है। अंबाजी का मंदिर अहमदाबाद से 180 किलोमीटर दूर है।

अंबाजी मंदिर - दर्शन का समय
सुबह की आरती 7.30 से 8.00
सुबह दर्शन 8.00 से 11.30
राजभोग आरती 12.00 से 12.30
दोपहर दर्शन 12.30 से 4.30
शाम की आरती 7.00 से 7.30
शाम का दर्शन 7.30 से 9.00

मां अंबे के दर्शन में हमें भी दो घंटे से ज्यादा वक्त लग गए। मंदिर की लाइन में काफी भीड़ का सामना करना पड़ा। कैमरा, मोबाइल आदि दर्शन के लिए जाने से पहले लॉकर में जमा करा देना पड़ता है। दर्शन से निकलने के बाद मंदिर के काउंटर से प्रसाद खरीदा। इसके बाद आगे के सफर के लिए निकल पड़े।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( AMBA JEE TEMPLE, BANASKANTHA, GUJRAT ) 

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