Tuesday, February 12, 2019

माउंट आबू से अंबा जी मार्फत गुजरात ट्रैवल्स

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माउंट आबू की दूसरी सुबह मैं सूर्योदय होने से पहले बिस्तर छोड़कर टहलने निकल पड़ा हूं। अकेले ही। टहलते हुए दो किलोमीटर आगे निकल गया हूं। लोअर कोदरा डैम के पास सेंट मेरीज स्कूल तक जाने के बाद वापस लौट आया। इसी दौरान प्रातः अरुण धीरे-धीरे लालिमा बिखेरने लगे हैं। खजूर के पेड़ो के बीच से उनकी लालिमा हमारे पथ को आलोकित करने लगी है। सूरज तो वही है पर इतनी खूबसूरत सुबह हम महानगर में कहां देख पाते हैं। टहलने के बाद वापस होटल लौट आया। स्नान करके तैयार हो गया। अनादि और माधवी नास्ते में पराठे के लिए आर्डर दे चुके थे। विशाल पराठा उदरस्थ करने के बाद हमलोग अगले सफर के लिए तैयार हो गए।

माउंट आबू से आबू रोड की दूरी 35 किलोमीटर है। आबू रोड से गुजरात के अंबाजी की दूरी 22 किलोमीटर है। तो हमें जाना है अब अंबा जी। दो तरीके हैं किसी भी बस से आबू रोड तक जाएं वहां से बस या शेयरिंग टैक्सी से अंबा जी। पर हमने सुविधा के लिए गुजरात ट्रैवल्स की एसी बस बुक कर ली है। इसमें तीन स्लिपर सीटें आरक्षित हैं। बस सुबह 9.30 के आसपास होटल के सामने से गुजरेगी। हमलोग सड़क पर बस का इंतजार कर रहे हैं। वहां एक 15 साल का बच्चा कुरसी लगाकर बैठा है। वह निजी टैक्सी से माउंट आबू पहुंचने वाले लोगों को गाइड की सेवा उपलब्ध कराता है। सैलानियों को होटल भी दिला देता है। वह आने वाली हर टैक्सी को आवाज लगा रहा है होटल गाइड...होटल गाइड। मतलब कमाने के लिए बहुत पढ़ा लिखा होना जरूरी नहीं। बस दिमाग चाहिए।

खैर हमारी बस आ गई। हम अपनी स्लिपर सीटों पर जाकर सो गए। पर थोड़ी देर मे यह खुशी काफूर हो गई। माउंट आबू से आबू से उतरने के क्रम में इस एसी स्लिपर बस में माधवी और अनादि की तबीयत बिगड़ने लगी। वे चक्कर आने के बाद उल्टियां करने लगे। हालांकि मैंने सुबह 7 बजे ही नास्ता किया था अन्नपूर्णा के स्टाल पर इसलिए मुझे उल्टियां नहीं हुई।हमने दो गलतियां की थी। तुरंत नास्ता करके सफर और पहाड़ों पर एसी बस। वही ऊटी से मैसूर वाली गलती। फिर कान पकड़ा आगे से ऐसा नहीं करेंगे।

बस आबू रोड बाइपास में थोड़ी देर रुकने के बाद अब गुजरात सीमा की ओर चल पड़ी है। ये बस माउंट आबू से बड़ौदा जाने वाली है। अब रास्ता पहाड़ी नहीं है। इसलिए माधवी-अनादि थोडा आराम महसूस कर रहे हैं। अबां जी से 7 किलोमीटर पहले छापरी में चेक पोस्ट आया। इसके बाद गुजरात का बनासकांठा जिला शुरू हो गया। एक बोर्ड पर गुजराती में लिखा है - गुजरात मां आपनू स्वागत छे...

थोड़ी देर बाद लगभग 12 बजे बस ने हमें अंबाजी मंदिर से थोड़ा पहले उतार दिया। इस शहर का नाम ही अंबाजी है। देश कुछ शहरों के नाम वहां के प्रमुख मंदिरों के नाम पर ही पड़ गए हैं। सड़क के किनारे एक नींबू पानी के स्टाल पर माधवी और वंश ने शिंकजी पीकर राहत महसूस की। मंदिर दर्शन जाने से पहले हमने अपना सारा बैगेज इसी शिंकजी वाले के स्टाल पर छोड़ दिया और मंदिर के प्रवेश द्वार की तरफ बढ़ चले। अंबाजी के मंदिर में दर्शन के लिए काफी भीड़ होती है। लोगों ने बताया दो घंटे से ज्यादा वक्त लगेगा।  
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
 ( MOUNT ABU TO AMBAJEE, GUJRAT TRAVELS ) 



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