Wednesday, January 9, 2019

जल संरक्षण का अदभुत नमूना- सज्जनगढ़ पैलेस (मानसून पैलेस)

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करणी माता मंदिर से वापसी के बाद हम आटो में सवार होकर चल पड़े हैं सज्जनगढ़ पैलेस की ओर। यह पैलेस शहर के बाहर है पर शहर के हर इलाके से दिखाई देता है। सज्जन गढ़ पैलेस की तलहटी में आटो वाले ने पार्किंग में रोक दिया।
यहां हमने टिकट काउंटर से सज्जनगढ़ का टिकट प्राप्त किया। टिकट अलावा आपको मुख्यद्वार से ऊपर किले तक जाने के लिए जीप का टिकट भी लेना पड़ता है। एक व्यक्ति का जीप का किराया 70 रुपये है। अगर निजी वाहन है तो उसके लिए प्रवेश टिकट लेना पड़ता है। पर टिकट लेने के बाद यहां इंतजार करना पड़ता है क्योंकि जीप वाले भरेगी तो चलेगी के सिद्धांत पर पैलेस के लिए रवाना होते हैं।


सनसेट प्वाइंट से डूबते सूरज का नजारा - बड़ी संख्या में लोग सज्जनगढ़ पैलेस शाम का नजारा करने जाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप शाम को पांच बजे से पहले ही सज्जन गढ़ पहुंच जाएं। हमलोग जब शाम को सज्जनगढ़ में पहुंचे हैं तो मौसम सुहाना है और बड़ी संख्या में लोग यहां पर शाम देखने के लिए पहुंच चुके हैं। किले पृष्ठ भाग से घाटी में पहाड़ी के पीछे धीरे धीरे सूरज को छिपते हुए देखना भला लगता है।
सज्जनगढ़ पैलेस में मानसून में होने वाली बारिश के पानी को संरक्षित करने के उम्दा उपाय किए गए हैं। इसलिए इसका नाम मानसून पैलेस के रूप में भी लोकप्रिय हो गया।

अब थोडी बात सज्जनगढ़ किले के बारे में । यह किला समुद्र तल से 960 मीटर की ऊंचाई पर बना है। इस भवन के निर्माण के समय ही शिल्पियों ने वर्षा जल संचय के बारे में योजना बना ली थी। किले के हर मंजिल पर खुले हुए भाग मे बारिश के जल को इसी तल पर टंकियों में संग्रहित करने का इंतजाम किया गया है।
किले की दीवारों में निर्मित पाइपलाइन से इस जल को नीचे की मंजिल पर लाकर टंकियों में संग्रहित किया जाता था।

इस भवन में कुल 1.95 लाख लीटर पानी हर साल संग्रहित करने का इंतजाम किया गया था। सज्जनगढ़ पैलेस का निर्माण 19 वीं सदी में 1884 में हुआ था। तब से लेकर अब तक जल संग्रह की व्यवस्था बिना बाधा के चल रही है। यह बांसड़ारा पर्वत की चोटी पर बनाया गए इस महल का नाम इसलिए मानसून पैलेस भी है। इसका निर्माण मेवाड़ के राज परिवार ने शिकार लॉज के रूप में इस्तेमाल करने के लिए किया था। इसके  निर्माता महाराणा सज्जन सिंह थे। उनकी योजना मूल रूप से इसे एक खगोलीय केंद्र बनाने की थी। महाराणा सज्जन सिंह के समय से पहले मौत के साथ ही यह योजना रद्द भी रद्द हो गई। पर बाद में इसकी ख्याति किसी और रुप में प्रसिद्ध हो गई।

आप सज्जनगढ़ पैलेस पहुंचे हैं तो यहां पर आपके खाने पीने के लिए एक शाही रेस्टोरेंट भी है। अगर खाना नहीं हो तो उसके लॉन में बैठकर कॉफी की चुस्की ले सकते हैं। और इसके साथ ही हरे भरे पार्क और दूर तक नजर आती घाटियों के आनंद ले सकते हैं। किले के प्राचीर से उदयपुर शहर का भी बड़ा सुंदर नजारा दिखाई देता है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(SAJJANGARH PALACE, UDAIPUR, RAIN WATER  ) 


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