Monday, January 7, 2019

उदयपुर में रोप वे से करणी माता का मंदिर तक

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सिटी पैलेस घूमने के बाद भूख लग गई है। रास्ते में रुककर हल्की से पेटपूजा करके हमलोग चल पड़े हैं अगली मंजिल की ओर। दूध तलाई उदयपुर शहर का दूसरा प्रमुख ताल है। यह आकार में छोटा है। इसी दूध तलाई के पास से करणी माता मंदिर जाने के लिए चेयरलिफ्ट का इंतजाम है। चेयरलिफ्ट स्टेशन के पास चाय नास्ते और गिफ्ट शॉप की दुकाने हैं। चेयरलिफ्ट का किराया 110 रुपये प्रति व्यक्ति है।
 टिकट खरीदने के बाद अपनी बारी के लिए कोई आधे घंटे इंतजार करना था। तो इस बीच यहां की कैंटीन में एक बार फिर कुछ खाने की इच्छा हुई। छोला भठूरा। एक छोला भठूरा 90 रुपये का है। थोडा महंगा है, पर आर्डर कर दिया। पर भठूरे का आकार देखकर दिल खुश हो गया। खाने के बाद हमारा नंबर आ गया। रोप वे पर दो चेयर लिफ्ट है। एक ही मार्ग पर वे आते और जाते हैं। कुल सफर लगभग छह मिनट का है। बंद चेयरलिफ्ट में छह लोगों के बैठने का इंतजाम है। चेयर लिफ्ट की खिड़की से दूध तलाई झील और उदयपुर शहर का अच्छा नजारा दिखाई देता है।



करणी माता मंदिर उदयपुर शहर का प्रसिद्ध मंदिर है। दूध तलाई से करणी माता मंदिर जाने के दो तरीके हैं। पहला चेयर लिफ्ट से तो दूसरा ट्रैकिंग करते हुए पैदल पहुंचना। काफी श्रद्धालु पैदल भी करणी माता के मंदिर तक पहुंचते हैं। करणी माता के लिए रोपवे की शुरुआत 2008 में की गई थी।

राजस्थान में करणी माता के कई मंदिर हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध मंदिर बीकानेर के पास है। उदयपुर का करणी माता मंदिर मचला मगरा नामक पहाड़ी पर स्थित है।
इसका नाम श्री मंशापूरण करणी माता मंदिर है। मंदिर में करणी माता की पत्थर की मूर्ति स्थापित की गई है। इस प्रचीन मंदिर का साल 2017-18 में जीर्णोद्धार किया गया है।

करणी माता दरअसल राजस्थान की लोकदेवी हैं। कहा जाता है कि इनकी पूजा से मन की इच्छाएं पूर्ण होती हैं। राजस्थानी में करणी माता भजन गाए जाते हैं। इन पर लोकगीत लिखे गए हैं। करणी माता का जन्म जोधपुर के पास सुवाक ग्राम में विक्रम संवत 1444 में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में कई चमत्कार किए उसके बाद वे देवी के रूप में पूजी जाने लगीं। राजस्थान लोग उन्हें अत्यंत करुणामयी देवी के रूप में जानते हैं।

करणी माता को चूहों के देवी के रूप में भी जाना जाता है। माता के मंदिर में बड़ी संख्या में सफेद चूहे पाले गए हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु उन चूहों का दर्शन करते हैं। लोग इन चूहों को कई तरह के खाद्य पदार्थ भी परोसते हैं। मंदिर परिसर में एक शिव मंदिर का भी निर्माण कराया गया है। करणी माता मंदिर के परिसर से उदयपुर शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है।

करणी माता के मंदिर के परिसर के पास ही एक पीर की मजार भी है। काफी श्रद्धालु वहां भी जाते हैं। मंदिर के पास भी वापसी की चेयरलिफ्ट के पास एक कैंटीन है। यहां पर आइसक्रीम और खाने पीने की वस्तुएं मिलती हैं। यहां दिन भर चहल पहल रहती है।
उदयपुर शहर में करणी माता के अलावा नीमच माता का मंदिर भी एक पहाड़ी पर है। पर वहां जाने के लिए आपको 500 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। वहां अभी कोई चेयरलिफ्ट नहीं है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
-         ( KARNI MATA TEMPLE, UDAIPUR ) 

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