Monday, January 28, 2019

करोड़ो वैष्णव भक्तों की आस्था के प्रतीक श्रीनाथ जी

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नाथद्वारा के मनमोहक बाजार से गुजरते हुए हमलोग श्रीनाथजी के मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंच गए हैं। राजस्थान का लोकप्रिय तीर्थ स्थल श्रीनाथद्वारा पुष्टिमार्गीय वैष्‍णव सम्‍प्रदाय की प्रधान (प्रमुख) पीठ है। यहां नंद नंदन श्री कृष्ण यानी श्रीनाथजी का भव्‍य मन्‍दिर है जो देश विदेश के करोडों वैष्‍णवों की आस्‍था का प्रमुख स्‍थल है। सालों भर देश के कोने कोने और विदेशों से श्रद्धालु नाथद्वारा पहुंचते हैं। नाथद्वारा आचार्य महाप्रभु की देश में कुल 84 बैठकों में से सबसे प्रमुख बैठक है। इसलिए श्रद्धालु में यह बड़ी आस्था का केंद्र है। 


यहां बाल रूप में विराजते हैं कान्हा -  श्रीनाथ जी भगवान श्रीकृष्ण के सात वर्ष की अवस्था के रुप हैं। यानी यहां कान्हा बाल रुप में विराजते हैं। श्रीनाथ जी का श्रंगार सालों भर अलग अलग मौसम के अनुसार किया जाता है।

यह मंदिर 17वीं शताब्दी में बनाया गया था। भगवान की मूर्ति काले मार्बल से काट कर बनाई गई थी। श्रीनाथ जी के मंदिर के देश प्रमुख धनी मंदिरों में गिना जाता है। श्रीनाथ जी की मूर्ति यहां मथुरा के पास गोवर्धन से लाई गई थी। कहा जाता है कि औरगंजेब मथुरा के आसपास के मंदिरों पर हमले करवा रहा था, तब 1665 में श्रीनाथ जी  को नाथद्वारा लाया गया। मेवाड़ के महाराजा महाराणा राज सिंह ने श्रीनाथ जी की मूर्ति को यहां स्थापित कराया। बनास नदी के किनारे 1672 में निर्मित मंदिर में मूर्ति की स्थापना की गई। तब से श्रीनाथ जी का यहां निवास करते हैं।


श्रीनाथ जी के मंदिर में दर्शन का समय सीमित है। पूरे 24 घंटे में मंदिर महज साढ़े तीन घंटे के लिए अलग अलग समय पर खुलता है। इसलिए आप समय के अनुरूप यहां दर्शन के लिए पहुंचे।

मंदिर में दर्शन का समय
मंगल दर्शन – 5.30 से 6.30
श्रंगार दर्शन – 7.15 से 7.45
राजभोग – 11.15 से 12.05
उत्थापन – 3.45 से 4.00
आरती – 5.15 से 6.00

मंदिर में प्रवेश से पहले आपको कैमरा, मोबाइल आदि को काउंटर पर जमा कर देना पड़ता है। परिसर के अंदर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। आप श्रीनाथ जी के मंदिर की परिक्रमा भी कर सकते हैं। मंदिर की गौशाला और आसपास के अन्य मंदिर भी देख सकते हैं।

मंदिर का भोग प्रसाद - नाथद्वारा मंदिर के भोग प्रसाद में 15 से ज्यादा व्यंजनो वाला देसी प्लेट तैयार किया जाता है। टोकरी नुमा प्लेट में मिट्टी की कोटरी में रबड़ी दही, खीर, पुड़ी, सब्जियां और कई व्यंजन। देशी का घी का बना हुआ मंदिर का प्रसाद। पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तरह ही श्रीनाथ जी के मंदिर में भी विशाल रसोई घर संचालित होता है। यहां आने वाले श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से मंदिर का प्रसाद ग्रहण करते हैं। आप अलग से रबड़ी की प्लेटें भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा नाथद्वारा में मंदिर मार्ग पर तीन दुकाने अधिकृत हैं जहां से मंदिर का प्रसाद पैसा देकर खरीदा जा सकता है।  

श्रीनाथ जी मंदिर के प्रवेश द्वार पर हमारी मुलाकात उदयलाल प्यारे लाल जी (मो. 97847-85548 ) से हुई। वे मंदिर के ढाई हजार पंडों में से एक हैं। वे आवाज लगा रहे थे कि मंदिर के भोग लगाया हुआ प्रसाद किसी चाहिए तो मैं लाकर दूंगा। हमने उन्हें एक प्लेट प्रसाद के लिए 50 रुपये सेवा शुल्क के तौर पर दिया। वे अंदर गए वापस आए तो विशाल प्लेट लेकर आए।

एक जगह टेबल जगह बनाकर हमलोग प्रसाद जीमने लग गए। जय श्रीनाथ जी। प्रसाद छककर तृप्त हुए तो पंडित जी से फिर मुलाकात हो गई। तो उनके साथ एक सेल्फी हो जाए। मंदिर के पंडा उदय लाल बताते हैं कि मंदिर की ओर से उन्हें प्रसाद बिना शुल्क के मिलता है। जितना भक्तों से मिल जाए वह उनकी आय होती है।

पुष्टिमार्ग के संस्थापक श्रीमद् वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत ब्रह्मवाद के व्याख्या और पुष्टिमार्ग के संस्थापक श्रीमद् वल्लभाचार्य जी का जन्म  वैशाख कृष्ण एकादशी विक्रम संवत 1535 (ईस्वी सन 1478) में हुआ। उनके पिता लक्ष्मण भट्ट और माता इल्लम्मागारू थे। उनका मूल ग्राम आंध्र प्रदेश के खम्मण के निकट कांकडवाड़ था। ये तैलंग ब्राह्मण थे और कृष्ण यजुर्वेद की तैतरीय शाखा के अन्तर्गत भारद्वाज गोत्र के थे।


पूरे देश में महाप्रभु वल्लभाचार्य की कुल 84 बैठकें हैं। इनमें सबसे ज्यादा बैठकें उत्तर प्रदेश के मथुरा वृंदावन के आसपास हैं। उनकी बैठकें गुजरात और बिहार में भी हैं। बिहार में हाजीपुर शहर के हेलाबाजार में उनकी एक बैठक है। 
नाथद्वारा की गलियों में घूमते हुए अगर आप शाकाहारी हैं तो जम कर खाए पीएं। रबड़ी, पूड़ी सब्जी, लस्सी, आईसक्रीम और भी बहुत कुछ मिलता है यहां। फिलहाल तो रबड़ी पर ही हाथ साफ किया जाए। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
(SRINATHJI TEMPLE NATHDWARA, RAJSTHAN, VAISHNAVA MAT)


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