Saturday, January 26, 2019

मेवाड़ के महाराणाओं के अराध्य – श्री एकलिंगी महाप्रभु


श्री एकलिंगी प्रभु का मंदिर उदयपुर शहर से 23 किलोमीटर आगे नाथद्वारा के मार्ग पर स्थित है। यह मेवाड़ के राजाओं के अराध्य देव महादेव शिव का विलक्षण मंदिर है। वैसे इस स्थान का नाम 'कैलाशपुरी' है परन्तु यहां एकलिंग का भव्य मंदिर होने के कारण इसको एकलिंग जी के नाम से ही विख्यात हो गया है।

एकलिंगी महाप्रभु का मंदिर हिंदू भगवान शिव को समर्पित है। यह माना जाता है कि आचार्य विश्वस्वरूपा बप्पा रावल ने इसे 734 ई. में बनवाया था। पर बाद में इस मंदिर का जीर्णोद्धार महाराणा मोकल और महाराणा रायमल ने करवाया। मंदिर के परिसर में ही महाराणा कुंभा द्वारा बनवाया गया विष्णु मंदिर भी देखा जा सकता है।


मेवाड़ के महाराणाओं के अराध्य -  भगवान शंकर एकलिंग महादेव रूप में मेवाड़ राज्य के महाराणाओं और अन्य राजपूतों के प्रमुख आराध्य देव रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां राजा तो भगवान शिव के प्रतिनिधि मात्र रूप में ही शासन किया करते हैं। इसी कारण उदयपुर के महाराणा को दीवाण जी भी कहा जाता है। मेवाड़ राजघराने के राजा किसी भी युद्ध पर जाने से पहले एकलिंग जी की पूजा अर्चना कर उनसे आशीष अवश्य लिया करते थे। यहां मन्दिर परिसर के बाहर मन्दिर न्यास द्वारा स्थापित एक लेख के अनुसार डूंगरपुर राज्य की ओर से मूल बाणलिंग के इंद्रसागर में प्रवाहित किए जाने पर वर्तमान चतुर्मुखी लिंग की स्थापना की गई थी।


इतिहास की घटनाएं हमें बताती हैं कि एकलिंग जी को ही को साक्षी मानकर मेवाड़ के राणाओं ने कई बार यहां ऐतिहासिक महत्व के प्रण लिए थे। एकलिंग का यह भव्य मंदिर चारों ओर ऊंचे परकोटे से घिरा हुआ है। इस परिसर में कुल 108 मंदिर बने हैं। मुख्य मंदिर में एकलिंग (शिव) की चार सिरों वाली 50 फीट की मूर्त्ति स्थापित की गई है। चार चेहरों के साथ महादेव चौमुखी या भगवान शिव की प्रतिमा के चारों दिशाओं में देखती रहती है।

इन्हें विष्णु (उत्तर), सूर्य (पूर्व), रुद्र (दक्षिण), और ब्रह्मा (पश्चिम) का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर में शिव के वाहन, नंदी बैल, की एक पीतल की प्रतिमा मुख्य द्वार पर स्थापित है। मंदिर में परिवार के साथ भगवान शिव की मूर्ति अत्यंत सुंदर है। देवी पार्वती और भगवान गणेश, क्रमशः शिव की पत्नी और बेटे, की मूर्तियां मंदिर के अंदर स्थापित की गई हैं। यमुना और सरस्वती की मूर्तियां भी मंदिर में देखी जा सकती हैं। इन छवियों के बीच में, यहां एक शिवलिंग चांदी के सांप से घिरा हुआ है। मंदिर के चांदी दरवाजों पर भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की छवियां भी हैं। नृत्य करती नारियों की मूर्तियों को भी यहां देखी जा सकती है। गणेशजी मंदिर, अंबा माता मंदिर, नाथों का मंदिर, और कालिका मंदिर इस मंदिर के पास स्थित हैं।

कैसे पहुचे - एकलिंगजी मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर उदयपुर के उत्तर में 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां आप नाथद्वारा जाते हुए पहुंच सकते हैं। मंदिर में भीड़ रहती है इसलिए यहां मंदिर में दर्शन के लिए कम से कम दो घंटों का समय जरूर रखें।

मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौंबद है। अंतर के हिस्सों में फोटोग्राफी और मोबाइल फोन लेकर जाना प्रतिबंधित है। मंदिर के प्रवेश द्वार मोबाइल कैमरे जमा कराने के लिए लॉकर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मंदिर के आसपास अच्छा खासा बाजार और पूजन सामग्री की दुकाने हैं। मंदिर पास ठहरने के लिए अतिथिशालाएं भी बनी हुई हैं। मंदिर का प्रबंधन उदयपुर का राजपरिवार देखता है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य
 E-mail : vidyutp@gmail.com
(EKLINGI TEMPLE , UDAIPUR , SHIVA , MEWAR RULARS )
       



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