Thursday, January 24, 2019

ग्यारहवीं सदी कलात्मकता में खो जाएं -उदयपुर का सासबहु मंदिर

उदयपुर में तीसरे दिन हम एक बार फिर टैक्सी बुक करके सासबहु मंदिर, एकलिंगी मंदिर, नाथद्वारा और हल्दीघाटी दर्शन के लिए निकल पड़े हैं। आज हमारे ड्राईवर बदल चुके हैं। नए टैक्सी ड्राईवर का नाम जगदीश है। वे धीमी गति से सलीके से गाड़ी चला रहे हैं। शहर से बाहर निकलते ही सबसे पहले हम पहुंचे है सास बहु का मंदिर देखने। यह उदयपुर शहर के बाहरी छोर पर अत्यंत कलात्मक और ऐतिहासिक मंदिर है।

उदयपुर से एकलिंगी मंदिर जाने के रास्ते पर नागदा में स्थित है सास बहु का मंदिर। वैसे इसका असली नाम सहस्त्रबाहु मंदिर है। ग्यारहवीं सदी के आरंभ में बना ये मंदिर विकसित शैली और प्रचूर अलंकरण के लिए जाना जाता है। मंदिर का परिसर 32 मीटर लंबा और 22 मीटर चौड़ा है।

मंदिर का निर्माण कछवाहा वंश के शासक महिपाल ने करवाया था। वह भगवान विष्णु का भक्त था। कहा जाता है कि उसने ये मंदिर अपनी पत्नी और बहु के लिए बनवाया। इसलिए इसका नाम तभी से सास बहू का मंदिर है। मंदिर ऊंचे जगत पर बना हुआ है। इसमें प्रवेश के लिए पूर्व में मकरतोरण द्वार है। 

मंदिर पंचायतन शैली में बनाया गया है। मुख्य मंदिर के चारों तरफ देवताओं का कुल बसता है। हर मंदिर में पंचरथ गर्भ गृह, खूबसूरत रंग मंडप बने हैं। सास बहु यानी सहस्त्र बाहु मंदिर मूल रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है। हजार हाथों वाले देवता वही तो हैं। परिसर में दूसरा प्रमुख मंदिर शिव का है।

इन मंदिरों में ब्रह्मा, विष्णु, शिव, राम, कृष्ण, बलराम सभी विराजते हैं। प्रवेश द्वार पर मां सरस्वती की मूर्ति है। यह राजस्थान के अत्यंत प्राचीन मंदिरों में से एक है। मंदिर की दीवारों पर अंदर और बाहर खजुराहो के मंदिरों की तरह असंख्य मूर्तियां बनी हैं। इन मूर्तियों में कई कामशास्त्र से जुडी हुई भी हैं। कला प्रेमी इस मंदिर को घंटों निहारते हैं। मंदिर में हमारे साथ विदेशी सैलानियों का एक दल आया हुआ है। उनके साथ चल रहे गाइड महोदय अपने सैलानियों को कुछ मूर्तियां दिखाकर कहते हैं ..इन्हें घर में आजमाना खतरनाक हो सकता है। और सैलानियों का दल ठहाके लगाने लगता है। 



 कई बार हमले हुए -  सास बहु मंदिर ने कई हमले झेले हैं। मंदिर का काफी हिस्सा हमले की भेंट चढ़ चुका है। फिर भी जितना हिस्सा बचा है वह भी दर्शनीय है। 1226 में इल्तुतमिश के हमले के दौरान पहली बार नागदा शहर और सहस्त्रबाहु मंदिर काफी तबाह हुआ।



खुलने का समय - मंदिर के चारों तरफ खेत हैं। आसपास में कोई दुकान बाजार नहीं है। यहां सूर्योदय से सूर्यास्त तक दर्शन के लिए पहुंचा जा सकता है। कोई पूजा पाठ इस मंदिर में नहीं होता। पर भारतीय पुरातत्व विभाग का स्टाफ यहां तैनात रहता है। मंदिर की कलात्मकता को निहारने के लिए हर रोज विदेशी सैलानी भी पहुंचते हैं।

नागदा कभी मेवाड़ का महत्वपूर्ण शहर हुआ करता था। कुछ समय यह मेवाड़ के शासकों की राजधानी भी रहा। यहां पर एक अति प्राचीन जैन मंदिर भी है।


बाघेला लेक  - सास बहु मंदिर से पहले एक सुंदर झील पड़ती है जिसका नाम बाघेला लेक है। महाराणा मोकल ने अपने भाई बाघ सिंह के नाम पर बाघेला झील का निर्माण कराया था।

कैसे पहुंचे – उदयपुर शहर से सास बहु मंदिर की दूरी 20 किलोमीटर है। यहां निजी वाहन से ही आना श्रेयस्कर है। उदयपुर से नाथद्वारा के मार्ग पर एकलिंगी मंदिर से तीन किलोमीटर पहले यह मंदिर स्थित है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
 (SAS BAHU TEMPLE, NAGDA, UDAIPUR) 


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