Sunday, January 20, 2019

महाराणा कुंभा के अराध्य – नीलकंठ महादेव का मंदिर

राजस्थान के विशाल कुंभलगढ़ किले में कई ऐतिहासिक मंदिर हैं, इनमें महादेव शिव का भी अत्यंत सुंदर मंदिर है। यह मंदिर अपने विशाल शिवलिंगम और नक्काशीदार बरामदे के लिए जाना जाता है। मंदिर का निर्माण पंद्रहवी सदी में कुंभलगढ़ किले के निर्माण के साथ ही हुआ। सन 1457 में महाराणा कुंभा ने इस मंदिर का निर्माण कराया था।


हनुमान पोल से अंदर प्रवेश करने के बाद दाहिनी तरफ नीलकंठ महादेव का सुंदर मंदिर है। इस मंदिर का काले पत्थर का विशाल शिव लिंगम स्थापित है। किसी में मंदिर में स्थापित शिवलिंगम में यह देश के विशालतम लिंगम में गिना जाता है। 

नीलकंठ मंदिर के शिवलिंगम की ऊंचाई छह फीट है। मंदिर के गर्भ गृह की कलात्मकता भी अदभुत है।

नीलकंठ महादेव महाराणा कुंभा के अराध्य देव हैं। वे नियमित इस मंदिर में पूजा किया करते थे। यह राजस्थान के अत्यंत सुंदर शिवमंदिरों में से एक है।

नीलकंठ महादेव  का बना मन्दिर अपने ऊंचे-ऊंचे सुन्दर स्तम्भों वाले बरामदे के लिए भी जाना जाता है। इस तरह के बरामदे वाले मन्दिर प्रायः बहुत कम देखने को मिलते हैं। इस मंदिर के भवन में कुल 36 कलात्मक स्तंभों को निर्माण कराया गया है। मंदिर की संरचना दो मंजिलों वाली है। कहा जाता है कि महाराणा कुंभा स्वंत वास्तु शास्त्र के बड़े जानकार थे। उनका वास्तुज्ञान इस मंदिर के निर्माण में खूब झलकता है। मन्दिर की इस शैली को कर्नल टॉड जैसे इतिहासकार ग्रीक (यूनानी)  शैली बतलाते हैं। हालांकि कई विद्वान् उनके इस तर्क से सहमत नहीं हैं।

नीलकंठ मंदिर में आज भी नियमित पूजा अर्चना होती है। आम श्रद्धालु यहां सुबह से शाम यानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक दर्शन कर सकते हैं। कुंभलगढ़ किले में आने वाले सैलानी अक्सर इस मंदिर के भी दर्शन जरूर करते हैं। आजकल यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। मंदिर के बगल में ही हर शाम को लाइट एंड साउंड शो का भव्य आयोजन होता है।


कुंभलगढ़ किले में हैं 360 मंदिर - वैसे कुंभलगढ़ किले के अंदर आप कई हिंदू और जैन मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। कहा जाता है कि कुंभलगढ़ किले के अंदर कुल 360 मंदिरों का निर्माण हुआ है। इनमें 300 तो जैन मंदिर हैं और तकरीबन 60 हिंदू मंदिर हैं। किले के अंदर सूर्य मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, मामा देव मंदिर, पीतलिया शाह मंदिर, चारभुजा मंदिर, गणेश मंदिर, बावन देवरी मंदिर, गोलेराव मंदिर आदि के भी दर्शन किए जा सकते हैं।


-        विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com

(   ( KUMBHALGARH, NEELKANTH MAHDEV TEMPLE, JAIN TEMPLE, HINDU TEMPLES ) 

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