Thursday, January 17, 2019

देश के सबसे अनूठे और अदभुत किले कुंभलगढ़ की ओर

पहले दिन उदयपुर के स्थानीय स्थलों की सैर के बाद दूसरे दिन हम कुंभलगढ़ और रैणकपुर की राह पर हैं। कुंभलगढ़ यानी देश का सबसे अनोखा और अदभुत किला। वह कैसे ये आगे जानेंगे। ये एक दिन का टूर है। इसके लिए एक दिन पहले बुकिंग करा ली जाए तो अच्छा है। हमने यही किया भी। कई टूर आपरेटर से बात की। दिन भर के लिए 2500 तो किसी ने 2600 मांगा। लेक पिछोला पर वाकिंग ब्रिज के पास गड़िया देवरा मंदिर के सामने एक ट्रैवल एजेंट का दफ्तर है। उनका नाम है –यशवंत वैष्णव ( 9116419467 ) वे टैक्सी, बाइक रेंट पर उपलब्ध कराते हैं। अच्छे सलाहकार भी हैं और मददगार भी। तो उन्होंने हमें स्विफ्ट डिजायर एसी टैक्सी उपलब्ध कराई 2100 रुपये में। हालांकि इसमें उनका कमीशन शामिल है पर ये दर वाजिब है।

तो सुबह 8.30 बजे तैयार होकर हमलोग निकल पडे हैं। टैक्सी हमारे होटल के पास आकर खडी है। टैक्सी वाले का नाम शंकर उर्फ बिटटू ( 9784303065)  है। शंकर न सिर्फ उदयपुर बल्कि पूरे राजस्थान के बारे में जानकारी रखने वाले तेजतर्रार ड्राईवर हैं। दुनिया के दर्जनों देश के हजारों टूरिस्टों को घूमा चुके हैं। उनके साथ घूमना रोचक अनुभव है। ढेर सारी बातें बड़े रोचक अंदाज में सुनाते हैं। उन्हें भी चुपचाप रहने वाले टूरिस्ट पसंद नहीं हैं। तो दिन भर उनका साथ यादगार रहा है।


उदयपुर शहर से बाहर निकल कर हमलोग हाईवे  पर इसवाल गांव में पहुंचे हैं। यहां एक दुकान पर हमलोग नास्ते के लिए रुके। संगम मिष्टान भंडार से हमलोगों ने समोसा, पकौड़ा, नमकीन, मिल्क केक जैसी तमाम चीजें कुछ खाई तो कुछ रास्ते के लिए पैक करा ली। पूरा रेस्टोरेंट इसवाल गांव का एक परिवार चलाता है। खाने पीने की दरें वाजिब हैं, स्वाद अच्छा है।

पेट पूजा के बाद अब हमलोग आगे चल पड़े हैं। उदयपुर से कुंभलगढ़ की दूरी 100 किलोमीटर के आसपास है। कुछ बसें भी जाती हैं। पर बेहतर तरीका अपनी टैक्सी बुक करके जाना है। कुंभलगढ़ का रास्ते पर राजस्थान के ग्रामीण परिवेश के दर्शन होते हैं। विजयादशमी का दिन है। कुछ गांव में यात्रा निकली है। हमारे ड्राईवर गाड़ी रोक कर यात्रा के आगे सिर झुकाने जाते हैं।

एक तरफ पहाड़ दूसरी तरफ बरसाती नदियां। हमें कुछ साइकिल सवार दिखाई देते हैं। वे समूह में साइकिल से कुंभलगढ़ की तरफ जा रहे हैं। उनके पीछे उनकी बस भी है।

कुंभलगढ़ से पहले केलवाड़ा बाजार कुंभलगढ़ से ठीक पहले हमलोग केलवाड़ा कस्बे में पहुंच गए हैं। केलवाड़ा से कुंभलगढ़ किले की दूरी सात किलोमीटर है। केलवाड़ा में रहने के लिए कुछ होटल और खाने पीने की दुकानें भी हैं।
अब हमारी टैक्सी कुंभलगढ़ किले की तरफ बढ़ रही है। पहला गेट आया हल्ला पोल। इस गेट के बाद हमलोग किले के मुख्य द्वार पर पहुंच गए हैं। टैक्सी पार्किंग में चली गई। हमने किले में प्रवेश का टिकट खरीदा। भारतीय सैलानियों के लिए 40 रुपये का टिकट है। विदेशी सैलानियों के लिए 600 रुपये का।

कुंभलगढ़ किले में लाइट एंड साउंड शो भी होता है। पर इसे देखने के लिए आपको रात में कुंभलगढ़ किले के आसपास ही किसी होटल या रिजार्ट में रुकना होगा। तो लगे हाथ यह भी जान लिजिए , अब कुंभलगढ़ के आसपास कई दर्जन रिजार्ट बन गए हैं। रहने के लिए कॉटेज भी उपलब्ध है। यहां रहकर जंगल सफारी का भी आनंद लिया जा सकता है। यहां रामदा समूह से लेकर कई और समूह ने अपने रिजार्ट बना डाले हैं। हर साल कुछ नए रिजार्ट खुल रहे हैं। इससे कुंभलगढ़ का वास्तविक सौंदर्य कम हो रहा है। पर सैलानियों की आमद हर साल बढ़ रही है। तो चलें किले के अंदर...
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( KUMBHALGARH FORT, KELWADA, ISWAL, BITTU TAXI )          
   


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