Monday, January 14, 2019

उदयपुर की गलियों में पोहा जलेबी का स्वाद

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हमने रहने का ठिकाना उदपुर शहर में लेक पिछोला इलाके में तो बना लिया पर खाने पीने के मुफीद स्थल तलाश करने में थोड़ी दिक्कत आई। वो इसलिए कि पुराने उदयपुर में खाना-पीना महंगा है। स्ट्रीट फूड के विकल्प कम हैं। वैसे तो राजस्थान के सभी शहर खाने पीने के लिए प्रसिद्ध हैं। पर पुराने उदयपुर में खाना पीना महंगा क्यों है। मामला कुछ ऐसा है कि पुराने उदयपुर की गलियों के होटलों में ज्यादातर विदेशी सैलानी ठहरते हैं, तो इस इलाके के समान्य होटलों में भी खाने पीने की दरें महंगी हैं।


कई होटलों में रुफ टॉप रेस्टोरेंट हैं। यहां खाने की थाली 150 से 250 रुपये की है। गुणवत्ता के लिहाज से बात करें तो यह दो गुनी महंगी है। इसलिए उदयपुर में किफायती खाने पीने के स्थल तलाश करने में हमें थोड़ी परेशानी हुई। पहले दिन सुबह सुबह नास्ते के लिए निकले तो जगदीश मंदिर के पास एक साधारण सा रेस्टोरेंट मिला वहां पर एक पराठा 50 रुपये का था। 

हमने तीन पराठे पैक कराए। होटल में आकर खाया। दिन भर घूमने के दौरान करणी माता मंदिर के आधार तल पर छोला भठूरा खाया। एक प्लेट छोटाल भठूरा 80 रुपये का। प्लेट में सिर्फ एक भठूरा. हालांकि भठूरे का आकार बड़ा देखकर महंगाई पर संतोष करना पड़ा।

सज्जन गढ़ पैलेस में भी एक शाही कैफे है। इसमें गार्डन रेस्टोरेंट है। यहां आप चाय काफी का आनंद ले सकते हैं। शाम को वहां बैठना अच्छा लगता है पर यह भी आपकी जेब पर भारी है।

फतेहसागर लेक के सामने कई रेस्टोरेंट एक पंक्ति में हैं। यहां पर शाम को हमने पाव भाजी का आनंद लिया। पर इन रेस्टोरेंट भी खाने पीने की दरें टूरिस्टों को ध्यान में रखकर रखी गई हैं।


विलेज कैफे और कुलदीप – जैसा की कि हमने आपको पहले भी बताया कि पुराने उदयपुर मे खाने पीने की दरे महंगी है। साधारण सी थाली 150 से 250 के बीच है। पर जगदीश मंदिर से वाकिंग ब्रिज के रास्ते में हमें विलेज कैफे का बोर्ड नजर आया। हम सीढ़ियां चढ़कर पहली मंजिल पर पहुंचे। सुरूचिपूर्ण ढंग से सजाए गए साधारण रेस्टोरेंट में 99 रुपये की फिक्स थाली है। इसमें दो चपाती, चावल, दाल, सब्जी और सलाद। खाना साफ सुथरा ताजा और सुस्वादु है। इस कैफे का संचालन कुलदीप करते हैं। वे अत्यंत मृदुभाषी हैं। तो उदयपुर में हर शाम को खाने पीने का हमारा ठिकाना विलेज कैफे ही रहा।

चेतक सर्किल के रेस्टोरेंट- बाद में हमें होटल हेरिटेज हवेली के केयरटेकर नदीम भाई ने बताया कि उदयपुर में खाने पीने के सबसे ज्यादा ढाबे चेतक सर्किल पर हैं। आप कहीं से भी आएं तो चेतक सर्किल पर पहुंच जाएं तो वहां बजट में अपनी पसंद से पेटपूजा कर सकते हैं। पर हमारे होटल से चेतक सर्किल की दूरी डेढ़ किलोमीटर है और हमारे पास आने जाने के लिए कोई वाहन नहीं है।

अगले दिन सुबह सुबह टहलते हुए मैं कई किलोमीटर चलता हुआ घंटा घर होते हुए दिल्ली गेट पहुंच गया। दिल्ली गेट पर पोहा जलेबी खाकर मजा आ गया। दरें भी वाजिब है। यहां पर कई मिठाई की भी दुकाने हैं। दिल्ली गेट पर कुछ अच्छे रेस्टोरेंट भी हैं। उदयपुर बस स्टैंड के आसपास भी वाजिब दरों वाले खाने पीने के रेस्टोरेंट हैं। पर लेक पिछोला के इलाके में जरा संभल कर रहें...

उदयपुर में जो सबसे सस्ती चीज नजर आई वह थी छाछ। यहां पर छाछ का भाव महज 7 रुपये लीटर है। यह सभी डेयरियों पर खुले में उपलब्ध है। अगर आपको चाहिए तो वे पॉलीबैग में बांध कर दे देंगे। वैसे यहां दूध भी सस्ता है। भाव देखिए 36 रुपये लीटर। जब दिल्ली में 50 से 55 रुपये लीटर है। हालांकि दही और पनीर के भाव तो दिल्ली जैसे ही हैं। तो उदयपुर आएं तो छाछ पीएं मस्त रहें। 



डांडिया की वो रातें – जब हम उदयपुर मेंहैं तो नवरात्र का समय चल रहा है। रोज रात को जगदीश मंदिर चौराहे पर बड़े स्तर पर डांडिया रास हो रहा है।मेवाड़ युवा संगठन की ओर से आयोजित इस डांडिया रास में हजारों युवक युवतियां हिस्सा ले रहे हैं। हमने भी दो रातें कुछ घंटे तक डांडिया रास देखा। 

डांडिया में हिस्सा लेने के लिए युवतियां रंग बिरंगे परिधानों में तैयार होकर अपने घरों से पहुंच रही हैं। देर रात तक डांडिया रास चलता है। पर सुरक्षा और छेड़छाड़ का कोई खतरा नजर नहीं आता। जगदीश मंदिर के आगे इतनी भीड़ हो जाती हैं कि पांव रखने की जगह नहीं मिलती...पर ये रंगों के खुशबू में डूबी रातें हमेशा याद रहेंगी।
- विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
( UDAIPUR, FOOD, DANDIA, POHA, JALEBI) 




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