Friday, January 11, 2019

सहेलियों की बाड़ी - यहां सालों भर सावन भादो

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अगर कोई मुझसे ये पूछे कि आपको उदयपुर में सबसे अच्छी जगह कौन  सी लगी, तो मेरा जवाब होगा सहेलियों की बाड़ी। यह उदयपुर में एक ऐसी जगह है जहां पर जाना स्वप्नलोक में जाने सदृश है। यहां शाम को पहुंचना और भी सुखकारी है। तो हमलोग सहेलियों की बाड़ी में शाम को ही पहुंचे हैं। फतेहसागर लेक पर कुछ खाने पीने के बाद हमारा अगला पड़ाव है सहेलियों की बाड़ी। वैसे तो यह नाम से ही रुचिकर लगती है। बाड़ी मतलब यह एक भवन और विशाल उद्यान है। इसमें प्रवेश के लिए 10 रुपये का टिकट है।
इसका निर्माण महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने 1710 से 1734 के बीच यानी 18वीं सदी में करवाया था। इस उद्यान के बारे में यह कहा जाता है कि राणा ने इस सुरम्य उद्यान को स्वयं तैयार किया था और इसे अपनी रानी को भेंट किया, जो विवाह के बाद अपनी 48 नौकरानियों के साथ उनके यहां आई थी। तो यहां शाही परिवार की महिलाएं सैर करने आती थीं। उस जमाने में यहां पुरुषों  का प्रवेश प्रतिबंधित था।  'फतेह सागर झील' के करीब स्थित यह जगह अपने ख़ूबसूरत झरनों, हरे-भरे बगीचे और संगमरमर के काम के लिए जाना जाता है।

सहेलियों की बाड़ी के विशाल परिसर में बीच में एक छोटा सा भवन है और उसके चारों तरफ बाग हैं। बाग़ में कमल के तालाब, फ़व्वारे, संगमरमर के हाथी आदि बने हुए हैं। इस उद्यान का मुख्य आकर्षण यहां के फ़व्वारे हैं। इन फव्वारों के बारे में कहा जाता है कि इन्हें इंग्लैण्ड से मंगवाया गया था।

यहां सालों भर सावन भादो सहेलियों की बाड़ी के मुख्य आंगन में प्रवेश करने पर आपको एक सुंदर तालाब दिखाई देता है जिसमें फव्वारे चलते हैं। जब बायीं तरफ आगे बढ़ते हैं तो सावन भादो नामक बाग है। इसका नाम सावन भादो इसलिए है कि यहां सालों भर सावन भादो जैसा मौसम रहता है। यहां फव्वारे कुछ इस तरह लगाए गए हैं जहां जाकर आपको लगता है कि आप बारिश के बीच आ गए हैं। इन फव्वारों की बनावट कुछ इस तरह है कि इसके लिए किसी मोटर या मशीन का इस्तेमाल नहीं किया गया है। तो सावन भादो के साथ समय गुजारना आपको रुमानी कर देता है। आनंदित कर देता है।

सहेलियों की बाड़ी के पीछे वाले हिस्से में भी एक तालाब है, इसमें कमल के फूल खिलते हैं। साथ ही कई सुंदर कलाकृतियां भी बनी है। परिसर में कई अत्यंत पुराने वृक्ष भी हैं। शाम को बाड़ी के परिसर में कुछ दुकाने भी लगती हैं जहां से आप हस्तशिल्प की वस्तुएं खरीद सकते हैं।  
श्रावण मास की अमावस्या के अवसर पर इस बाड़ी में नगर निवासियों का एक बड़ा मेला भी लगता है। सहेलियों की बाड़ी में कई फिल्मों की शूटिंग हुई है। सुनील दत्त साधना की फिल्म मेरा साया, फिल्म गाइड और हीरा के दृश्य यहां शूट किए गए थे।
कैसे पहुंचे- यह उदयपुर के मुख्य इलाके में सहेली मार्ग पर  न्यू फतेहपुरा में पंचवटी क्षेत्र में है। कहीं से भी पहुंचना काफी आसान है। सहेलियों की बाड़ी सुबह 8 बजे खुल जाती है और रात्रि 8 बजे तक खुली रहती है। इसमें प्रवेश के लिए 10 रुपये का टिकट है।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य Email - vidyutp@gmail.com
 ( SAHELION KI BARI, UDAIPUR ) 

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