Friday, January 18, 2019

कुंभलगढ़ 36 किलोमीटर लंबी दीवारों से घिरा किला

कुंभलगढ़ देश के तमाम किलों में काफी अलग है। यह राजस्थान के राजसमंद जिले के जंगल में स्थित विशाल किला है। इस किले की दीवार 36 किलोमीटर लंबी है। यह चीन की दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार है। घने जंगलों के बीच स्थित इस किले का इस्तेमाल मेवाड़ वंश के शासक मुगलों के हमले के दौरान छुपने के लिए किया करते थे। यहां हमेशा पहुंचना मुश्किल कार्य रहा है।


आप कुंभलगढ़ का किला देखने पहुंचे हैं तो तीन से चार घंटे का समय रखिए। किले के मुख्य प्रवेश द्वार हनुमान पोल से किले के शीर्ष तक पहुंचने के लिए अच्छी खासी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है।  टिकट घर के पास चाय नास्ते की दुकान और खाने पीने के लिए एक रेस्टोरेंट भी है। हनुमान पोल के पास ही बाहरी वाहनों के लिए पार्किंग भी है। राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म प्रेम रतन धन पायो में आपने कुंभलगढ़ किले को देखा होगा। चलिए अब किले की चढ़ाई करते हैं।

मौर्य वंश के शासकों ने बनवाया था किला - कुंभलगढ़ किले का निर्माण चित्तौड़गढ़ किले की तरह ही मौर्य वंश के शासकों ने करवाया था।ईसा पूर्व पहली -दूसरी शताब्दी में मौर्य वंश के शासक संप्रति जो जैन धर्म को मानते थे, उन्होंने इस किले का निर्माण कराया था। संप्रति सम्राट अशोक के दूसरे बेटे थे।

पर यह किला सैकड़ो सालों तक लोगों की नजरों से ओझल रहा। पंद्रहवीं सदी में मेवाड़ वंश के शासकों की इस किले पर नजर गई। फिर इसका पुनर्निमाण मेवाड़ शासक महाराणा कुंभा द्वारा 1448 में कराया गया। पर इस किले के कई हिस्सों को अलग अलग मेवाड़ शासकों ने अपने शासन काल के दौरान बनवाया। राणा कुंभा ने  1443 से 1458 के बीच प्रसिद्ध वास्‍तुकार मंडन के पर्यवेक्षण में इसका निर्माण करवाया। मेवाड़ शासकों  ने किले को अभेद्द बनाने के लिए कई प्रवेश द्वार बनवाए। इसके साथ ही पानी के लिए जलाशय का निर्माण कराया गया।किले में संकटकालीन द्वार, कई मंदिरों का भी निर्माण कराया गया है।

यह दुर्ग समुद्र तल 1087 मीटर की ऊंचाई पर है। किले का व्यास 30 किलोमीटर में फैला हुआ है। मेवाड़ शासक महाराणा सांगा का बचपन इस दुर्ग में गुजरा। महाराणा प्रताप ने भी मेवाड़ पर शासन के दौरान इस दुर्ग को अपना निवास स्थान बनाया।

चीन की दीवार के बाद सबसे लंबी दीवार - कुम्भलगढ़ किले को देश का सबसे मजबूत दुर्ग माना जाता है। कुम्भलगढ़ किले कि दीवार जो कि 36 किलोमीटर लम्बी तथा 15 फीट चौड़ी है। किले की दीवार पर की चौड़ाई इतनी है कि इस पर घोड़े दौड़ाए जा सकते हैं। कहा जाता है कि किले की दीवार पर एक साथ दस घोड़े दौड़ सकते हैं। किले की चीन की दीवार के बाद दुनिया की सबसे लंबी दीवार है।

महाराणा प्रताप की जन्म स्थली -  कुंभलगढ़ किले में ही महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। वही महाराणा प्रताप का जिन्होने आजीवन संघर्ष किया और मुगलों के साथ लोहा लिया। किले के मध्य में महाराणा प्रताप की जन्म स्थली देखी जा सकती है।

सबसे ऊंचाई पर बादल महल - किले में आप बादल महल देख सकते हैं, जो इस किले का प्रमुख आकर्षण है। सन 1884 से 1930 के बीच राणा फतेहसिंह ने बादल महल का निर्माण कराया था।

अरावली की पहाड़ियों से घिरा होने के कारण यह कुंभलगढ़ का किला बहुत ही दुर्गम स्थल पर था। किले से पहाडों की तलहटी में होने वाली छोटी से छोटी हलचल को भी दूर से ही देखा जा सकता था। उंचाई पर चौकसी कर रहे विश्वसनीय दूत दूर की गतिविधियों की सूचना अपने राजा को पहुंचा सकते थे। किले की सबसे ऊंचे भवन से आसपास का बड़ा भव्य नजारा दिखाई देता है। पर किले के आसपास आज भी दूर-दूर तक जंगल दिखाई देते हैं।

कुंभलगढ़ किले के द्वार – कुल नौ द्वार मिलते हैं किले में। ओरठा पोल, हल्ला पोल, हनुमान पोल, विजय पोल, भैरव पोल, नीबू पोल, चौगान पोल, पगड़ा पोल, गणेश पोल।

वैसे तो कुंभलगढ़ का किला हमेशा अजेय रहा है। पर महाराणा प्रताप के समय एक बार थोड़े समय के लिए इस पर मुगलों का कब्जा हो गया था। कुंभलगढ़ किला भारत के उन स्थलों मे शामिल है जो यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किए गए हैं। यह फोर्ट्स ऑफ राजस्थान की सूची में शामिल है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य Email: vidyutp@gmail.com
(FORTS OF RAJSTHAN, KUMBHALGARH, WORLD HERITAGE SITE )




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