Monday, December 10, 2018

अलवर का होप सर्कस- लेडी होप के सम्मान में मिला नाम

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होप सर्कस। यूं कहें तो अलवर शहर का दिल। चौराहे के बीचों बीच विशाल और सुंदर मंदिर। है हिंदू मंदिर पर नाम है होप सर्कस। भला कैसे पड़ा होगा इसका नाम होप सर्कस। दोपहर की धूप में होप सर्कस ऊपरी मंजिल पर चढकर देखने पर अलवर शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है।

अलवर को मत्स्य नगर के नाम से भी जाना जाता है। पर अलवर शहर के बीचों बीच स्थित अलवर के होप सर्कस दुनिया में अलग पहचान है। इसका निर्माण 1935 में आरंभ किया गया था। यह पांच साल में बनकर तैयार हुआ। खास बात यह है कि रियासत काल में बना यह स्मारक एक महिला लेडी होप को समर्पित है। वे 1940 में अलवर यात्रा पर आईं थी। लेडी होप तत्कालीन वायसराय लार्ड लिनलिथगो की बेटी थीं। 3 मार्च 1940 को इसका नामकरण अलवर के तत्कालीन महाराजा ने लेडी होप के सम्मान में  होप सर्कस रखवा दिया। सर्कस मतलब चौराहा। ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली में कनॉट सर्कस बना तो अलवर में होप सर्कस। इस स्थल पर बाद में आजादी के लिए मर मिटने वाले स्वतंत्रता सेनानियों ने आंदोलन भी किए।  
अब होप सर्कस अलवर का प्रमुख टूरिस्ट प्लेस और शहर का लैंडमार्क बन चुका है। यह एक वृताकार संरचना है। यह तीन मंजिला है। हर मंजिल नीचे वाली मंजिल से थोड़ी छोटी होती जाती है। मतलब इसकी संरचना पिरामिड शैली में है। इसकी तीसरी मंजिल पर शिव का मंदिर बना है। इसके चारों तरफ से ऊपर चढ़ने के लिए चार सीढ़ियां बनी है। चारों तरफ चार कलात्मक गेट बने हैं। इन गेट पर कलात्मक मूर्तियां स्थापित की गई हैं। चौराहे के बीच स्थित इस भवन के चारों तरफ शहर के अलग अलग हिस्सों की ओर चार सड़के जा रही हैं। एक सड़क कंपनी बाग की तरफ, एक सड़क बस स्टैंड की तरफ एक सड़क घंटाघर की तरफ तो एक सड़क सिटी पैलेस की तरफ जा रही है।

होप सर्कस के शीर्ष पर गौरीशंकर यानी शिव का सुंदर मंदिर बना है। यह शहर का प्रमुख मंदिर है। इस शिव मंदिर के आस पास खड़े होकर अलवर शहर की सुंदरता का नजारा कर सकते हैं। हर साल होली, दिवाली, विजयादशमी जैसे त्योहारों के समय होप सर्कस को बड़ी सुंदरता से सजाया जाता है। बाद में होप सर्कस का नाम बदलकर कैलास बुर्ज रखा गया, पर सारे लोग इसे होप सर्कस के नाम से ही बुलाते हैं।  

अलवर के कोने कोने से खरीददारी करने वाले लोग होप सर्कस के आसपास के बाजारों में पहुंचते हैं और समय निकालकर इस मंदिर में दर्शन करने पहुंच जाते हैं। होप सर्कस शहर के केंद्र में है और शहर के प्रमुख बाजार इसी मंदिर के आसपास स्थित हैं। इसके शीर्ष पर चारों तरफ पार्क और सुंदर बेंच बनी है। यहां बैठकर आप टाइम पास भी कर सकते हैं।

होप सर्कस के कंपनी बाग वाले रोड को चर्च रोड भी कहते हैं। इस मार्ग पर 1885 का बना सेंट एंड्रयूज चर्च स्थित है। इसके निर्माण में पत्थरों का प्रयोग बड़ी मात्रा में किया गया है। अलवर शहर का यह अत्यंत पुराना चर्च है। यह कोलोनियल स्थापत्य कला का सुंदर नमूना है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(ALWAR, HOPE CIRCUS, SHIVA TEMPLE  ) 
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