Wednesday, December 26, 2018

जगदीश मंदिर – भगवान विष्णु का जागृत मंदिर

जगदीश मंदिर पुराने उदयपुर शहर के मध्य में स्थित एक विशाल मंदिर है। जगदीश मंदिर को मूलत जगन्नाथराय का मंदिर भी कहते है। इसका निर्माण 1652 में पूरा हुआ था। उदयपुर के महाराणा जगत सिंह प्रथम ने इस भव्य मंदिर का निर्माण किया था। इसके निर्माण में कुल 25 साल लगे थे।

सपने में आए जगन्नाथ जी -  कहा जाता है कि महाराजा जगत सिंह की जगन्नाथ पुरी के विष्णु भगवान में अखंड आस्था थी। एक दिन सपने में उन्हें विष्णु भगवान ने कहा कि तुम मेरा मंदिर उदयपुर में बनवाओ मैं वहीं आकर निवास करूंगा। इसी सपने के बाद इस मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। मंदिर आधार तल से 125 फीट ऊंचाई पर है। इसका शिखर 100 फीट ऊंचा है। 


मंदिर में कुल 50 कलात्मक स्तंभ हैं। इस मंदिर में जो प्रतिमा स्थापित है वह राजस्थान के डूंगरपुर के पश्वशरण पर्वत से लाई गई थी। गर्भ गृह में काले पत्थर की सुंदर विष्णु प्रतिमा स्थापित की गई है। इस मंदिर को जागृत मंदिर माना जाता है। ऐसा माना जाता है साक्षात जगदीश यहां वास करते हैं।

नागर और पंचायत शैली - शिखर और गर्भ गृह के लिहाज से यह नागर शैली में बना मंदिर है। मंदिर परिसर में छोटे छोटे कई मंदिरों का निर्माण कराया गया है, जो पंचायतन शैली का उदाहरण है। मंदिर परिसर में एक शिलालेख भी है जो गुहिल राजाओं के बारे में जानकारी देता है। मंदिर का प्रबंधन देवस्थानम विभाग राजस्थान सरकार के अधीन है।

यह मंदिर मारू-गुजराना स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। नक्काशीदार खंभे, सुंदर छत और चित्रित दीवारों के साथ यह मंदिर एक चमत्कारी वास्तुशिल्प की संरचना प्रतीत होती है। यह मंदिर एक ऊंचे विशाल चबूतरे पर निर्मित है।  मुख्य चौराहे से तीन मंजिल के बराबर सीढ़ियां चढ़कर आप मंदिर में प्रवेश करते हैं। मंदिर के बाह्य हिस्सों में चारों तरफ अत्यन्त सुंदर नक्काशी का काम किया गया है, जिसे देशी विदेशी सैलानी घंटो निहारते रहते हैं। इसमें गजथर, अश्वथर तथा संसारथर को प्रदर्शित किया गया है।

सन 1736 में मुगल बादशाह औरंगजेब के आक्रमण के समय मंदिर का अगला हिस्सा टूट गया। इसके गजथर के कई हाथी तथा बाहरी द्वार के पास का कुछ भाग आक्रमणकारियों ने तोड़ डाला था। उस आक्रमण के दौरान मंदिर की सुरक्षा में नियुक्त नारुजी बारहट बहादुरी से अपने 20 साथियों के संग लड़े और शहीद हो गए।  बाद में महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने फिर से मंदिर की मरम्मत कराई। मंदिर में खंडित हाथियों की पंक्ति में भी नए हाथियों को यथा स्थान लगा दिया गया।

जगदीश मंदिर उदयपुर में यह पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है। वहीं स्थानीय लोगों की बीच भी यह शहर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। वैसे तो उदयपुर शहर में हर गली में मंदिर हैं पर खास मौकों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जगदीश मंदिर की ओर उमड़ती है।

गरीबों के लिए अन्नदान – जगदीश मंदि प्रबंधन की ओर से हर रोज गरीब लोगों और साधुओं के लिए अन्नदान का इंतजाम है। इसमें गरीबों को सुस्वादु भोजन कराया जाता है। श्रद्धालु लोग इस लंगर व्यवस्था के लिए दान देते हैं।

मंदिर खुलने का समय – प्रातः 5 बजे से दोपहर ढाई बजे तक मंदिर खुला रहता है। फिर शाम 4 बजे से रात्रि 10.30 बजे तक तक खुलता है। वहीं शीतकाल में मंदिर सुबह 5.30 बजे खुलता है और रात्रि 10 बजे बंद हो जाता है।
-        माधवी रंजना 
( JAGDISH TEMPLE, UDAIPUR, RAJSTHAN, MAHARAJA JAGAT SINGH) 


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