Sunday, December 2, 2018

अलवर सिटी पैलेस – कभी राजा का किला था अब कोर्ट-कचहरी

अलवर में बस स्टैंड से निकलने पर ये सोच रहा हूं कि सबसे पहले कहां जाना चाहिए। मेरे पास प्रमुख आकर्षण की सूची है। उसमें पहला नाम सिटी पैलेस का है। बस स्टैंड के बाहर बैटरी रिक्शा वालों से सिटी पैलेस का रास्ता पूछता हूं। यहां से एक किलोमीटर। पैदल चलता हुआ सिटी पैलेस पहुंच चुका हूं। अलवर का सबसे प्रमुख दर्शनीय स्थल यहां का सिटी पैलेस है। पर सिटी पैलेस के प्रवेश द्वार से अंदर जाते ही तमाम वकीलों के दफ्तर दिखाई देते हैं। शनिवार होने के कारण ये बंद जरूर हैं।

किले पर सरकारी कब्जा - पता चला कि इस सिटी पैलेस में अलवर के जिलाधिकारी का दफ्तर चलता है। सिर्फ जिलाधिकारी ही नहीं बल्कि जिला अदालत और दूसरे प्रमुख दफ्तर भी इसी किले में संचालित होते हैं।  दूसरे शब्दों में कहें तो ऐतिहासिक विरासत पर प्रशासन का कब्जा। घोर नाइंसाफी है।

 कर्नाटक के मडिकेरी पैलेस बड़े हिस्से पर भी इसी तरह सरकारी कब्जा देखा था। अलवर सिटी पैलेस के नीचे के फ्लोर पर जिलाधिकारी का दफ्तर है। अगले तीन मंजिलों पर भी जिला प्रशासन के अलग अलग विभाग हैं। पर इसी भवन में सबसे उपर संग्रहालय बनाया गया है। आमदिनों में लोगों की भीड़ भाड़ के बीच सीढ़िया चढ़कर आपको संग्रहालय तक जाना होगा।

सिटी पैलेस का मूल नाम विनय विलास महल है। इस किले का निर्माण 1793 में राजा बख्तियार सिंह द्वारा करवाया गया था। यह राजपूत और इस्लामिक शैली का अदभुत उदाहरण है। हर मंजिल पर सुंदर झरोखे बने हैं। किले में प्रवेश के लिए पांच दरवाजों का निर्माण कराया गया था। इनके नाम लक्ष्मण पोल, चांद पोल, सूरज पोल, किशन पोल और अंधेरी गेट हैं। सिटी पैलेस के अंदर एक विशाल आंगन है। परिसर में एक सुंदर कृष्ण मंदिर भी है।

सिटी पैलेस के संग्रहालय में राजपरिवार से जुड़ा सुंदर संग्रह देखा जा सकता है। इसमें राजपरिवार द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री, अस्त्र शस्त्र के अलावा राजा द्वारा मंगाई सुंदर साइकिल को देख सकते हैं। यह अलवर के महाराजा सवाई जय सिंह की साइकिल है। इसके ब्रेक पैडल में लगाए गए हैं।

पर अलवर संग्रहालय का सबसे नायाब संग्रह है इसकी संगीत से जुड़ी दीर्घा। इस दीर्घा में अलग अलग संगीत के रागों से जुड़ी पेंटिंग का कलेक्शन है। इसके साथ ही सभी रागों के बारे में बेहतरीन जानकारियां भी प्रस्तुत की गई हैं। संगीत में रूचि रखने वाले लोगों के लिए ये संग्रहालय बहुमूल्य है।

संग्रहालय में कुछ पुरानी पुस्तकों का भी शानदार संग्रह है। इनमें गीता रामायण के अलावा अबुल फजल कृत अकबरनामा की प्रति देखी जा सकती है।  
जुलाई 2018 में इस संग्रहालय को नया रूप दिया गया है। इसमें प्रवेश के लिए 20 रुपये का टिकट है। संग्रहालय सुबह 9.45 से शाम 5.15 तक कुला रहता है। यहां पेयजल शौचालय आदि का भी इंतजाम है। पर बड़ा सवाल है कि विनय विलास पैलेस को सरकारी कब्जे से मुक्ति कब मिलेगी।

कैसे पहुंचे - बस स्टैंड से तकरीबन एक किलोमीटर पैदल चलकर सिटी पैलेस पहुंचा जा सकता है। रास्ते में विवेकानंद चौराहा आता है। सिटी पैलेस अगर आप शनिवार या रविवार को घूमने जाएं तो बेहतर होगा। क्योंकि इस दिन छुट्टी होने के कारण सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं। शेष दिनों में यहां काफी भीड़भाड़ और चहल पहल रहती है।
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( CITY PALACE , ALWAR, VINAY VILAS PALACE )