Monday, December 24, 2018

हेरिटेज हवेली में तीन दिन और लेक पिछोला का नजारा

हमारा आटोरिक्शा पुराने उदयपुर की सड़कों पर धीरे धीरे आगे बढ़ रहा है। इन्हें सड़क न कहकर गलियां कहें तो अच्छा होगा। जगदीश मंदिर के आगे रास्ता और संकरा हो गया है। 

हम पुराने उदयपुर में लेक पिछोला के सामने पहुंच गए हैं। गणगौर घाट के आगे एक वाकिंग ब्रिज है। मतलब झील पर एक ऐसा पुल जिस पर पैदल यात्री ही आर पार जा सकते हैं। इसी के आगे हमें होटल हेरिटेज हवेली का बोर्ड दिखाई दे गया। एक पुराने दरवाजे से अंदर जाने पर बड़ा सा आंगन है। इस आंगन के चारों तरफ कई लोगों के घर हैं। इनमें से ही एक घर को गेस्ट हाउस में बदल दिया गया है। नीचे रिसेप्शन पर रिपोर्ट करने के बाद हमें हमारे कमरे की ओर पहुंचाया गया। पतली घुमावदार सीढियां। दूसरी मंजिल पर कमरा। कमरे में एक डबल बेड के अलावा खिड़की के पास बने पक्के चबूतरे पर तीसरा बेड लगा दिया गया है। अनादि ने वह बेड कब्जा कर लिया। 

कमरे में विशाल खिड़की है जिससे झील का नजारा दिखाई देता है। कमरे के दरवाजे बाबा आदम वाले हैं। डबल डूर वाले दरवाजे और बंद करने के लिए सांकल। अनादि के लिए ये पुरानी चीजें कुछ नई थीं। हमारे अगले तीन दिन इस होटल में काफी अच्छे गुजरे। होटल में एक रुफ टॉप रेस्टोरेंट भी है। बड़ा सजा संवरा रेस्टोरेंट है। इसमें झूले भी लगे हैं। खाने की टेबल से झील का नजारा दिखाई देता है। पर होटल का रसोईया छुट्टी पर है इसलिए रेस्टोरेंट बंद पड़ा है। हालांकि होटल वाले हमें चाय उपलब्ध करा रहे हैं। आरओ का पानी निःशुल्क उपलब्ध है। अगले दिन होटल के केयर टेकर नदीम भाई से मुलाकात हुई। उन्होने बताया कि हमने विजयादशमी के दिन एक और नया लग्जरी होटल बना लिया है।

अगर आप उदयपुर शहर की प्राचीनता और उसके सौंदर्य को करीब से महसूस करना चाहते हैं तो आपको पुराने उदयपुर की गलियों में बने होटलों में ही रुकना चाहिए। वैसे तो रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास भी अच्छे होटल उपलब्ध हैं। पर पुराने उदयपुर यानी लेक पिछोला के आसपास के होटलों में देसी विदेशी सैलानियों का सालों भर जमावड़ा लगा रहता है। इनमें से कई होटल सुबह-सुबह योगासान की कक्षाएं भी लगाते हैं। यहां नजारा कुछ कुछ जोधपुर और वाराणसी की गलियों से मिलता जुलता है। विदेशी सैलानी साइकिल किराये पर लेकर सुबह-सुबह उदयपुर की गलियों में घूमना पसंद करते हैं। वैसे खाने पीने रहने के लिहाज से देखें तो पुराना उदयपुर थोड़ा महंगा है। पर शहर की खुशबू यहीं है।

उदयपुर में क्या क्या देखें -  तो अब जान लेते हैं कि उदयपुर शहर में क्या कुछ देखने-घूमने लायक है - लेक पिछोला, फतेह सागर झील, जगदीश मंदिर, सिटी पैलेस, जगमंदिर पैलेस, बागोर की हवेली, भारतीय लोक कला मंडल, सहेलियों की बाड़ी, दूध तलाई के पास करणी माता का मंदिर, नीमच माता का मंदिर, सज्जनगढ़ का मानसून पैलेस, सज्जनगढ़ में बोटानिकल गार्डन आदि आप शहर की सीमा में देख सकते हैं।

शहर के आसपास आप सास बहु का मंदिर, एक लिंगी मंदिर, नाथद्वारा, हल्दीघाटी, कुंभलगढ़ फोर्ट और रणकपुर जैन मंदिर, चार भुजा मंदिर आदि देखने जा सकते हैं। यहां कम से कम तीन दिन रहने का कार्यक्रम बनाएं तो अच्छा रहेगा।

उदयपुर में सैलानी सालों भर आते हैं। राजस्थान के अन्य शहरों की तुलना में यहां का मौसम सुहाना रहता है। इसलिए लोग उदयपुर को राजस्थान का कश्मीर भी कहते हैं। पर हम यहां इतनी देर से क्यों आए। तो इसका उत्तर है कि मेरी कोशिश उन स्थलों की सैर करने की रहती है जहां अभी कम लोग पहुंचे हैं। पर राजस्थान की बात हो तो बिना उदयपुर के कैसे हो सकती है बात।

-विद्युत प्रकाश मौर्य- ईमेल -vidyutp@gmail.com
(UDAIPUR, HERITAGE HAWELI, GANGAUR GHAT, LAKE PICHOLA ) 

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