Wednesday, November 28, 2018

कभी दिल्ली और आगरा से मुकाबला करता था डीग

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डीग राजस्थान प्रांत के भरतपुर जिले में भरतपुर शहर से 32 किलोमीटर दूर एक प्राचीन ऐतिहासिक शहर है। इसका प्राचीन नाम दीर्घापुर था। स्कंद पुराण में दीर्घ या दीर्घापुर के रूप में इसका उल्लेख आता है। डीग को भरतपुर राज्य की पहली राजधानी राजा बदन सिंह ने बनाया था।

भरतपुर के जाट राजा कुशल प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि वे अच्छे कला-प्रेमी एवं कला संरक्षक भी थे। उनके समय में हुए निर्मित किले महल वास्तुकला के अद्भुत नमूने हैं। राजा बदन सिंह को सौन्दर्य कला, स्थापत्य कला और वास्तु का अच्छा ज्ञान था। डीग के भवनों एवं उद्यानों को देखकर यह बखूबी एहसास होता है।
डीग शहर में प्रवेश करते ही जल महल से थोड़ी दूरी पर आपको डीग का पुराना किला नजर आता है। यह छोटा सा नगर अपनी बेजोड किलेबंदी, अत्यधिक सुंदर बगीचों और कुछ भव्य महलों के कारण दर्शनीय है।


भरतपुर के जाट-नरेशों के पुराने महल अपने भव्य सौंदर्य के लिए विख्यात हैं। नगर के चारों तरफ मिट्टी की चहारदिवारी हुआ करती थी। उसके चारों ओर गहरी खाई निर्मित की गई थी। मुख्य द्वार 'शाह बुर्ज' कहलाता था। इसकी लंबाई-चौड़ाई 50 गज थी।
डीग के किले के चारों ओर एक सृदृढ़ मोटी दीवार है। बाहर किले के चारों ओर मार्गों की सुरक्षा के लिए छोटी-छोटी गढ़ियां भी बनाई गई थीं- जिनमें गोपालगढ़ मिट्टी का बना हुआ किला है, सबसे अधिक प्रसिद्ध था। इन किलों की मोर्चाबंदी के अंदर बसा डीग कभी सुंदर सुसज्जित नगर हुआ करता था। यह नगर अपने वैभवकाल में (18वीं शती में) मुगलों की राजधानी दिल्ली से और आगरा से मुकाबला करता था।

डीग का किला का राजा बदन सिंह से जुड़ा है। बदन सिंह ने अपने राज्य का विस्तार युद्ध की अपेक्षा शांति और राजनैतिक कौशल से अधिक किया। डीग और भरतपुर के अजेय किलों के निर्माण और उनमें सुन्दर महलों की रचना उनका शौक था। अपने अंतिम दिनों में भरतपुर की बजाय वह डीग में ही रहते थे। डीग के भवन में एक लम्बा-चौडा तख्तनुमा पलंग आज भी मौजूद है। कहा जाता है कि बदन सिंह ने आगरा के उन शिल्पियों को रोजगार दिया था, जो मुगल-साम्राज्य के कमजोर होने से भूखों मरने की स्थिति में थे।

राजा बदन सिंह के बाद कला के क्षेत्र में महाराजा सूरजमल की अभिरुचि दुर्ग, महल एवं मंदिर निर्माण में खूब थी। हालांकि सभी जाट राजाओं के शासन काल में किलों की मरम्मत एवं पुनर्निमाण का कार्य जारी रहा, परन्तु स्वयं उनका योगदान विशेष रूप से भरतपुर और डीग के आधुनिकतम महलों के निर्माण में रहा।

महाराजा सूरजमल ने इस किले का निर्माण अठारहवीं सदी में कराया। किले का मुख्य आकर्षण है यहां का निगरानी बुर्ज यानी वॉच टावर है जहां से पूरे महल को देखा जा सकता है, साथ ही शहर का भी नजारा भी लिया जा सकता है। आगरा किले से लूट कर यहां लाई गई तोप यहां देखी जा सकती है।

राजा बदन सिंह और महाराजा सूरजमल के बारे में के नटवरसिंह लिखते हैं कि पूरी तरह निरक्षर होने पर भी, बदन सिंह में आश्चर्यजनक सौन्दर्यबोध था। डीग के उद्यानों-प्रसादों की भव्य रूपरेखा उसी ने और केवल अकेले उसी ने रची थी। दिल्ली और आगरा के श्रेष्ठ मिस्त्री, झुंड बना कर बदन सिंह और सूरजमल के दरबारों में रोजगार की तलाश में आते थे।

कैसे पहुंचे : मथुरा जंक्शन से डीग रेल या बस से पहुंच सकते हैं। अलवर और भरतपुर से भी डीग पहुंचा जा सकता है। मथुरा से डीग 35 किलोमीटर है। 

-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        (DEEG, FORT, RAJA BADAN SINGH, RAJA SURAJMAL OF BHARTPUR )