Monday, November 26, 2018

डीग का जल महल पैलेस - ताजमहल से कुछ कम नहीं...

राजस्थान के भरतपुर जिले का शहर डीग। डीग में बना जल महल पैलेस। ये किला सौंदर्य में ताजमहल से कुछ कम नहीं है। पर यहां सैलानियों की नजर कम पड़ी है।
यह भरतपुर के जाट राजाओं का समर पैलेस हुआ करता था। जल महल परिसर में कई भवन हैं जो अलग अलग राजाओं के कार्यकाल में बनवाए गए थे। परिसर में दो विशाल सरोवर हैं , जिनमें नीचे उतरने के लिए झरोखे भी बने हुए हैं। इस महल को 1756-1763 के बीच जाट राजा महाराजा सूरजमल ने बनवाना आरंभ किया। इसके बाद 1764-1768 के बीच राजा जवाहर सिंह ने निर्माण कराया। इसके लिए गुलाबी पत्थर बंसी पहाड़पुर गांव से लाए गए।

इस भवन में गोपाल भवन के दो हिस्से हैं जिन्हे सावन और भादो कहा जाता है।  इसके बाद सूरज भवन, हरदेव भवन, किशन भवन, केशव भवन, नंद भवन जैसे अलग अलग कई भवनों की नजारा आप कर सकते हैं। इन भवनों में विशाल बरामदे भी हैं। कई भवनों में संगमरमर का सुंदर काम भी देखा जा सकता है। सभी भवनों की संरचना ऐसी है कि इसमें आपको गरमी का एहसास कम होगा। इन भवनों के कमरों में रोशनी आने का भी सुंदर इंतजाम किया गया है। सभी भवनों के केंद्र में विशाल हरा भरा उद्यान है। 

रंग बिरंगे फव्वारे - दो अलग अलग सरोवरों के नाम गोपाल सागर और रूप सागर दिए गए हैं। जल महल पैलेस की ख्याति इसके रंग बिरंगे फव्वारों के लिए है। इसमें पानी आने का इंतजाम गोपाल सागर से किया गया है। अभी भी साल में दो बार इन फव्वारों को चलाया जाता है। हर साल अक्तूबर में डीग में प्रशासन की ओर मेला लगता है। तब ये फव्वारे चालू किए जाते हैं।  सम्पूर्ण उत्तर भारत में हिन्दू शैली के एकमात्र महल डीग के जल महल हैं। इन भवनों में काम लाई गई तकनीक आज भी आधुनिकतम बनी हुई है। 


डीग के जल महल परिसर में लक्ष्मण मंदिर और गणेश मंदिर भी स्थित हैं। मैं किले के प्रवेश द्वार पर पहुंच गया हूं। टिकट काउंटर पर बताया गया कि टिकट की कोई जरूरत नहीं है। अंदर प्रवेश करते देखा कि हरी हरी घास पर स्थानीय महिलाएं कीर्तन कर रही हैं। किले से पहले भवन गोपाल भवन में पीछे की तरफ हनुमान जी का मंदिर है। इसे भरतपुर के महाराजा व्रजेंद्र सिंह ने 1942 में बनवाया। इस मंदिर में रोज नगर के श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति 400 साल से ज्यादा पुरानी है। यह मूर्ति हकीक की बनी है। इस मूर्ति में हनुमान जी पर महाजा भरत द्वारा भ्रमवश चलाए गए तीर का निशान देखा जा सकता है।  

जल महल के दोनों सरोवरों की दशा के देखकर दुख होता है। रखरखाव के अभाव में इनके जल में काई जम गई है। पानी में लोगों ने कचरा फेंक कर सरोवर के सौंदर्य को बदरंग कर दिया है। इनकी सफाई कर इसमें नौका विहार को बढावा दिया जा सकता है।


कैसे पहुंचे : मथुरा शहर से डीग की दूरी 35 किलोमीटर है। यह मथुरा अलवर रेल मार्ग पर स्थित है। वहीं अलवर से डीग की दूरी 60 किलोमीटर है। आप भरतपुर , अलवरमथुरागोवर्धन  कहीं से भी डीग आसानी से पहुंच सकते हैं। डीग भरतपुर जिले का छोटा सा शहर है। यहां रहने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं है। इसलिए आसपास के शहरों में रुककर दिन में डीग भ्रमण का कार्यक्रम बनाएं तो बेहतर होगा। 
(DEEG,  BHARATPUR , JAL MAHAL , RAJSTHAN)  
- विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com