Friday, November 23, 2018

बेलुर में हल्की बारिश और लेमन राइस, घोंसले की ओर वापसी

बेलुर में चन्न केशव मंदिर के दर्शन के बाद नास्ते का समय हो गया है। लगेज रुम से अपना बैग रिलीज कराने के बाद मैं मंदिर के पास ही एक साफ-सुथरे रेस्टोरेंट में पहुंच गया। यहां नास्ते लेमन राइस लिया। यहां पर आगरा के एक जैन परिवार से मुलाकात हुई जो बाहुबली के दर्शन के बाद बेलुर दर्शन के लिए आया है। जैन परिवार की एक कन्या बला की खूबसूरत है। वे लोग बिना लहसुन प्याज वाला नास्ता तलाश कर रहे हैं। पर उन्हें निराशा हाथ लगी। हल्की बारिश में मौसम सुहाना हो रहा है। नास्ते के बाद मैं अब आगे चल पड़ा हूं। बारिश में भींगते हुए ही। 



पतालेश्वर मंदिर बेलुर -  बेलुर का दूसरा प्रमुख मंदिर है पतालेश्वर मंदिर। यह शिव जी का छोटा सा मंदिर है।  इस मंदिर का निर्माण भी होयसल राजाओं ने ही करवाया था। पर यह मंदिर बाद में बदहाल हो गया था। लोगों की नजरों से ओझल हो गया था। पर इस मंदिर को स्थानीय लोगों ने जीर्णोद्धार करके काफी सुंदर बना दिया है। इस मंदिर की दीवारों पर भी अत्यंत कलात्मक मूर्तियां हैं। इन्हें देखकर लगता है कि इस छोटे से मंदिर के निर्माण में शिल्पियों ने काफी समय लगाया होगा।
पतालेश्वर नाथ का यह मंदिर बस स्टैंड के पास कर्नाटक सरकार के होटल विष्णु रीजेंसी के बगल में स्थित है। पहले विष्णु जी और अब शिवजी के दर्शन के बाद बस स्टैंड वापस आ गया।

अब अपने घोंसले की ओर वापसी का वक्त आ गया है। बेलुर से बंगलुरु की राह पर हूं। बेलुर बस स्टैंड से सीधे बेंगलुरु वाली बस मिल गई है। पता चला कि ये बस मुडिगेरे से आ रही है। बस हासन बस स्टैंड में पांच मिनट रुकने के बाद 11.25 बजे बेंगलुरु हाईवे की ओर बढ़ चली है। यहां से बेंगलुरु की दूरी 180 किलोमीटर है। कुछ दूर चलने पर ही चेनेराय पटना आ गया। यहां तक  तो मैं पहले भी आ चुका हूं। पिछली बार जब बंगलुरु से श्रवणबेलगोला के लिए आया था तो सीआर पटना से ही बस बदली थी। मतलब आगे का सारा रास्ता अब जाना पहचाना आने वाला है। 


अगला पड़ाव हिरीसावे आया। यहां से भी श्रवणबेलगोला का रास्ता बदलता है। रास्ते में कई टोल प्लाजा आते हैं। रास्ते में एक जगह बस दोपहर के खाने के लिए रुकती है। मुझे यहां फिर 35 रुपये में दो चपाती और सब्जी की प्लेट मिल गई तो हल्की से पेट पूजा हो गई। बस आदि चुनचुन गिरी यूनीवर्सिटी के पास से गुजर रही है। कुणीगल पार हो गया है। अब हम नीलमंगला पहुंच गए हैं। यहां से तुमकुर और बंगलुरु के लिए रास्ता बदलता है। दोपहर 3 बजे बस बंगलुरु शहर की सीमा में प्रवेश कर गई है। इसके साथ ही जाम लगना आरंभ हो गया है। रास्ते में मुझे एक ज्वार की रोटी का स्टाल नजर आता है। मतलब ज्वार की रोटी व्यवसायिक तौर पर बेची जाने लगी है।

केएसआर बंगलुरु रेलवे स्टेशन के सामने स्थित बस स्टैंड में पहुंच गया हूं। आज ही रात को दिल्ली के लिए वापसी की उडान है इसलिए बंगलुरू में किसी दोस्त रिश्तेदार से मिलना संभव नहीं है। तो दो घंटे बस स्टैंड के आसपास के बाजार में ही टाइम पास किया। किसी दोस्त रिश्तेदार से मिलने का समय नहीं है। बंगलुरु सिटी से एयरपोर्ट के लिए एसी बस सेवा चलती है। इसका किराया 235 रुपये है। केआईए 9 बस में एयरपोर्ट के लिए सवार हो गया। 
अकेले एयरपोर्ट जाना हो तो बस ही ठीक है। इससे पहले के बंगलुरु एयरपोर्ट के सफर हमने टैक्सी से किए थे। हालांकि बेंगलुरु के हर इलाके से एयरपोर्ट के लिए बस सेवाएं हैं। यहां तक कि बंगलुरु एयरपोर्ट से मैसूर के लिए भी सीधी लग्जरी बस सेवा उपलब्ध है।

बेंगलुरु में हेली टैक्सी सेवा – बेंगलुरु एयरपोर्ट पर मुझे एक विज्ञापन चौंकाता है। हां जी अब लगातार जाम झेलने वाले बंगलुरु शहर में एयरपोर्ट पहुंचने के लिए हेलीटैक्सी सेवा का संचालन शुरू हो चुका है। आईटी सिटी से एयरपोर्ट की हेलीटैक्सी सेवा का किराया 2500 रुपये है। अगर सड़क मार्ग से आएं तो जाम में तीन घंटे लग सकते हैं। इसलिए ये सेवा चल रही है। इसमें 8 सीट वाले हेलीकाप्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका विज्ञापन बता रहा है कि यह आईटी सिटी से एयरपोर्ट 15 मिनट में पहुंचा देती है। मेरे एक दोस्त बताते हैं कि यह सेवा आईटी प्रोफेशनल के बीच लोकप्रिय भी हो रही है। अभी इस तरह की सेवा किसी दूसरे महानगर में नहीं शुरू हुई है।

बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद नंदिनी के स्टाल से मैसूर पाक लेना नहीं भूला। नंदिनी का यह स्टाल एयरपोर्ट के बाहर ही है। यहां नंदिनी के सारे प्रोडक्ट बाजार भाव पर ही मिलते हैं। पर एक बार एयरपोर्ट के अंदर पहुंच गए तो दूसरे ब्रांड की इन्ही मिठाइयों के दाम चार गुने हो जाते हैं। नंदिनी कर्नाटक सरकार का ब्रांड है। इसकी मिठाइयां अच्छी होती हैं।


दिल्ली की उड़ान -  मेरी दिल्ली की उड़ान इंडिगो से 22.10 बजे है। वक्त से पहले एयरपोर्ट में प्रवेश कर गया हूं। दो घंटे इधर उधर घूम कर टाइम पास कर रहा हूं। तय समय पर विमान में दाखिल हुआ। ईद के कारण विमान में दिल्ली जाने वाले श्रमिक वर्ग के लोग बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं जो गठरियां लेकर विमान में बेतकल्लुफ होकर सवार हुए हैं।पहले से ही इतनी गठरियांं रख दी हैंं कि मेेेेरे बैैग को रखने के लिए केबिन लगेज बाक्स में जगह नहीं मिली। तो अपना बैग सीट के नीचे रखकर मैं बैठ गया।
विमान के पायलट कैप्टन दलजीत सिंह हैं और सह पायलट हैं निहारिका। सुरक्षा एनाउनंसमेंट सुनने के बाद मैं विमान में अपनी सीट पर सो गया। इंडिगो विमान की रात के 1.05 बजे टी-2 पर लैंडिंग के साथ मेरी नींद खुली। इतनी रात गए घर कैसे जाऊं। तो कुछ घंटे हमने एराइवल की लांज में ही गुजारे फिर घर जाने के लिए कश्मीरी गेट जाने वाली एसी बस में बैठ गया। दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो रात 11 बजे बंद हो जाती है। पर एयरपोर्ट के टी3, टी2 और टी1 से होती हुई वाया धौलाकुआं, नई दिल्ली स्टेशन, कश्मीरी गेट के लिए डीटीसी की एसी बस सारी रात हर आधे घंटे पर चलती रहती है।  
... तो दक्षिण की एक और यात्रा पूरी हुई - यात्रा मार्ग था - दिल्ली से हैदराबाद, भुवनगिरी, नालगोंडा, नागार्जुन सागर, हैदराबाद, बीदर, बसव कल्याण, कालबुर्गी, चेन्नई, त्रिची, तंजौर, डिंडिगुल, कोडाईकनाल, पलनी, त्रिपुर, अविनाशी, सत्यमंगलम, मैसूर, कुशलनगर, मडिकेरी, बेलुर, बेंगलुरु, दिल्ली...
कभी ख्वाबों में कभी तेरे दर पे तो कभी दर बदर
ए गमे जिंदगी तुझे ढूंढते हुए हम कहां भटक गए...

-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyut@daanapaani.net
(BELUR, PATALESHWAR TEMPLE, BENGLURU AIRPORT, HELITAXI SERVICE, INDIGO, DELHI T2 ) 
मध्य रात्रि मे दिल्ली के टी - 2 पर वापसी...