Wednesday, November 21, 2018

बेलूर का चन्न केशव मंदिर : होयसल राजाओं की अनुपम कृति

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कर्नाटक का हासन शहर जिला मुख्यालय है। इसका नाम हासन हासनंबा मंदिर के नाम पर पड़ा है। बेंगलुरु से हासन की दूरी 183 किलोमीटर है। यह शहर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगोडा की राजनीति का केंद्र रहा है। हासन का बस स्टैंड काफी शानदार बना है। मुख्य सड़क और बस स्टैंड के भवन के बीच काफी खाली जगह छोड़ी गई है। स्टेशन भवन काफी बड़ा और सुविधाजनक है। कुल 92 हजार वर्ग फीट बना बस स्टैंड जून 2017 में 32 करोड़ की लागात से तैयार हुआ है। 
बस स्टैंड में कैफे कॉफी डे का कॉफी स्टॉल है। यहां महज 10 रुपये की कॉफी है। हल्की बारिश में कॉफी पीना बड़ा भला प्रतीत होता है। मुझे अब बस लेनी है बेलुर की। बेलुर यहां 35 किलोमीटर है। चिकमंगलुर जाने वाली बस बेलुर जाएगी। मैं उसमें बैठ गया। हरे भरे रास्ते से सरपट भागती हुई बस ने 40 मिनट से बेलुर पहुंचा दिया। बेलुर बस स्टैंड में भी हल्की बारिश हो रही है। बस स्टैंड के अंदर भी कॉफी के पौधों में फूल लगे हैं। मैं चन्न केशव मंदिर का रास्ता पूछ कर पैदल ही आगे बढ़ जाता हूं।

बारहवीं सदी का है चन्न केशव मंदिर – 
बेलुर कर्नाटक की कला और शिल्प की नगरी है। यह मुख्य रुप से चन्न केशव मंदिर के लिए जाना जाता है। होयसल राजाओं द्वारा बनवाया गया यह मंदिर काफी विशाल है। बेलुर का पुराना नाम बेलापुरी हुआ करता था जो अब बिगड़कर बेलुर हो गया है।

चन्न केशव यानी यह भगवान विष्णु का विशाल मंदिर है। होयसल वंशीय नरेश विष्णुवर्धन ने चन्न केशव मंदिर का निर्माण 1117 ईस्वी में करवाया था। मंदिर की कलाकत्मकता को देखकर लगता है कि यह मंदिर कई सालों में बनकर तैयार हुआ होगा। होयसल राजाओं ने बेलूर और हेलिबिड में कई भव्य मंदिरों का निर्माण कराया जो आज भी उसी शान से खड़े हैं। 


चन्न केशव मन्दिर को, जो स्थापत्य एवं मूर्तिकला की दृष्टि से देश के सर्वोत्तम मन्दिरों में गिना जाता है। यह मन्दिर 178 फुट लम्बा और 156 फुट चौड़ा है। परकोटे में तीन प्रवेश द्वार हैं। इनमें सुन्दिर मूर्तिकारी की गई है। इसमें कई प्रकार की मूर्तियां जैसे हाथी, पौराणिक जीव-जन्तु, मालाएं, स्त्रियां के चित्र आदि उत्कीर्ण किए गए हैं।
चन्न केशव मंदिर नक्षत्र की आकृति का है। इसका प्रवेश द्वार पूर्वाभिमुख है। मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर एक चतुष्कोण मंडप में आप पहुंच जाते है। वह मंडप खुला हुआ है। मुख्य मंदिर में भगवान की मूर्ति लगभग 7 फीट ऊंची है। इसकी चार भुजाए हैं। उनके साथ उनके दाहिने भूदेवी और बायें में लक्ष्मी देवी हैं। भगवान के हाथ में शंख, चक्र, गदा और पद्म दिखाई देते हैं।

यह मंदिर मुसलमान शासकों द्वारा कई बार लूटा गया। पर बार बार  हिन्दू राजाओं ने इसका जीर्णोद्वार भी करवाया। बताया जाता है कि मुख्य मंदिर के ऊपर एक विशाल गुंबद हुआ करता था जो निर्माण के 200 साल अंदर ही ध्वंस हो गया। फिर भी मंदिर के गर्भ गृह की भव्यता देखने लायक है। इसकी दीवारों पर अनगिनत मूर्तियां उकेरी गई हैं।

मंदिर के बायीं तरफ सौम्य नायिकी ( महालक्ष्मी) का विशाल मंदिर स्थित है। वही श्री विष्णु मंदिर के दाहिनी तरफ रंग नायिकी का मंदिर स्थित है। मुख्य मंदिर के पीछे विशाल यज्ञ मंडप है। मंदिर के चारदीवारी के अंदर की ओर विशाल गलियारा है। इन गलियारों में भी मूर्तियों का निर्माण हुआ है।
चन्न केशव मंदिर भारत सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन है। मंदिर के पास लगेज और जूते आदि रखने का इंतजाम है। मंदिर सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है।

कैसे पहुंचे – बेलुर बस स्टैंड से चन्न केशव मंदिर की दूरी एक किलोमीटर है। पैदल या फिर आटो रिक्शा से मंदिर पहुंचा जा सकता है। श्रवण बेलगोला आने वाले तीर्थ यात्री अक्सर बेलुर भी पहुंचते हैं।
--- विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyut@daanapaani.net
(BELUR, BELAPURI, CHAN KESHWA TEMPLE )
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