Saturday, November 3, 2018

हर पल रुमानी है कुर्ग का मौसम

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कुर्ग कर्नाटक का स्वर्ग है। केरल से भौगोलिक तौर पर लगे होने के कारण सालों भर यहां मौसम रूमानी रहता है। मैं खुद से पूछ रहा हूं कि मैंने यहां आने में इतनी देर क्यों कर दी। मडिकेरी शहर समुद्र तल से 1525 मीटर की ऊंचाई पर है। यानी इसकी ऊंचाई मुन्नार के ही आसपास है। पर ऊटी और कोडाईकनाल से कम है। पर इसे हिल स्टेशन की श्रेणी में ही रखा जाएगा।

मडिकेरी का मौसम सालों भर मुन्नार की तरह ही रुमानी है। कुर्ग उन स्थलों में है जहां आप सेहत लाभ के लिए कुछ दिन रहने की योजना बना सकते हैं। इसके लिए मडिकेरी और कुशलनगर के आसपास तमाम होम स्टे आपका स्वागत करते हैं। कई होम स्टे ऐसे हैं जो कॉफी बगान के बीच स्थित हैं। मई को छोड़कर बाकी के 11 महीने कुर्ग की तरफ आने के लिए बेहतर है।  

क्या क्या देखें – मडिकेरी या फिर कुशलनगर में रुक कर आप पूरे कुर्ग इलाके का नजारा कर सकते हैं। बेहतर होगा मडिकेरी में ही रुके। मडिकेरी शहर में आप राजा सीट (व्यू प्वाइंट ) के अलावा राजा की समाधि देख सकते हैं। इतिहास में रूचि है तो मडिकेरी फोर्ट देखें यह शहर के अंदर ही है। फोर्ट के अंदर संग्रहालय है। शहर से 9 किलोमीटर आगे अब्बे फाल्स नामक सुंदर झरना है। आप कावेरी के उदगम स्थल को भी देखने जा सकते हैं जो मडिकेरी शहर से 40 किलोमीटर की दूरी पर है। हालांकि मैं वहां नहीं जा सका, ज्यादा बारिश होने पर वहां जाने का रास्ता बंद हो जाता है। मडिकेरी शहर के अंदर ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं।

कुशलनगर से आगे आप कावेरी निःसर्ग धाम जाकर कुछ घंटे गुजार सकते हैं। कुशलनगर के पास ही गोल्डेन टेंपल नाम से मशहूर विशाल बौद्ध मंदिर भी है। इसके अलावा मडिकेरी में कॉफी के विशाल उद्यान देखे जा सकते हैं। बाजार से कॉफी के विभिन्न किस्म की शॉपिंग की जा सकती है। अगर आप मदिरा पीने के शौकीन हैं, तो कुर्ग की बनी होम मेड वाइन का आनंद ले सकते हैं। यह अलग अलग तरह के कई स्वाद में बिकती है। कुर्ग के इतने सारे रंग हैं कि आपको निराशा नहीं होगी।

कैसे पहुंचे – कुर्ग पहुंचने के लिए बेहतर है कि आप बेंगलुरु से मडिकेरी के लिए सीधी बस लें। बेंगलुरू से रात्रि सेवा की बस से चलकर सुबह सुबह मडिकेरी पहुंचा जा सकता है। वैसे निकटम रेलवे स्टेशन मैसूर है। मैसूर से भी मडिकेरी के लिए नियमित बस सेवा है। मडिकेरी की खासियत है कि यहां तक पहुंचने के रास्ते में तेज चढ़ाई वाली सड़क नहीं आती। तीखे मोड़ नहीं आते। सालों भर सफर करने योग्य ऑल वेदर रोड है। आप बेंगलुरु से बाइक या अपनी निजी गाड़ी से भी यहां पहुंच सकते हैं।

बड़ी संख्या में बेंगुलुरू के लोग कुर्ग में वीकेंड डेस्टिनेशन के तौर पर आते हैं। शनिवार की रात को बेंगलुरु से चलकर रविवार की सुबह पहुंचना, दिन भर कुर्ग में घूमना और रात्रि में फिर वापस बेंगलुरु की राह पकड़ लेना। पर कुर्ग का आनंद लेने के लिए यहां रुकना जरूरी है।  ( आगे पढ़िए - कुर्ग मतलब कॉफी...और क्या ....) 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
(COORG, KODAGU, MADIKERI, KARNATKA  )