Saturday, November 17, 2018

कोडागू का इतिहास बयां करता – मडिकेरी फोर्ट

मडिकेरी शहर में हैं तो मडिकेरी फोर्ट देखना न भूलें।  सुंदर व्यवस्थित किला कोडागू क्षेत्र का इतिहास बताता है। किला बस स्टैंड से एक फर्लांग पहले शहर के मध्य में स्थित है। एक किलोमीटर की परिधि में फैले इस किले की बाउंड्री काफी ऊंची है। चारदीवारी इतनी बेहतर हाल में हैं कि मैं इस पर चढ़ककर किले का पूरा चक्कर लगा गया।

किले के प्रवेश द्वार पर गणपति का एक मंदिर है। इसका नाम कोटे महागणपति मंदिर है। मंदिर में दर्शन के बाद आगे बढ़ने पर किले का मुख्य द्वार है। किले के मुख्य  भवन में आजकल जिला पंचायत का दफ्तर संचालित किया जा रहा है। हालांकि कर्नाटक सरकार का पुरातत्व विभाग चाहता है कि जिला प्रशासन किले के भवन को खाली कर दे जिससे किले के संग्रहालय को भव्य रूप दिया जा सके हैं। पर भी ऐसा नहीं किया जा सका है। किले के परिसर में दो विशाल हाथियों की प्रतिमाएं लगी हैं। किला दिन भर सैलानियों से गुलजार रहता है। इसमें प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है।

मडिकेरी किले का निर्माण 17वीं सदी के उत्तरार्ध में राजा मृदुराजा ने बनवाया था। बाद में इस किले में टीपू सुल्तान ने भी निर्माण कराया। 1790 में इसमें कुछ निर्माण के बाद टीपू ने इसका नाम दिया था जाफराबाद। इसके बाद किला एक बार फिर डोडा वीर राजेंद्र के कब्जे  में आ गया। साल 1812-1814 के बीच लिंगा राजेंद्र ने भी किले में कुछ निर्माण कराया। पर 1834 में यह किला अंग्रेजों के अधीन हो गया।

मडिकेरी के किले में देखने के लिए सबसे खास इसका संग्रहालय है। ये म्युजियम वास्तव में एक चर्च के भवन में संचालित हो रहा है। सेंट मार्क्स चर्च का निर्माण 1855 में इस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कराया गया था। गोथक शैली में बने इस चर्च का निर्माण एक मंदिर की जगह पर किया गया था। देश आजाद होने के बाद इस चर्च को बंद कर दिया गया। किला कर्नाटक सरकार के अधीन है। अब चर्च में राजकीय संग्रहालय है। हालांकि म्युजियम बहुत बड़ा नहीं है। पर इसमें संग्रह काफी बेहतरीन है। 

संग्रहालय में टीपू सुल्तान के कार्यकाल के दौरान के हथियारों का संग्रह देखा जा सकता है। इसके अंदर कुर्ग के वीर सपूत केएम करिअप्पा से जुड़ा हुआ संग्रह भी देखा जा सकता है। संग्रहालय में कोडागू क्षेत्र से प्राप्त कुछ सुंदर देवी-देवताों की मूर्तियां भी देखी जा सकती हैं। यहां उमा महेश्वर, जैन तीर्थंकरों की प्रतिमा, 15वीं सदी की बुद्ध प्रतिमा, कामाक्षी की प्रतिमा, शाही पुरुष और स्त्री की प्रतिमा देखी जा सकती है। इस छोटे से दायरे में आप कुछ सुंदर ग्लास पेटिंग भी देख सकते हैं।
संग्रहालय के लॉन में शिव लिंगम और नंदी की प्रतिमा। 

मडिकेरी किले के इस संग्रहालय के बाहर कई नायाब मूर्तियां और संग्रह यूं बाहर खुले में रखी हुई हैं। इनमें एक शिवलिंगम और एक नंदी की प्रतिमा है। राम सीता की मूर्तियां और कुछ और मूर्तियां लॉन में यूंही पड़ी हुई हैं। यह देखकर प्रतीत होता है कि हम अपनी विरासत की कद्र करना नहीं जानते।

खुलने का समय – मडिकेरी का किला सुबह 10 बजे से शाम 5.30 बजे तक खुला रहता है। इसमें प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है। किले में घूमने के लिए दो घंटे का समय रखिए।

(MADIKERI FORT, COORG, KARNATKA ) 
      विद्युत प्रकाश मौर्य
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