Monday, November 12, 2018

जिन पर नाज है कुर्ग को... फील्ड मार्शल करिअप्पा, जनरल थिमैया

कर्नाटक का कुर्ग वीरों की धरती है। देश के लिए अपनी जीवन देने वाले बहादुरों की धरती है। हमेशा से बड़ी संख्या में कुर्ग से लोग फौज में गए हैं। इनमें से कई तो उच्च पदों तक पहुंच कर कुर्ग का नाम रोशन किया। इन वीरों की प्रतिमा मडिकेरी और कुशलनगर के चौराहों पर लगी है।

सबसे पहले नाम लें फील्ड मार्शल के एम करिअप्पा का। कोडेंद्रा मडप्पा करिअप्पा का जन्म 28 जनवरी 1899 को हुआ था। कुशल नगर के चौराहे पर उनकी प्रतिमा लगी है। उनके पिता मडिकेरी में राजस्व अधिकारी थे। उनकी स्कूली पढ़ाई मडिकेरी के सेंट्रल हाई स्कूल में हुई थी। 15 मई 1993 को  करिअपप्पा का इंतकाल 94 साल की उम्र में बेंगलुरु में हुआ। करिअप्पा 1919 में इंडियन आर्मी में आफिसर के तौर पर कमिशन हुए थे। करिअप्पा आजाद भारत के सेना के पहले प्रमुख थे। वे 15 जनवरी 1949 में भारतीय सेना के कमांडर इन चीफ चुने गए। फील्ड मार्शल बनने वाले वे एकमात्र आर्मी चीफ रहे हैं। 

भारतीय सेना में सैम मानेक शॉ और करिअप्पा को ही फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई है। रिटायरमेंट के बाद 1953 से 1965 तक करिअप्पा आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के हाईकमिशनर भी रहे। अवकाश प्राप्ति के बाद फील्ड मार्शल करिअप्पा मडिकेरी में आकर रहने लगे। उनके बेटे केसी करिअप्पा भी सेना में भर्ती हुए थे और एयर मार्शल बने। 1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने काफी बहादुरी दिखाई थी। अवकाश प्राप्ति के बाद वे भी मडिकेरी में ही रहते हैं। 2007 में एयर मार्शल केसी करिअप्पा ने अपने पिता की एक जीवनी भी लिखी है।

आइए बात करते हैं जनरल थिमैया का। मडिकेरी के ओंकारेश्वर मंदिर के बगल में बच्चों का बड़ा स्कूल है। उसका नाम जनरल थिमैया पब्लिक स्कूल है। जनरल केएस थिमैया यानी कोडन्डेरा सुबैया थिमैया 08 मई 1957 से 07 मई 1961 तक भारत के थल सेनाध्यक्ष थे। वे 1926 में सेना में भर्ती हुए थे। जनरल थिमैया की बहादुरी और उनकी प्रशासकीय सेवा क्षेत्र में दक्षता को देखते हुए उन्हें पद्म भूषण से 1954 में सम्मानित किया गया। वे कर्नाटक के कोडागू क्षेत्र के वीर सपूत थे। उनका जन्म 30 मार्च 1906 को मडिकेरी में हुआ था।


जनरल थिमैया कुर्ग के सम्मानित कॉफी की खेती करने वाले परिवार से आते थे। उनके मामा जी सीबी पोनप्पा भी भारतीय सेना में भर्ती होने वाले पहले बैच के अधिकारियों में शामिल थे। आठ साल की उम्र में जनरल थिमैया को सेंट जोसेफ कालेज कन्नूर में पढ़ने के लिए भेजा गया था। जनरल थिमैया भारतीय सेना से अवकाश प्राप्ति के बाद 1964 में यूनाइटेड नेशंस पीस किपिंग फोर्स में अपनी सेवाएं देने साइप्रस चले गए। 18 दिसंबर 1965 को साइप्रस में उनका निधन हो गया। मडिकेरी के एक चौराहे पर उनकी विशाल प्रतिमा लगी है। कुर्ग के लोग जनरल थिमैया और करिअप्पा पर गर्व करते हैं।


हम भूल न जाएं उनको - वीर सपूत मेजर मांगरिया मुथन्ना-
मडिकेरी के एक चौराहे पर वीर सपूत मेजर मांगरिया मुथन्ना की प्रतिमा लगी है। मेजर मांगरिया मुथन्ना का जन्म कुर्ग के चेट्टामणि गांव  में 21 अप्रैल 1964 को हुआ था। साल 1984 में सिख लाइट इन्फेंट्री में आफिसर बने।  12 जनवरी 2000 को जम्मू कश्मीर के खानबल में उग्रवादियों से लोहा लेते हुए वे बुरी तरह घायल हो गए। बाद में वे शहीद हो गए। भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
(MADIKERI, COORG, ARMY, AIR FORCE, CARIAPPA, GEN THIMAYYA )