Sunday, October 7, 2018

कोडाईकनाल - चीड़ के जंगलों में ...मेरा दिल भी कितना पागल है...

मैंने पहले भी लिखा था कि कोडाईकनाल घूमने के लिए एक या दो दिन काफी नहीं है। तो जब यहां आने का कार्यक्रम बनाएं तो कम से कम चार दिनों का तो बनाएं ही। अब सवाल उठता है कोडाईकनाल में क्या देखें और कैसे देखें। तो जनाब पहाड़ों पर रिलैक्स होने आते हैं। प्रकृति का आनंद लेने आते हैं तो आराम आराम से घूमिए न। जल्दी किस बात की है।
वैसे तो किसी भी जगह घूमने के लिए टैक्सी बुक करने का विकल्प रहता है। पर कोडाई कनाल में आप मिनी बसों को बुक करके शेयरिंग तरीके से पैकेज टूर में घूम सकते हैं। यह घूमने का किफायती तरीका हो सकता है।

कोडाईकनाल के बस स्टैंड में ही कई टूर आपरेटर के बुकिंग दफ्तर हैं। और स्थानीय भ्रमण कराने वाली बसें भी यहीं से शुरू होती हैं। कोडाई और आसपास घूमने के लिए पैकेज कई तरह के हैं। ज्यादातर पैकेज आधे दिन के हैं।
 अलग अलग टूर आपरेटरों के ब्रोशर में पांच तरह के पैकेज दिखाई देते हैं। पर इनमें सबसे लोकप्रिय पैकेज है जिसका नाम वीआईपी फारेस्ट टूर है। इसमें अपर लेक व्यू, पाइन फारेस्ट, मोयर्स प्वाइंट, डेविल्स किचेन (गुना केव) , ला स्लथ चर्च, फोर पिलर रॉक, गोल्फ कोर्स,  500 साल पुराना पेड़ , फेयरी फाल्स आदि शामिल है। इस पैकेज के 250 रुपये जमा करके हमने अगले दिन के लिए बुकिंग करा ली है।

टूर ऑपरेटर ने हमें सुबह नौ बजे का समय दे रखा है। पर अपनी आदत के मुताबिक मैं घूमने के लिए सुबह सुबह जग गया हूं। मार्निंग वॉक के दौरान देखा रोटरी क्लब के लोग एक जागरूकता रैली निकाल रहे हैं। वे लोग तमिलनाडु के अलग अलग जिलों के रोटरी क्लब के अधिकारी हैं। इनका कोडाई में तीन दिनों का सम्मेलन चल रहा है। मैं रैली में उनके साथ थोड़ी देर चला। इस दौरान कोयंबटूर के रोटरियन लक्ष्मी नारायण से मेरी बात हुई। उन्होंने अपने अभियान के बारे में बताया। इसके बाद मैं दुबारा लेक पर चला गया। सुबह सुबह एक बार फिर किराये पर लेकर साइकिल चलाई।
अपर लेक व्यू से झील का नजारा। 

नौ बजे एसके एम टूर एंड ट्रैवल्स के दफ्तर पहुंच गया। पर काफी इंतजार के बाद साढ़े दस बजे बस चली। यह  बस 18 सीटों वाली है। ज्यादातर टूर ऑपरेटर की बसें ऐसी ही हैं। इसमें एक गाइड भी है जो तमिल, अंग्रेजी और हिंदी में बोलता है।
हमारा पहला प्वाइंट है अपर लेक व्यू। यह कोडाई की ऊंची जगह है जहां से झील का विहंगम नजारा दिखाई देता है। यहां गाइड ने हमें लेमन ग्रास की पत्तियां दिखाई। उससे भीनी सी खुशबू आती है। यहां पंद्रह मिनट रुकने के बाद हमलोग अगले पड़ाव पर बढ़ चले।

कुछ किलोमीटर चलने के बाद हम जंगल में प्रवेश कर चुके हैं। चीड़ के जंगल। अत्यंत लंबे चीड़ के पेड़। ऊंचाइयां और ढलानें। रंग बिरंगे लोगों की खूब भीड़ है। पर इन जंगलों को देखकर कुछ याद आने लगा.. मेरा दिल भी कितना पागल है..ये प्यार तो तुमसे करता है। हां संजय दत्त और माधुरी दीक्षित याद आए फिल्म साजन के। उस गाने की शूटिंग इन्ही चीड़ के जंगलों में तो हुई थी।


कुछ लोग यहां घुड़सवारी का आनंद ले रहे हैं। तो अलग अलग पोज खूब सारी तस्वीरे खिंचवा कर यादों को समेट लेना चाहते हैं डिजिटल बैंक में। इन चीड़  के जंगलों में हिंदी फिल्म राजा हिंदुस्तानी की भी शूटिंग हुई थी। वहीं मणिरत्नन बांबे फिल्म के भी कुछ नजारे यहां फिल्माए थे। 

( KODAI KANAL, FOREST, FILM SAJAN, RAJA HINDUSTANI,  TAMILNADU, HILL STATION ) 
-      विद्युत प्रकाश मौर्य

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