Thursday, November 1, 2018

मैसूर से सुहाने देस कुर्ग की ओर

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मैसूर के होटल से चेकआउट करके बस स्टैंड में आ चुका हूं। जून के महीने में भी यहां हल्की सी ठंड है, इसलिए एक कप चाय पी है। सुबह 7.50 बजे मडिकेरी जाने वाली बस में बैठ गया हूं। बस स्टैंड में बस तो खाली है। पर मैसूर शहर से बाहर निकलते हुए रास्ते में काफी लोग बस में बैठते चले गए और बस भर गई। बस चामराज डबल रोड, कर्नाटक स्टेट ओपन यूनीवर्सिटी, मानस गंगोत्री होते हुए शहर के बाहर हुनसूर रोड पर पहुंच गई है। अब बस एनएच 275 पर दौड़ रही है। रास्ते में बेलाविडी इंडस्ट्रियल एरिया आया। यहां पर हमें किलोर्स्कर कंपनी का प्लांट नजर आया।

सुबह 9.10 बजे हम हुनसुर शहर पहुंच गए हैंं। यहां बस कुछ मिनट के लिए बस स्टैंड में गई। फिर आगे बढ़ चली। यहां से मडिकेरी 74 किलोमीटर रह गया है। रास्ते में मेरी बायीं तरफ तंबाकू के खेत दिखाई दे रहे हैं। मैंने बचपन मे बिहार मे वैशाली जिले में तंबाकू फसल खूब देखी तो पहचान गया। हमारे सहयात्री ने बताया कि यहां तंबाकू की खेती बड़े पैमाने पर होती है। हम पेरिया पटना पहुंच गए हैं। यह मैसूर जिले का ही कस्बा है। कर्नाटक में भी कई पटना हैं। श्रवणबेलगोला के पास चेनेराय पटना है। पेरिया पटना में भी बस स्टैंड में जाकर कुछ मिनट के लिए रुकी और चल पड़ी। अब बस कुर्ग जिले में प्रवेश कर गई है।

कुशल नगर बस स्टाप पर अपनी बस के साथ। 
अब हम पहुंच गए हैं कुशलनगर। यह कोडागू (कुर्ग ) जिले का सुंदर शहर है। शहर से पहले कावेरी नदी का पुल आया। 
कुशलनगर में बस 10 मिनट रुकी। इसके बाद आगे बढ चली। पर कुशलनगर में 90 फीसदी बस खाली हो गई। मडिकेरी तक जाने वाली कुछ ही सवारियां रह गई हैं। अब हल्की बारिश के साथ मौसम सुहाना होने लगा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है हम किसी सुहाने देस में प्रवेश कर रहे हैं। हम थोड़ी ऊंचाई पर चढ रहे हैं। सड़क के दोनों तरफ कॉफी के बाग झूमते नजर आ रहे हैं। मौसम की रुमानियत बढ़ने लगी है। कुर्ग या कोडागू कर्नाटक का अत्यंत खुशनुमा इलाका है। मैं कई बार कर्नाटक आ चुका हूं। पर कुर्ग पहली बार जा रहा हूं। कुशल नगर से मडिकेरी 31 किलोमीटर की दूरी पर है। हालांकि कुर्ग की सैर करने आने वाली काफी लोग कुशलनगर में भी रुकते हैं। कुशलनगर में कई वेज रेस्टोरेंट के बोर्ड नजर आते हैं। कुशल नगर से मडिकेरी के रास्ते में कई होम स्टे के बोर्ड नजर आने लगे हैं।
बस से सुंदर नजारे देखते हुए मेरे मन में तुकबंदी फूट पड़ती है-

कुर्ग जहां बादलों का बसेरा है
हरीतिमा ने डाला अपना डेरा है
हर शाम अनूठी है यहां की
मनमोहक हर सवेरा है...

अगला कस्बा है सुनीतकोप्पा। यहां से मडिकेरी की दूरी 15 किलोमीटर रह गई है। हमारी बायीं और दाहिनी तरफ कॉफी के जंगल दिखाई दे रहे हैं। सड़क के किनारे कॉफी कंपनियों के विशाल बोर्ड दिखाई दे रहे हैं। वे कुर्ग की कॉफी के सच्चे स्वाद की बात कर रहे हैं। और अब हम मडिकेरी शहर में प्रवेश कर चुके हैं। मैं बस स्टैंड में आकर उतर गया। स्थानीय लोगों से होटल का रास्ता पूछा।
कोहिनूर रोड पास में ही है। वहीं स्टेट बैंक के पास होटल फोर्ट व्यू में अगले तीन दिन मेरा आशियाना है। होटल किफायती है और बस स्टैंड के पास भी है। होटल के केयर टेकर जुबैर हैं। इस होटल में कुल 30 कमरे हैं। मेरा कमरा दूसरी मंजिल पर है। अपना सामान कमरे में रखने के बाद मैं बाहर निकल पड़ा। होटल के बगल में ही एक टी स्टाल में नास्ता लिया। लेमन राइस विद कोरमा एंड चटनी। अब चलते हैं आगे। ( बने रहिए दानापानी के साथ ....अगले कुछ दिन कुर्ग को निकटता से महसूस करेंगे ) 

-       -      विद्युत प्रकाश मौर्य

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