Tuesday, October 30, 2018

यहां बनती है मतदान के दौरान उंगली पर लगने वाली स्याही

जब चुनाव के दौरान वोट डालने जाते हैं तो आपकी उंगलियों पर स्याही लगा दी जाती है। ये स्याही आम स्याही से अलग होती है। यानी अमिट होती है। कई बार साफ करते करते महीनों बाद ही इस स्याही का दाग जाता है। पर आपको पता है कि ये स्याही बनती कहां है। तो जवाब है मैसूर में।
सुबह सुबह मैसूर शहर के चंद्रगुप्त रोड पर टहलते हुए मेरी मुलाकात नटराजन से होती है। वे मैसूर पेंट्स में नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया कि हमारी कंपनी चुनाव में उंगलियों ने निशान लगाए जाने वाले अमिट स्याही का निर्माण करती है। मैसूर पेंट एंड वार्निस लिमिटेड मैसूर कर्नाटक राज्य सरकार के स्वामीत्व वाली कंपनी है। इस साल मैसूर पेंट्स ने इंडोनेशिया को स्याही का एक्सपोर्ट किया। वहां से कुल 120 करोड़ का कारोबार किया है। वहां भी चुनावों में इस अमिट स्याही का इस्तेमाल किया गया। अच्छे कारोबार के बाद इस साल कंपनी ने कर्मचारियों को शानदार बोनस दिया है। कंपनी के एक कर्मचारी आरवाई नटराज मिले मुझे मैसूर में वे बड़े शान से अपनी कंपनी के बारे में बता रहे हैं।

कंपनी के प्रबंध निदेशक चंद्रशेखर दादामनी हैं। इसका प्लांट मैसूर में बनीमंडप एक्सटेंशन में है। कंपनी बृंदाबन ब्रांड नाम से पेंट भी बनाती है। इसके पेंट के ग्राहक कर्नाटक रोडवेज से लेकर तमाम नामचीन कंपनियां भी हैं। कर्नाटक सरकार की यह कंपनी लगातार कई सालों से फायदे में चल रही है।
मैसूर पेंट्स कंपनी डाक की मुहर वाली स्याही भी बनाती है। पूरे देश के डाकघरों में डाक टिकटों पर मुहर लगाने के लिए इसी स्याही का इस्तेमाल किया जाता है।
अंग्रेजी में इसे इंडेलेबल इंक कहते हैं जो लोकप्रिय तौर पर वोटर्स इंक के नाम से जाना जाता है। तो मैसूर पेंट्स द्वारा निर्मित यह स्याही ही 60 करोड से ज्यादा मतदाताओं की उंगलियों पर लगाई जाती है। इस स्याही की खासियत यही होती है कि यह उंगलियों पर लगाए जाने के 40 सेंकेड के अंदर ही सूख जाती है। सिर्फ भारत ही नहीं अब मैसूर पेंट्स दुनिया के तकरीबन 30 देशों को इस स्याही का निर्यात चुनाव के दौरान करती है।
कंपनी इसे 5 एमएल, 10 एमएल, 15 एमएल, 20 एमएल, 25 एमएल, 40 एमएल, 60 एमएल, 70 एमएल, 80 एमएल और 100 एमएल के साइज में बनाती है। इसमें स्याही लगाने के लिए स्पाउंज, स्टीक, ब्रश, नोजल जैसे एप्लिकेशन के विकल्प दिए जाते हैं। इस स्याही में सिल्वर नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है। पर इस स्याही के बनाने का पूरा फार्मूला सेक्रेट है। इसलिए कोई दूसरी कंपनी ऐसी स्याही नहीं बनाती । मैसूर पेंट्स ने 1962 से चुनावी स्याही का निर्माण आरंभ किया था। तभी से वह भारत के चुनाव आयोग को स्याही की सप्लाई कर रहा है।

वैसे कंपनी की बात करें तो मैसूर पेंट्स की स्थापना नलवाडी कृष्णराज वाडियार ने 1937 में पेंट कंपनी की स्थापना की थी। तब इसका नाम मैसूर लैक्स एंड पेंट्स हुआ करता था। अब कंपनी भारत के बाहर थाईलैंड, सिंगापुर, नाइजरिया, मलेशिया, कंबोडिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों को चुनावी स्याही सप्लाई कर रही है।

साल 2016-17 की बात करें तो कंपनी ने 6.18 करोड़ का मुनाफा कमाया। अगर चुनावी साल हो तो कंपनी का कारोबार दुगुना हो जाता है। कंपनी के कुल राजस्व का 40 से 60 फीसदी तक वोटर्स इंक से ही आता है। कंपनी का निर्माण परिसर मैसूर में 16 एकड़ के हरे भरे परिसर में बना हुआ है। इसका भवन भी अब हेरिटेड बिल्डिंग की सूची में शामिल हो चुका है। कंपनी की वेबसाइट -  https://mysorepaints.com/

-  विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
( INDELIBLE INK, MAYSORE, ELECTION )