Friday, October 26, 2018

पुंजुर के जंगल में चाय पकौड़ा और मैसूर की सुहानी सुबह

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सत्यमंगलम के जंगलों को पार करके हम तमिलनाडु के इरोड जिले के गोबी को पार कर चुके हैं। रात गहराने लगी है। इसके बाद हालानासूर, ओंगालवाडी, कारापापलम जैसे ग्रामीण इलाके आए। जंगल में जगह जगह लिखा है- नो पार्किंग जोन। जानवरों के कारण पार्किंग से रोक है। हमारी बस अब कर्नाटक की सीमा में प्रवेश कर चुकी है।



हमलोग पुंजुर पहुंच गए हैं। यहां सड़क के बायीं तरफ एक ढाबा है नाम है होटल आल्विन, जहां पर बस रुक गई है। रात के खाने के लिए। अभी आठ ही बजे हैं, इसलिए मैंने तय किया है कि मैसूर पहुंचकर ही खाऊंगा। वैसे पुंजुर के ढाबे की खाने पीने की दरें वाजिब हैं। होटल आल्विन के आसपास वन क्षेत्र है। वातावरण बड़ा मनोरम है। अगर हल्का फुल्का खाना है तो बाहर एक कैंटीन भी है जिसमें पकौड़े भी मिल रहे हैं। जंगल में मंगल। चाय पकौड़ा लेने में क्या हर्ज है। आधे घंटे रुकने के बाद बस चल पड़ी। मैं समझ रहा था आगे गुंटलपेट आएगा। ऊटी से मैसूर के रास्ते में आया था गुंडलपेट। पर ये बस दूसरे रास्ते से जा रही है। चामराज नगर होते हुए बस मैसूर शहर की सीमा में प्रवेश कर गई है।

रात के नौ बजे हैं। मैसूर शहर में तीसरी बार प्रवेश कर रहा हूं। 1992 फिर 2013 के बाद अब 2018 के जून महीने में। मैसूर में दो बस स्टैंड हैं। हमारी बस सिटी बस स्टैंड में रात 9.40 बजे पहुंच गई है। सिटी बस स्टैंड काफी व्यवस्थित है। यहां लगेज रुम का भी इंतजाम है। बस स्टैंड के कैंपस में भी आवासीय होटल हैं। रात के दस बजने वाले हैं तो होटल जाने से पहले सोचा खाना खाने के बाद ही आगे का उपक्रम किया जाए। मैसूर के सिटी बस स्टैंड का कैंपस साफ सुथरा है। यहां से सारी रात बसें आती जाती रहती हैं। अभी रात में भी मडिकेरी जाने वाली बसें मिल रही हैं। पर मुझे सुबह वाली बस लेनी है। बस स्टैंड में अच्छा रेस्टोरेंट है। कस्तूरी भवन प्योर वेज। यहां पर खाने पीने के तमाम विकल्प हैं। पर मैं कुछ हल्का फुल्का ही लेना चाहता हूं। तो यहां पर भी चपाती मिल गई 35 रुपये में दो बड़ी चपाती। साथ में सब्जी भी है।

तो खाने से निवृत होने के बाद मैं अपने होटल की ओर चल पड़ा। होटल भाग्यलक्ष्मी पैलेस लॉज को हमने गोआईबीबो डाट काम से बुक किया है। होटल की तलाश में मुझे थोड़ी दिक्कत आई। क्योंकि मिलते जुलते नाम के दो होटल हैं। हालांकि ये होटल बस स्टैंड की दीवार के ठीक पीछे वाली गली में लश्कर मुहल्ला में स्थित है। पर होटल की तलाश में मेरा आधा घंटा समय बर्बाद हुआ। दो गलत रास्तों में तलाशने के बाद सही जगह पहुंच सका। कई सालों में ऐसा पहली बार हुआ है। होटल पहुंचने पर उन्होंने में मुझे ग्राउंड फ्लोर पर एक छोटा सा डबल बेडरुम उपलब्ध कराया।

सुबह पांच बजे जगकर मैं मैसूर की सड़क पर टहलने के लिए निकल पड़ा। मैं मैसूर के चंद्रगुप्त रोड पर हूं। सामने सड़क पर गवर्नमेंट म्यूजियम दिखाई दिया। पर यह सुबह सुबह बंद है। इसी परिसर में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय स्थित है।
मैसूर शहर की सड़कें चौड़ी-चौड़ी हैं। इन सड़कों पर तांगे अभी भी दिखाई देते हैं। मैं मैसूर शहर के विशाल घंटाघर के पास पहुंच गया हूं। आगे चलने पर मैसूर पैलेस का प्रवेश द्वार दिखाई देता है। यहां पर सैकड़ों पक्षी कलरव कर रहे हैं । सुबह लोग उन्हे दाना डाल रहे हैं। तो इस सुहानी सुबह में कुछ फोटोग्राफर और सजे संवरे लोग किले की पृष्ठभूमि में फोटोग्राफी के लिए भी पहुंच गए हैं।
(MYSORE, KARNATKA, BUS STAND, PUNJUR, CHAMRAJNAGAR )   



 विद्युत प्रकाश मौर्य
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