Thursday, October 25, 2018

सत्यमंगलम के जंगल और वीरप्पन

अविनाशी में दोपहर का शानदार भोजन करने के बाद मैंने होटल के रिसेप्शन पर मौजूद मैनेजर से पूछा मैसूर जाने वाले बस पकड़ने के लिए कहां जाना उचित होगा। वापस त्रिपुर जाऊं या फिर कोयंबटूर। उन्होंने कहा कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आप यहां से सत्यमंगलम की बस लें। सत्यमंगलम में आपको त्रिपुर और कोयंबटूर दोनों जगह से आने वाली मैसूर की ओर जाने वाली बसें मिल जाएंगी। 


इरोड जिले के सत्यमंगलम शहर में ....
अविनाशी से त्रिपुर 15 किलोमीटर है तो कोयंबटूर, मेटुपालियम और सत्यमंगलम तीनों की दूरी 40 किलोमीटर ही है। तो मैं सत्यमंगलम जाने वाली बस में बैठ गया। किराया 26 रुपये। लगभग एक घंटे का सफर। सत्यमंगलम इरोड जिले का कस्बा है। इसे संक्षेप में सती कहते हैं। तमिलनाडु रोडवेज की हरी बस एनएच 381 पर सरपट आगे बढ़ रही है।


शाम 5.30 बजे सत्यमंगलम बस स्टैंड पहुंच गया हूं। पूछताछ पर जाकर मैसूर की बस के बारे में पूछा। उन्होंने मेरे अंग्रेजी में सवाल का हिंदी में जवाब दिया। बस 5.45 में आएगी। पर कर्नाटक रोडवेज की लाल बस 5.40 में ही आ गई।


 बस में ज्यादा लोग नहीं थे। मैं आगे की सीट पर जाकर बैठ गया , जिससे सामने का बेहतरीन नजारा दिखाई दे। बस चल पड़ी। अब हम एनएच 209 पर जा रहे हैं। कुल 13 किलोमीटर बाद आया बन्नारी। यहां देवी मंदिर के सामने बस रूकी। कुछ लोग उतर गए। कुछ नए लोग चढ़े।

बस आगे चल पड़ी। थोड़ी देर में घाट सेक्शन आरंभ हो गया। एक साइनबोर्ड आया। सत्यमंगलम टाइगर रिजर्ब में आपका स्वागत है। तो हम सत्यमंगलम के जंगल से गुजर रहे हैं। बस उंचाई पर चढ़ रही है और एक के बाद एक तीखे मोड़ आने लगते हैं। हेयर पिन बैंड। कुल 27 हेयरपिन बैंड। पर इस बार कोई उल्टी नहीं हुई। आराम से सभी बैंड गुजरते गए। इसके साथ ही हम काफी ऊंचाई पर आ चुके हैं। तमिलनाडु छूटता जा रहा है। और हम कर्नाटक के करीब आते जा रहे हैं।

थोड़ी बात सत्यमंगलम के जंगलों की। कभी तमिलनाडु के सत्यमंगलम के इन्ही जंगलों में छुपकर वीरप्पन अपने तस्करी के करोबार को चलता था। तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों ही शहरों में वह अपने पैर फैला चुका था। कहते हैं कि वीरप्पन ने अपने खजाने को कर्नाटक और तमिलनाडु के बॉर्डर पर पड़ने वाले सत्यमंगलम के घने जंगलों में गड्ढे खोदकर दबाया था। वैसे इस इलाके में पैसे जेवरात और अन्य कीमती चीजें जमीन में रखने का चलन भी काफी पुराना है।
वीरप्पन तमिलनाडु के सत्यमंगलम जंगल में छुपकर अपने तस्करी के कराेबार को चलता था. तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों ही शहरों में वह अपने पैर फैला चुका था। कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन पर कम-से-कम 100 हत्याओं और चंदन तस्करी के आरोप थे। वीरप्पन को मारने के लिए नियुक्त आईपीएस विजयकुमार ने बन्नारी अम्मान मंदिर में कसम खाई कि जब तक वीरप्पन को पकड़ नहीं लेते तब तक सिर के बाल नहीं मुड़वाएंगे।


 18 अक्टूबर 2004 को  अपने साथियों के साथ तमिलनाडु के धरमपुरी जंगल में हुए एनकाउंटर में वीरप्पन को मार दिया गया। विजय कुमार ने वीरप्पन पर एक किताब 'वीरप्पन चेजिंग द ब्रिगांड'  भी लिखी है। इसमें उन्होंने वीरप्पन के बचपन से लेकर डाकू बनने तक की कहानी भी बयान की है।
बन्नारी से गोबी तक लगातार चढ़ाई थी। गोबी जंगल के बीच छोटा सा गांव है। शाम ढलने लगी है ,पर सफर जारी है। तो अलविदा तमिलनाडु। फिर आना होगा।
--- ( SRI BANNARI MARIAMMAN TEMPLE, SATYAMANGLAM, ERODE, TAMILNADU, VIRAPPAN, CHANDAN )
विद्युत प्रकाश मौर्य

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1 comment:

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