Sunday, October 21, 2018

अविनाशी लिंगेश्वर मंदिर - दक्षिण की काशी

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तमिलनाडु के त्रिपुर के शहर के अविनाशी कस्बे में शिव का अविनाशी लिंगेश्वर मंदिर स्थित है। यह तमिलनाडु के प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। इस मंदिर का निर्माण सुंदर पंड्या द्वारा करवा गया था। वे दक्षिण के प्रसिद्ध शैव संत सुंदरमूर्ति नयनार के करीबी थे। अविनाशी मंदिर के शिलालेखों से पता चलता है कि चोल, पांड्य और होयसल राजाओं ने इस मंदिर के निर्माण में काफी योगदान किया। अविनाशी का शिव मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से संरक्षित इमारतों में शामिल है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1756 का बना हुआ है। इसके परिसर को मैसूर के राजा कृष्ण राज वाडियार ने उन्नत करवाने में योगदान किया। मंदिर का परिसर ढाई एकड़ में फैला हुआ है। इसके सात मंजिला मुख्य गोपुरम का निर्माण 1980 में पूरा कराया गया।

अविनाशी मतलब जिसका कभी विनाश नहीं होता है । शिव ही तो हैं अजर, अमर और अविनाशी। अविनाशी के शिव मंदिर की एक खासियत है यहां पार्वती की स्थिति। शिव के सभी मंदिरों में पार्वती की स्थापना उनके बायीं तरफ होती है। पर यहां पर पार्वती उनके दाहिनी तरफ बैठी हैं।

अविनाशी शहर तमिलनाडु के कोंगानाडू प्रांत का हिस्सा हुआ करता था। इस प्रांत में धारापुरम, इरोड, कोयंबटूर,  त्रिपुर, इरोड, सेलम, करूर आदि शहर आते थे। संगम काल में यह शहर थिरुपुकोल्यूर नाम से जाना जाता था। कोंगानाडू क्षेत्र में कुल सात प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं, इनमें अविनाशी लिंगेश्वर प्रमुख है। अविनाशी को तमिलनाडु का काशी माना जाता है। मंदिर परिसर में एक सरोवर है जिसे गंगा तीर्थ माना जाता है। आमवस्या के दिन खास तौर पर लोग इस तीर्थ में स्नान करते आते हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा दिन में प्रतिदिन अन्नदानम का भी संचालन किया जाता है।


मंदिर परिसर में भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और माता विशालाक्षी की भी प्रतिमाएं हैं। मंदिर परिसर में 63 नयनारों की भी मूर्तियां हैं। मंदिर में गज लक्ष्मी और माता दुर्गा की भी प्रतिमा स्थापित है। दक्षिण भारत में शिवभक्त नयनारों का काफी महत्व है।

अविनाशी के लिंगेश्वर मंदिर में हर साल चैत्र मास में मंदिर में सालाना ब्रह्मोत्सव का मनाया जाता है।तब यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।


मंदिर खुलने का समय – सुबह 5 बजे से दोपहर 1 बजे तक मंदिर खुलता है। फिर शाम को 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक मंदिर खुला रहता है। मंदिर के बाहर पूजन सामग्री की कई दुकानें है। मुख्य सड़क पर हनुमान जी की एक विशाल प्रतिमा है।

कैसे पहुंचे - शिव का यह मंदिर अविनाशी में चेन्नई कोचीन हाईवे एनएच 47 पर स्थित है। यह सत्यमंगलम की ओर जा रहे राजमार्ग पर बायीं तरफ स्थित है। मंदिर के पास ही बस स्टाप है, जहां आप किसी तरफ से भी आने पर उतर कर मंदिर जा सकते हैं।

अविनाशी  - शिव हैं अजर अमर और अविनाशी
तमिलाडु में त्रिपुर के पास स्थित इस कस्बे का नाम है अविनाशी। यह है शिव के प्रसिद्ध अविनाशी मंदिर के लिए। यहां महादेव शिव का नाम अविनाशी है। त्रिपुर शहर से अविनाशी की दूरी महज 15 किलोमीटर है। पर त्रिपुर शहर के तेजी से हो रहे विस्तार ने त्रिपुर और अविनाशी के बीच की दूरी खत्म कर दी है।
अविनाशी नेशनल हाईवे नंबर 47 पर स्थित है। अब अविनाशी का विकास कोयंबटूर के सब अर्बन शहर के तौर पर भी हो रहा है। अविनाशी की स्थिति कुछ ऐसी है कि यहां से त्रिपुर 15 किलोमीटर तो कोयंबटूर, मेट्टुपालियम और सत्यमंगलम तीनों शहरों की दूरी 40 किलोमीटर है। त्रिपुर से स्थानीय बस में बैठकर मैं अविनाशी बस स्टैंड पहुंच गया हूं। चौड़ी और साफ सुथरी सड़कों पर अविनाशी का बाजार काफी अच्छा है।

वह यादगार लंच 
अविनाशी के बाजार में थोड़ी दूर चलने के बाद खाने की इच्छा हुई तो एक शाकाहारी भोजनालय में प्रविष्ट हुआ। नाम है होटल सीताराम। दोपहर के अनलिमिटेड भोजन की थाली 80 रुपये की है।पर मैंने 60 रुपये की लिमिटेड थाली मंगाई। अब इसमें क्या क्या है जरा देखिए। लेमन राइस , कर्ड राइस, टोमैटो राइस, वेज बिरयानी, चपाती, कोरमा, पापड़ और रायता। इतना सब कुछ बड़ी मुश्किल से खाया गया। पर स्वाद में ये खाना दक्षिण भारत में अब तक मिले सबसे बेहतरीन भोजन में था। और कीमत बिल्कुल वाजिब। मैंने होटल के मैनेजर को खास तौर पर धन्यवाद कहा।
( TAMILNADU, AVINASHI SHIVA TEMPLE ) 

-      विद्युत प्रकाश मौर्य

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