Monday, October 1, 2018

त्रिची से कोडाईकनाल की ओर – वाया डिंडिगुल

त्रिची में सुबह सुबह होटल अमुथाम रेजिडेंसी को चेकआउटर कर दिया। आगे ठंडी जगह पर जा रहा हूं इसलिए सुबह सुबह ही स्नान कर लिया। त्रिची में जून माह में इतनी गर्मी है कि बार बार स्नान करने की इच्छा होती है। पर पांच बजे सुबह का मौसम सुहाना है। हालांकि हमारा होटल डिंडिगुल हाईवे पर है पर डिंडिगुल जाने वाली बसें होटल के सामने नहीं रुकतीं। तो मैं सुबह साढ़े पांच बजे बस स्टैंड पहुंच गया हूं। यहां से सीधी कोडाईकनाल के लिए भी बसे हैं। पर मैं डिंडिगुल की बस में बैठ जाता हूं क्योंकि कोडाई वाली सीधी बस साढ़े छह बजे जाएगी। वैसे भी त्रिची से कोडाई जाने वाली हर बस डिंडिगुल होकर ही जाएगी।

सुबह की बस ज्यादा भरी नहीं। सुहाने मौसम में तमिलनाडु रोडवेज की बस भागी जा रही है। त्रिची से डिंडिगुल की दूरी तकरीबन 100 किलोमीटर है। सड़क अच्छे हाल में है तो सफर दो घंटे में तय होगा। वहीं डिंडिगुल से कोडाईकनाल की दूरी 88 किलोमीटर है। बस के सफर में सीधे टिकट खरीदें या जर्नी ब्रेक के साथ किराये का फर्क नहीं पड़ता। त्रिची शहर पार करने के बाद तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनीवर्सिटी का कैंपस दिखाई देता है। आगे छोटा सा कस्बा पोथमपेटपुट्टी आता है। इसके बाद मानापाराई। यह रेलवे स्टेशन भी है। बस में कुछ लोग चढ़ रहे हैं और उतर रहे हैं। पर बस कहीं भी ज्यादा देर तक नहीं रुकती। एलेंगाकुरुची, वायामपट्टी के बाद हम डिंडिगुल शहर में पहुंच गए हैं। 

डिंडिगुल तमिलनाडु का जिला है। इसे लोग संक्षेप में डिंडि भी कहते हैं। बस ने सुबह 7.30 बजे मुझे कामराज बस स्टैंड में पहुंचा दिया है। अगली बस लेने से पहले मैं बस स्टैंड के बाहर एक रेस्टोरेंट में नास्ते के लिए पहुंच गया हूं। मसाला डोसा और बड़ा नास्ते में लिया। वापस आकर कोडाइकनाल जाने वाली बस में जगह ले ली है।

अगर रेल से पहुंच रहे हैं तो चेन्नई से डिंडिगुल, कोडाईकनाल रोड, मदुरै कहीं भी उतरकर कोडाई कनाल के लिए बस ले सकते हैं। पर इनमें डिंडिगुल सबसे मुफीद है। वैसे कोडाई से निकटतम रेलवे स्टेशन पलनी है। यह डिंडिगुल कोयंबटूर मार्ग पर है। पलनी से भी बस से कोडाई जाया जा सकता है। डिंडिगुल में दूरियां पढ़ता हूं। कोडाई 91 किलोमीटर। थेनी 71 किलोमीटर। मुन्नार- 157 किलोमीटर । आप वाया थेनी यहां से केरल के मुन्नार भी जा सकते हैं।

डिंडिगुल तमिलनाडु का जिला है और शहर जिला मुख्यालय है। यह चेन्नई से 420 किलोमीटर दूर है। 1985 से पहले यह मदुरै जिले का ही हिस्सा था। डिंडिगुल का भी अपना इतिहास है। यह शहर कभी टीपू सुल्तान के शासन हिस्सा रहा। 

डिंडिगुल में रॉक फोर्ट यानी किला है, जिसे समय हो तो देखा जा सकता है। दक्षिण का यह शहर ताला बनाने के लिए और चमड़े के टेनेरियों के लिए भी जाना जाता है। यहां गांधीग्राम रुरल यूनीवर्सिटी की स्थापना की गई है। तो लगे हाथ यह भी जान लिजिए की तमिलनाडु का लोकप्रिय हिल स्टेशन कोडाईकनाल जहां हम जा रहे हैं वह भी डिंडिगुल जिले का ही हिस्सा है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
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( DINDIGUL, TAMILNADU, BUS, TSRTC )