Tuesday, September 25, 2018

स्टीम इंजन आजाद के साथ एक सफर – अतीत की याद

धुआं उड़ाती स्टीम इंजन की याद तो आपको होगी न। पर अगर आपने इक्कीसवीं सदी में होश संभाला हो तो शायद आपको इसकी याद न हो। क्योंकि 1998 के बाद देश के ज्यादा हिस्सों से स्टीम इंजन की विदाई हो चुकी थी। पर भारतीय रेलवे ने तमाम स्टीम इंजन को संरक्षित करके रखा है हरियाणा के रेवाड़ी स्टीम शेड में। 
इनमें से कई इंजन कुछ फिल्मों की शूटिंग में इस्तेमाल किए गए हैं। पर आम जनता को स्टीम इंजन की सवारी का एक बार फिर से मौका मिले इसके लिए रेलवे ने मौका दिया है। ब्राड गेज के स्टीम इंजन आजाद के साथ सफर का आनंद ले सकते हैं आप हर रविवार को गुरुग्राम के पास गढ़ी हरसुरु नामक रेलवे स्टेशन से फारुख नगर के बीच। वैसे तो इसका उदघाटन 15 सितंबर को हुआ, पर आम जनता के लिए इसे रविवार 23 सितंबर को शुरू किया गया।  
  
स्टीम स्पेशल की पहली औपचारिक राइड, गुरुग्राम के पास गढ़ी हरसुरु से फारुख नगर के बीच। रविवार की सुबह गढ़ी हरसुरु रेलवे स्टेशन से स्टीम का सफर सुबह 9.30 बजे आरंभ होता है। स्टीम लोको आजाद सात कोच को लेकर चल रहा है एक सुहाने सफर पर। इसके सभी कोचों को तिरंगे रंग में रंगा गया है। वैसे ये ट्रेन हर रविवार को ये सफर सुबह नौ बजे चलेगी गढी हरसुरु से फरुख नगर के बीच। आप 25 नवंबर तक इस हेरिटेज सफर पर सवार हो सकते हैं। और एक तरफ का टिकट है महज 10 रुपये का। 

पहले दिन के सफर में कई रेलवे के इस विरासत के सफर के साथी बने। दिल्ली से इफको के जीएम एके गुप्ता अपने परिवार के साथ पहुंचे हैं। वे इस सफर को लेकर बड़े उत्साह में है। गुरुग्राम के बजरंग यादव अपने दो बच्चों के लेकर पहुंचे हैं। इन बच्चों ने कभी स्टीम इंजन नहीं देखा। दिल्ली से भारत स्काउट गाइड के 20 लोगों की टोली पहुंची है, जो खूब तस्वीरें लेने में व्यस्त है। सभी लोग स्टीम इंजन क कार्यप्रणाली देखना चाहते हैं। कोयला कहां से लिया जाता है। स्टीम कैसे बनता है। सिटी कैसे बजती है। इस लोकोमोटिव में एक्सलरेटर कौन सा है। सब जान लेना चाहते हैं। लोको पायलट रविंद्र लोगों की जिज्ञासा शांत करने की कोशिश करते हैं।

कैसा है आजाद – तो कुछ बातें स्टीम लोकोमोटिव आजाद के बारे में। यह कई फिल्मों में अपना जौहर दिखा चुके स्टीम लोको अकबर का भाई है समझो। 1947 में इस लोकोमोटिव को अमेरिकन कंपनी ब्लाडविन लोकोमोटिव वर्क्स से मंगाया गया था। आजाद नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह आजादी के बाद का सबसे पहला इंजन था। यह पहियों की संरचना के हिसाब से 4-6-2 श्रेणी का है। इसका नंबर है डब्लूपी 7200  इसमें कोयला डालने की क्षमता 15 टन की है। पानी डालने की क्षमता 5500 गैलन की है। यह 2680 हार्स पावर की ऊर्जा उत्पन्न करता है। अधितम स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। आजाद 1911 तक पटरियों पर अपनी सेवाएं देता रहा। अब इसे खास खास मौकों पर उतारा जाता है।

आपको पता है आजाद को स्टार्ट करने में आजकल छह घंटे का समय लगता है। यूं समझ लिजिए इन स्टीम इंजन का रखरखाव अब बहुत महंगा हो गया है, क्योंकि स्टीम इंजन अब बनते नहीं। कंपनियां आफ्टर सेल सर्विस नहीं देतीं।

लोको पायलट रविंद्र बताते हैं कि उनकी भर्ती तो इलेक्ट्रिक लोको पायलट के तौर पर हुई थी, पर बादल डीजल लोको चलाया। अब खास प्रशिक्षण के बाद स्टीम लोको चला रहे हैं। क्योंकि अब स्टीम इंजन नहीं बचे तो स्टीम इंजन चलाने वाले पायलट भी नहीं बचे। स्टीम लोको को चलाना डीजल या इलेक्ट्रिक की तुलना में मुश्किल काम है। दो फोर मैन लगातार बायलर में कोयला डालने में जुटे रहे हैं। यहां तो लोको पायलट रविंद्र खुद ही कोयला डालने में लगे हैं। चलते चलते हमने लोको पायलट रविंद्र के साथ एक सेल्फी भी ली। उनकी मेहनत और निष्ठा को सलाम।

कैसे पहुंचे - गुरुग्राम रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से से गढी हरुसुर की दूरी 10 किलोमीटर है। लोकल ट्रेन या शेयर आटो से पहुंचा सकता है। आप दिल्ली रेलवे स्टेशन या सराय रोहिल्ला से सीधे लोकल ट्रेन द्वारा भी पहुंच सकते हैं। ये लोकल ट्रेनें दिल्ली कैंट पालम होकर गुजरती हैं।
(HARYANA , RAIL , STEAM LOCOMOTIVE, AZAD ) 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य

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