Wednesday, September 5, 2018

ये गोवर्धन मेड जुगाड़ गाड़ी- बाइक बनी तिपहिया


आपने देश भर के कई हिस्सों  जुगाड़ गाडियां तो देखी होंगी पर मथुरा के पास गोवर्धन की यह जुगाड़ गाड़ी उन सबसे अलग है। दाद देनी पड़ेगी इसके आविष्कारक को। एक 100 सीसी की बाइक का पिछला पहिया हटाकर पीछे  दो पहिए लगाकर तीन पहिया गाड़ी तैयार कर दी गई है। इसमें छह सवारियां बैठ जाती है। मतलब यह पूरी तरह आटो रिक्शा हो गया।

आटोरिक्शा का बाप है ये - अरे इसे तो आटोरिक्शा का बाप कहिए। आटो रिक्शा में तो सिर्फ तीन सवारियां बैठती हैं, पर यहां पर छह बिठाई जाती हैं। गोवर्धन और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में ऐसे जुगाड़ थ्री ह्वीलर खूब चलते हुए दिखाई देते हैं। आमतौर पर इन्हें बजाज, हीरो या टीवीसी की 100 सीसी की बेसिक माडल वाली बाइक को मोडिफाई करके बनाया गया है। इसलिए ये तेल की खपत के लिहाज से आटो रिक्शा से भी बेहतर हैं। मतलब कमाई की लिहाज से इसे सवारी बिठाकर चलाना आटोरिक्शा की तुलना में ज्यादा फायदेमंद है। अगर बैटरी रिक्शा से तुलना करें तो यह ज्यादा सवारियां ढोने के साथ ज्यादा गति से दौड़ने और ज्यादा भार उठाने में भी सक्षम है।

कीमत में किफायती तेल की भी बचत - अगर कीमत की बात करें तो नई बाइक 40 से 45 हजार के आसपास आ रही है। इसमें 20 से 30 हजार रुपये खर्च करके गोवर्धन के मैकेनिक इसे बड़े आराम से पैसेंजर वाहन में तब्दील कर देते हैं। अगर आप किसी सेकेंड हैंड बाइक से मोडिफिकेशन कराते हैं तो ऐसी गाड़ी 50 हजार से भी कम में तैयार हो सकती है। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि इस तरह की गाड़ी बनाने का आडिया किसी मोटर बाइक बनाने वाली कंपनी को क्यों नहीं आया। अगर आप कोई नया आटो रिक्शा खरीदना चाहें तो वह दो से ढाई लाख रुपये मे आएगा। गोवर्धन ब्रांड ये जुगाड़ समीप के राजस्थान के गांवों में भी चलाया जा रहा है।

आरटीओ से मान्यता प्राप्त नहीं -  अगर इसके कानूनी पहलू की बात करें तो निश्चित रुप से यह गैरकानूनी वाहन है। आरटीओ इस तरह के मोडिफिकेशन करने और इस पर सवारी ढोने की इजाजत नहीं देता है। पर यहां आरटीओ इन वाहनों को पकड़ता भी नहीं है। वैसे यूपी में डीजल इंजन की मदद से जुगाड़ वाहन बनाए जाते हैं। पहले आरटीओ उन्हे पकड़ता था, पर इस मामले में हाईकोर्ट का स्टे है। कृषि कार्य के लिए ऐसे जुगाड़ गाड़ी का इस्तेमाल करने पर आरटीओ उन्हें पकड़ नहीं सकता। पर अगर इससे शहरी क्षेत्र में सवारी ढोया जा रहा है तो उस पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

जामनगर के छकड़े से अच्छा - गोवर्धन का ये जुगाड़ गुजरात के कई हिस्सों में चलने वाले जामनगर के छकड़ा से बेहतर हैं। इस मामले में कि ये प्रदूषण कम फैलाते हैं। आवाज कम करते हैं। कीमत भी कम है। हालांकि इनका डिजाइन जामनगर के छकड़ा से मिलता जुलता है। किसी जमाने में दिल्ली मेंचलने वाले फटफट भी इसी डिजाइन के होते है। पर वे भी बुलेट का इंजन लगा होने के कारण खूब आवाज करते थे।  
( BIKE, THREE WHEELAR, JUGAD INDIA KA, GOVARDHAN )
-विद्युत प्रकाश मौर्य
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