Sunday, September 30, 2018

त्रिची रेलवे स्टेशन पर जापानी स्टीम लोकोमोटिव

श्रीरंगम रंगनाथ स्वामी के दर्शन करके वापस लौट रहा हूं। आज का रात्रि विश्राम त्रिची शहर में ही है। मंदिर के पास से त्रिची बस स्टैंड तक जाने वाली बस मिल गई। बस रास्ते में त्रिची के भीड़ भाड़ वाले बाजारों से होकर गुजरी। गांधी मार्केट में रात को अति व्यस्त सजा हुआ बाजार नजर आता है। पर मैं बस स्टैंड से पहले तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन के सामने ही उतर जाता हूं।

तमिलनाडु का अति व्यस्त रेलवे स्टेशन -  तिरुचिरापल्ली जंक्शन तमिलनाडु का एक अतिव्यस्त रेलवे स्टेशन है। इसका स्टेशन कोड टीपीजे है। यह चेन्नई सेंट्रल के बाद तमिलनाडु का दूसरा सबसे बड़ा और व्यस्त रेलवे स्टेशन है। त्रिची रेलवे  का डिविजन भी है। डीआरएम आफिस रेलवे स्टेशन के बगल में ही स्थित है। इतिहास में जाएं तो यहां मीटर गेज की रेलवे लाइन 1859 में बनी थी तब त्रिची से नागापट्टनम के बीच पहली लाइन बिछाई गई थी। त्रिची तमिलनाडु के मानचित्र में देखें तो बिल्कुल बीच का शहर है। इसलिए यहां से तमिलनाडु के हर कोने के लिए ट्रेनें मिल जाएंगी। किसी जमाने में तमिलनाडु के ज्यादातर हिस्से मीटर गेज लाइन वाले थे। त्रिची से विल्लूपुरम, वेल्लोर, तंजौर, पुड्डुचेरि , कराइकल, माइलादुताराई, मन्नारगुडी आदि के लिए लाइने जाती हैं। चेन्नई और मदुरै की तरफ भी यहां से जा सकते हैं।

जापानी स्टीम लोकोमोटिव वाईजी 4310 - त्रिची रेलवे स्टेशन के बाहर एक स्टीम लोकोमोटिव को संरक्षित करके रखा गया है। आते जाते लोगों की नजर इस लोकोमोटिव पर पड़ती है। इसके ऊर लिखा है इसका माडल नंबर वाईजी 4310 । यह एक स्टीम लोकोमोटिव हुआ करता था।  इसका मेक नंबर निप्पौन 1740 है। यह 1956 का बना हुआ लोकोमोटिव है। इसकी पहियों की संरचना 2-8-2 श्रेणी की है। इसने तकरीबन चार दशक तक इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं। वाईजी मीटर गेज के स्टीम इंजनों की आखिरी श्रंखला है। इसका निर्माण जापान की निप्पोन शारयो सेजो कैशल कंपनी लिमिटेड (Nippon Sharyo Seizo Kaishal Co Ltd Japan) ने किया था। भारत में निप्पौन जापान से ज्यादातर नैरोगेज के लोकोमोटिव मंगाए गए थे। वाईजी सीरीज के मीटर गेज स्टीम इंजन मंगाने के दो उदाहरण ही मिलते हैं। वैसे निप्पौन शारयो जापान की अग्रणी रॉलिंग स्टॉक निर्माता कंपनी है।
इसकी स्थापना 1896 में हुई थी। तो इस जापानी लोकोमोटिव को चारों तरफ से जी भरकर देख लेने के बाद आगे बढ़ जाता हूं।

त्रिची शहर में लोकल सफर के लिए आटो रिक्शा से थोड़ी बड़ी गाड़ियां चलती हैं जो आकार में किसी बस जैसी हैं। मुझे बस स्टैंड से डिंडिगुल रोड पर जाने के लिए ऐसी ही गाड़ी मिल गई। अपने होटल पहुंच गया हूं। पर होटल का रेस्टोरेंट रात को बंद रहता है। तो आसपास में खाने के लिए कुछ दूसरे विकल्प तलाश करने निकला। 
एक रेस्टोरेंट मिला जहां चपाती मिल रही है। 35 रुपये में दो चपाती सब्जी के साथ। इस बार की दक्षिण यात्रा में मैं देख रहा हूं कि चपाती हर जगह मिल जा रही है। कहीं तुरंत बनाई जाती है तो कहीं हॉफ कुक्ड रेडिमेड चपाती को जल्दी से पका कर पेश कर दिया जाता है। पर यह अच्छा है कि आप उत्तर भारत से आए हैं तो आपको चपाती मिल जाएगी। हालांकि मैं तो दक्षिण भारतीय खाना खाकर महीनों गुजार सकता हूं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
Write me - vidyut@daanapaani.net
(TRICHY STEAM LOCOMOTIVE, RAIL )