Friday, September 28, 2018

धरती पर वैकुंठ – श्रीरंगम मंदिर, तिरुचिरापल्ली

श्रीरंगम मंदिर ( भगवान विष्णु का मंदिर ) 
क्या आपको पता है कि देश का सबसे विशाल मंदिर कौन सा है। जवाब है तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली शहर स्थित रंगनाथ स्वामी मंदिर। यह मंदिर 156 एकड़ में फैला है। वहीं दुनिया का सबसे विशाल मंदिर कंबोडिया का अंकोरवाट मंदिर है, जिसका परिसर 402 एकड़ में फैला है। तीसरे नंबर पर दिल्ली का अक्षर धाम मंदिर आता है जो 60 एकड़ में बना है। 
तिरुचिरापल्ली शहर में कावेरी नदी सानिध्य में 'श्रीरंगम' नामक द्वीप पर बने श्रीरंगम मंदिर को 'भू-लोक वैकुंठ' अर्थात् 'धरती का वैकुंठ' कहा जाता है। श्रीरंगम आकार में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर माना जाता है। कंबोडिया के अंकोर वाट के बाद ये मंदिर भव्यता में सबसे बड़ा है। यह 156 एकड़ में विस्तारित है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपनी भव्यता के लिए देश भर में चर्चित है।

दक्षिण भारत के कुल 108 वैष्णव मंदिरों में श्रीरंगम का स्थान सबसे ऊपर माना जाता है। वैष्णव भक्त रंगनाथस्वामी मंदिर को स्वर्ग के लिए पवित्र प्रवेश द्वार मानते हैं। भगवान को रंगनाथन के रूप में पूजा जाता है, इन्‍हे भगवान विष्‍णु का ही अवतार माना जाता है। मंदिर के अंदर आदिशेष भगवान विष्णु की शैय्या पर लेटी हुई अखंड भव्य काले रंग की प्रतिमा है।

इस मंदिर, द्रविण शैली में बना हुआ है। मंदिर का निर्माण चोल वंश के राजकुमार धर्म वर्मा ने करवाया था। मुस्लिम आक्रमणकारियों ने मंदिर को क्षति पहुंचाई। बाद में चोल, पांड्य, होयसल राजाओं ने मंदिर और भव्य रूप प्रदान किया। वर्तमान मंदिर 15वीं सदी का बताया जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर आदि शंकराचार्य के समय काफी प्रसिद्ध था। यह कहा जाता है की आदि शंकराचार्य खुद यहां आकर भगवान के लिए रंगनाथाष्टकम गाते थे।

सात घेरों के अंदर मंदिर - श्रीरंगम का मंदिर कुल सात घेरों के अंदर है। इनमें से चार घेरों में श्रीरंगम का नगर बसा हुआ है। मंदिर के बाहरी घेरे का परिमाप 3 किलोमीटर लंबा है। मंदिर के अंदर का मुख्य आकर्षण 1000 स्तंभों वाला मुख्य कक्ष है। इन स्तंभों में अद्भुत नक्काशी देखने को मिलती है। मंदिर परिसर में कुल 53 देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।

विशाल गोपुरम – श्रीरंगम मंदिर में कुल 21 गोपुरम बनाए गए हैं। इसमें दो गोपुरम काफी विशाल हैं। मंदिर का सातवां घेरा पूरी तरह तैयार नहीं हो सका था। आप छठे घेरे के विशाल गोपुरम से मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं। यह गोपुरम सबसे विशाल है।

मंदिर की आदि कथा – कहा जाता है कि श्रीराम राज्याभिषेक के पश्चात् विभीषण ने श्रीरघुनाथजी से श्रीरंगजी को मांग लिया। वह इन्हें लेकर लंका जा रहे थे। इसी दौरान रंगद्वीप में उन्हें रखकर स्नान पूजन करने लगे। पूजा के बाद रंगजी उठाना चाहा पर वे नहीं उठा सके। वे अनशन करने लगे तो स्वप्न में आदेश हुआ कावेरी का यह द्वीप मुझे प्रिय है। मैं लंका की ओर मुख करके स्थित हो जाउंगा। तुम यहीं दर्शन कर जाया करो। तबसे श्रीरंगजी यहीं पर विराजमान हैं। मंदिर में रंगजी की प्रतिमा शयनावस्था में है। प्रतिमा काले पत्थरों की है। श्रीरंगनाथ स्वामी शेषनाग की शैय्या पर विराजमान हैं। उनकी गिनती दक्षिण भारत के जागृत देवताओं में होती ैहै, जो किसी भी तुरंत सुन लेते हैं। 

श्रीरंगम के लोगों के लिए तो रंगजी एक जीवित व्यक्ति की तरह हैं। स्थानीय लोग मंदिर इस तरह जाते हैं जैसे वे अपने परिवार के ही किसी सदस्य से मिलने जा रहे हों। इसलिए सुबह हो या शाम सालों भर मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती है।
दर्शन का समय – मंदिर सुबह से रात्रि 9 बजे तक खुला रहता है। दोपहर में कुछ घंटों के लिए मंदिर बंद रहता है। मंदिर में एक साइनबोर्ड पर लिखा है- वनली हिंदूज आर एलाउड। मार्गशीष में आने वाली वैकुंठ एकादशी के समय श्रीरंगम में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। वहीं हर महीने के शुक्लपक्ष में सप्तमी के दिन श्रीरंगजी की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि कृष्ण दशमी के दिन यहां कावेरी में स्नान करने से आठ तीर्थों का पुण्य मिलता है।
रंगनाथ मंदिर का प्रसाद -  मंदिर के अंदर बने प्रसाद काउंटर से आप प्रसाद खरीद सकते हैं। यहां 15 रुपये में लेमन राइस प्रसाद के रुप में लिया जा सकता है। इसके अलावा भी कई तरह के प्रसाद हैं, जिनकी दरें बोर्ड पर लिखी हैं। आप अपनी सुविधानुसार प्रसाद खरीद सकते हैं।

कैसे पहुंचे - तिरुचिराप्पल्ली शहर के निकट कावेरी और कोलेरून नदियों के विभाजन के एक द्वीप पर यह मंदिर स्थित है। त्रिची रेलवे स्टेशन ( स्टेशन कोड - TPJ ) से मंदिर की दूरी 12 किलोमीटर है। मंदिर तक जाने के लिए त्रिची बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से लोकल बसें मिल जाती हैं। वैसे श्रीरंगम में भी रेलवे स्टेशन है। मंदिर के आसपास भी श्रद्धालुओं के रहने के लिए सस्ते आवास उपलब्ध हैं। अगर आप कुछ घंटे के लिए ठहरना चाहते हैं तो ऐसे आवास भी उपलब्ध हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से भी यात्री निवास का निर्माण कराया गया है।

मंदिर की ओर - मैं रॉक फोर्ट मंदिर के दर्शन के बाद श्रीरंगम के लिए चल पड़ा हूं। लोकल बस मिल गई है। थोड़ी भीड़ है पर बाद में जगह मिल गई। श्रीरंगम बस स्टैंड से मंदिर के लिए एक किलोमीटर की पदयात्रा है। पर बाजार का मुआयना करते हुए मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंच गया। दर्शन के लिए लंबी लाइन है। दो घंटे इंतजार के बाद श्रीरंगजी के दर्शन प्राप्त हुए। मंदिर के बाकी हिस्सों का मुआयना करता हुआ बाहर आ गया।

(SRI RANGAM TEMPLE, TRICHY, BIGGEST TEMPLE COMPLEX IN INDIA ) 
-    विद्युत प्रकाश मौर्य


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